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कोरोना से जंग में PM का बड़ा ऐलान-18 से ज्यादा उम्र के लोगों को लगेगी मुफ्त में वैक्सीन

18 से ऊपर आयु के सभी लोगों को केन्द्र सरकार मुफ्त टीका लगवाएगी. (File Photo)

Covid Vaccination: पीएम मोदी ने ऐलान किया कि टीका बनाने वाली कंपनियां अपने कोटे का 25 फीसदी निजी अस्पतालों के लिए रखेंगी और निजी अस्पताल भी तय कीमत से सिर्फ 150 रुपये ही ज्यादा ले पाएंगे. साथ ही दूसरा बड़ा ऐलान कि पीएम गरीब कल्याण योजना के तहत 80 करोड़ गरीब लोगों के लिए मुफ्त अन्न योजना को दिवाली तक आगे बढ़ाया जाएगा.

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नई दिल्ली. कोरोना की दूसरी लहर पर धीरे धीरे काबू पाते भारतवासियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मुफ्त टीकाकरण का ऐलान खासा भाया है. ज्यों ही पीएम मोदी ने ऐलान किया कि वो शाम 5 बजे एक बार फिर राष्ट्र के नाम संदेश देंगे तो अटकलों का बाजार एक बार फिर गरम हो गया. कई राजनीतिक पंडित भी पीएम मोदी के संदेशों पर अटकलें लगाकर मुंह की खा चुके हैं. ऐसे में तय था कि पीएम कोरोना के खिलाफ जंग पर ही बोलेंगे. लेकिन इस मुश्किल की घड़ी में पीएम हर वर्ग के चेहरे पर मुस्कुराहट ले आएंगे ये किसी ने सोचा ही नहीं था. अपने संदेश पीएम ने ऐलान कर दिया कि अब किसी भी राज्य सरकार को कोरोना के टीके पर एक भी रुपया खर्च नहीं करना पडेगा. 18 से ऊपर आयु के सभी लोगों को केन्द्र सरकार मुफ्त टीका लगवाएगी. साथ ही जो लोग निजी अस्पतालों में टीका लगवाने के इच्छुक हैं उनके लिए भी सरकार ने व्यवस्था कर दी है.

पीएम मोदी ने ऐलान किया कि टीका बनाने वाली कंपनियां अपने कोटे का 25 फीसदी निजी अस्पतालों के लिए रखेंगी और निजी अस्पताल भी तय कीमत से सिर्फ 150 रुपये ही ज्यादा ले पाएंगे. साथ ही दूसरा बड़ा ऐलान कि पीएम गरीब कल्याण योजना के तहत 80 करोड़ गरीब लोगों के लिए मुफ्त अन्न योजना को दिवाली तक आगे बढ़ाया जाएगा. यानी अब त्योहारों यानी नवंबर तक 80 करोड़ से अधिक लोगों को तय अन्न मुफ्त मिलेगा.



अगर नीयत साफ हो और खुद पर भरोसा तो सब कुछ संभव है-पीएम मोदी
पीएम मोदी का दर्द तब छलक कर सामने आया जब उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी वैश्विक बीमारी से पूरा देश एक साथ लड़ा है. लेकिन दूसरी लहर के बाद आशंकाएं बढ़ती रही कि भारत कैसे इतनी बड़ी जनसंख्या का टीकाकरण करेगा. पीएम मोदी ने बताया कि अगर नीयत साफ हो तो कुछ भी संभव हो सकता है. देश की दो कंपनियों ने टीका बनाकर दिखा दिया कि भारत मे अब कुछ भी असंभव नहीं है. पीएम का कहना है कि हमारे प्रयासों में सफलता तब मिलती है जब हमें स्वयं पर विश्वास होता है. इसलिए जब वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे थे तब मोदी सरकार ने लॉजिस्टिक्स की तैयारी शुरू कर दी थी.

भारत के लिए वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों को सरकार ने हर तरह से समर्थन दिया. आत्मनिर्भर भारत के तहत कोविड की मिशन सुरक्षा के नाम पर उन्हें वित्तीय सहायता प्रदान की गयी. पीएम मोदी को ये बताते हुए खासा फख्र का अनुभव हुआ कि अब 7 कंपनियां विभिन्न प्रकार के टीके का उत्पादन कर रही हैं. दूसरे देशों से वैक्सीन खरीदने की प्रक्रिया को तेज किया गया है. पीएम मोदी ने बताया कि एक नेजल यानी नाक में डालने की कोरोना की वैक्सीन पर भी प्रयोग चल रहा है और अगर इसे सफलता मिली तो जंग में और सहायता मिलेगी.

