पीएम मोदी के ऐलान ने वैक्सीनेशन पर राजनीति की बंद, सबको टीका देने का लक्ष्य किया आसान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संशोधित टीकाकरण नीति का ऐलान किया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संशोधित टीकाकरण नीति का ऐलान किया.

मुफ्त टीकाकरण की नीति (Vaccination Policy) के संदर्भ में पीएम नरेंद्र मोदी को 1 जून को ही प्रजेंटेशन दिया गया. इसी दिन टीकाकरण के पुराने मॉडल को एक महीना हो चुका था.

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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  (Narendra Modi) ने सोमवार को देश में संशोधित वैक्सीनेशन पॉलिसी का ऐलान किया. राष्ट्र के नाम दिए गए एक संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि राज्य सरकारों को अब 18-44 वर्ष के लिए भी टीकों का इंतजाम केंद्र करेगा और यह मुफ्त होगा. बीते शुक्रवार, 6 जून को News18 ने सबसे पहले इस आशय की खबर प्रकाशित की थी कि केंद्र सरकार टीकाकरण नीति पर दोबारा से विचार करने जा रही है. मुफ्त टीकाकरण की नीति के संदर्भ में पीएम मोदी को 1 जून को ही प्रजेंटेशन दिया गया. इसी दिन टीकाकरण के पुराने मॉडल को एक महीना हो चुका था. सरकार के एक सूत्र ने कहा कि 'पीएम मोदी ने बैठक में ही इसकी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी. उसी दिन से इस दिशा में काम शुरू हुआ और आज इसकी घोषणा की गई.'

प्रधानमंत्री की यह बैठक सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र की टीकाकरण नीति की समीक्षा के आदेश देने के बाद हुई थी. 31 मई को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा था कि वह अपनी नीति की समीक्षा करे. 2 जून को शीर्ष अदालत का आदेश, सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड हुआ था. इसमें सरकार से इस संबंध में अलग-अलग बिन्दुओं पर दो हफ्ते में हलफनामा दायर करने का आदेश दिया गया था.

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केंद्र ने पहले ही बना ली थी योजना
मिली जानकारी के अनुसार जब वैक्सीन के कई मैन्यफैक्चरर्स ने भारत से संपर्क किया तभी केंद्र ने नीति में संशोधन करने की योजना बना ली थी. केंद्र का मानना था कि राज्यों से पांच या छह अलग-अलग वैक्सीन कंपनियों से वार्ता करने की उम्मीद करना संभव नहीं था. पीएम ने सोमवार को अपने भाषण में कहा कि मई में नीति में बदलाव एक 'प्रयोग' था.

हालांकि टीकाकरण नीति के खिलाफ न केवल कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों, बल्कि पिछले सप्ताह नवीन पटनायक और जगनमोहन रेड्डी जैसे 'मित्र' मुख्यमंत्रियों ने भी आवाज मुखर की. माना जा रहा है कि 31 मई को सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने इस पूरी प्रक्रिया की गति बढ़ा दी होगी. पीएम की घोषणा के अनुसार संशोधित वैक्सीन नीति अब 21 जून से लागू होगी.

राहुल गांधी ने लिखा था पत्र



कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वायनाड से सांसद राहुल गांधी ने अप्रैल में पीएम को पत्र लिखकर कहा था कि राज्य सरकारों को 'वैक्सीन की खरीद और वितरण में अधिक से अधिक हिस्सेदारी' दी जाए. वहीं पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी भी चाहती थीं कि उनका राज्य सीधे कंपनियों से बात करे. केंद्र ने भी राज्यों को पांच हफ्ते का मौका दिया. हालांकि ग्लोबल टेंडर्स में राज्यों को मिली असफलता से असलियत का अंदाजा हुआ. केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा 'अब राजनीति आखिरकार खत्म हो गई.  राज्यों को सभी के लिए टीके मुफ्त में मिलेंगे.'

माना जा रहा है कि टीकाकरण की नई नीति के जरिये देश के 94 करोड़ व्यस्क लोगों को वैक्सीन आसानी से लग सकती है. केंद्र सरकार के अधिकारी ने कहा, 'फाइजर, मॉडर्ना और J&J जैसी कंपनियां केवल केंद्र के साथ काम करेंगी. प्लस बायोटेक ई को केंद्र द्वारा अग्रिम के रूप में 1500 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं. हम उनसे बातचीत करेंगे.'

अधिकारियों ने कहा कि निजी अस्पतालों के लिए 25% कोटा भी सही है. जो लोग वैक्सीनेशन के लिए पैसा दे सकते हैं, तो वह निजी अस्पतालों का रुख कर सकते हैं. कई अस्पतालों से यह शिकायतें आ रही थीं कि वह वैक्सीन की लागत से ज्यादा कीमत ले रहे हैं, ऐसे में इसके लिए भी अधिकतम 150 रुपए सर्विस चार्ज तय कर दिया गया है.


केंद्र मई में भी राज्यों की आबादी के अनुसार उनको टीके के आवंटन के मामले में हस्तक्षेप कर रहा था. उस वक्त कुछ राज्यों ने नाराजगी जताई थी कि जब राज्य के संसाधन से टीके खरीदे जा रहे हैं तो केंद्र, आवंटन में हस्तक्षेप क्यों कर रहा है. हालांकि 21 जून से लागू हो रही नई टीका नीति में केंद्र, राज्यों को वैक्सीन आवंटित भी करेगा और उसके लिए भुगतान भी देगा.

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