वैक्सीनेशन को लेकर उठ रहे सवालों पर दिया करारा जवाब
पीएम मोदी ने कहा कि तमाम मुख्यमंत्रियों के साथ बैठकों में मिले सुझावों, सांसदों से बैठक के बाद आए सुझाव के बाद ही ये तय हुआ कि जिन्हें कोरोना से ज्यादा खतरा है उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी. इसलिए हेल्थ वर्कस, फ्रंटलाईन वर्कस, 45 से ऊपर के नागरिकों को प्राथमिकता दी गयी. पीएम मोदी ने कहा कि अगर दूसरी लहर से पहले हमारे फ्रंटलाइन वर्कस को वैक्सीन नहीं लगी होती तो क्या होता. ज्यादा से ज्याद वर्करों को वैक्सीन मिलने की वजह से वे पूरी ताकत के साथ काम में लग पाए और ज्यादा लोगों की जानें बचाने में सफल रहे.

पीएम मोदी का दर्द एक बार फिर छलका जब उन्होंने जिक्र किया कि इसके बावजूद कई लोगों से तरह-तरह की सलाह आने लगी की राज्य सरकार क्यों नहीं वैक्सीन करवा सकतीं. या फिर स्वास्थ्य राज्य का विषय है इसलिए सब राज्य करें. इसलिए भारत सरकार ने एक वृहत गाइडलाइन बनाकर राज्यों को दी ताकि टीकाकरण का काम सुचारु रुप से चल सके. ये अभियान 16 जनवरी से शुरू होकर अप्रैल महीने तक केन्द्र सरकार की देख रेख में चला. सभी को मुफ्त वैक्सीन लगाने की प्रक्रिया जारी रही. फिर भी कुछ राज्य सरकारों ने कहा कि इसे राज्यों पर ही छोड़ा जाए. इतने कम समय में वैक्सीन का पूरा इस्तमाल करने में 9 राज्य खासे पीछे रहे. इन राज्यों ने अपने कोटे के कोरोना टीके का सही इस्तेमाल नहीं किया.

एक साल में कोविड से लड़ने के लिए एक नेटवर्क तैयार करना बड़ी उपलब्धि
जब कोरोना महामारी ने दस्तक दी थी तब भारत के पास कोई नेटवर्क नहीं था. लेकिन ये भारतीय वैज्ञानिकों, हेल्थवर्कर्स की जी-तोड़ कोशिशें हैं कि आज देश में कोविड अस्पताल, वेंटिलेटर, टेस्टिंग लैब का नेटवर्क, कोविड से लड़ने के लिए एक पूरा का पूरा सिस्टम काम करने लगा है. जब कोरोना की दूसरी लहर के दौरान मेडिकल ऑक्सीजन की मांग अकल्पनिय रूप से बढी, तब पूरा सिस्टम सकते में आ गया था. कभी ऐसा नहीं हुआ था. इसे पूरा करने के लिए युद्ध स्तर पर काम किया गया. सरकार के सभी तंत्र लग गए. ऑक्सीजन रेल चली, दुनिया के हर कोने से जो उपलब्ध हो सकता था वो लाया गया. आज हमारे पास ऑक्सीजन की की कमी नहीं है. जरूरी दवाओं के प्रोडक्शन को बढ़ाया गया. दुनिया के किसी भी कोने से दवा लाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गयी. पीएम मोदी ने देश की जनता को कहा कि कल्पना कीजिए अगर हमारे पास दवा नहीं होती तो क्या होता. चंद दशक पहले हमारे देश को दवा पाने में दशकों लग जाते थे. पोलियो, चेचक, हीपेटाइटिस के टीके के लिए देश ने दशकों इंतजार किया था जब पश्चिमी विकसित देश पहले खुद का इलाज करते थे फिर भारत की ओर रुख करते थे. ये दवाए बनना मानवता के लिए उपलब्धि है.

अनलॉक के दौरान भी कोरोना के नियमों को पालन करें
पीएम मोदी ने लोगों से अपील की कि मास्क जरूर पहने और बाकी सावधानियों का भी पालन करना भी जरूरी है. उन्होंने कहा कि अब मुफ्त टीके के लिए राज्य को कुछ सप्ताह पहले बता दिया जाएगा की उसे कब कितनी डोज मिलने वाली है ताकि वो उसी मुताबिक अपनी योजना बना सकें. युवा, समाज से अपील की जागरुकता बढाने में मदद करें. पीएम मोदी न कहा कि सावधान भी रहना है और कोरोना से बचाव के नियमों का सख्ती से पालन भी करना है.

अंत मे पीएम ने सवाल उठाने वाले विपक्ष और उन लोगों को ये याद दिलाया कि मानवता के इस काम में वाद विवाद को कोई अच्छा नहीं मानता है. पीएम मोदी उन लोगों को भी आड़े हाथों लिया जो वैक्सीन को लेकर भ्रम पैदा करते हैं और आम आदमी की चिंता को बढ़ाते हैं. उन्होंने कहा जब से भारत में कोरोना के खिलाफ जंग शुरू हुआ, तभी से कुछ लोगों के द्वार ऐसी बातें की गयी कि शंका बढ़ायी गयी और तरह तरह के तर्क प्रचारित किए गए. देश देख रहा है. प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे लोग भोले भाले लोगों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं. पीएम मोदी ने कहा कि देश के लोगों को इनसे बच के रहने की जरूरत है और उम्मीद जतायी कि उम्मीद की कोरोना से जंग में भारत जीतेगा.