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सात आर्थिक महाशक्तियों का शिखर सम्मेलन जी-7 और PM मोदी का महामंथन

प्रधानमंत्री मोदी की पिछली जर्मनी यात्रा इसी साल मई महीने में हुई थी. (फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री मोदी की पिछली जर्मनी यात्रा इसी साल मई महीने में हुई थी. (फाइल फोटो)

PM Modi in Germany: लगभग 60 घंटों की इस जर्मनी और संयुक्त अरब अमीरात की अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ना केवल 12 से भी अधिक दुनिया के शीर्षस्थ नेताओं के साथ बैठक करेंगे, बल्कि लगभग 15 से अधिक कार्यक्रमों में शिरकत भी करेंगे.

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नई दिल्ली. यूक्रेन-रूस युद्ध की पृष्ठभूमि में हो रहे दुनिया की सात आर्थिक महाशक्तियों के शिखर सम्मेलन जी-7 पर वैसे तो पूरी दुनिया की नज़र है, लेकिन भारत के लिए ये महासम्मेलन बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि लगभग 60 घंटों की इस जर्मनी और संयुक्त अरब अमीरात की अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ना केवल 12 से भी अधिक दुनिया के शीर्षस्थ नेताओं के साथ बैठक करेंगे, बल्कि लगभग 15 से अधिक कार्यक्रमों में शिरकत भी करेंगे. इसीलिए इसे प्रधानमंत्री मोदी का महामंथन कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी.

सम्मलेन के लिए निकलने से पूर्व प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जी-7 सम्मेलन में शामिल होने के दौरान वो कई मुद्दों जैसे पर्यावरण, ऊर्जा, लोकतंत्र, काउंटर टेररिज्म पर अपनी बात रखेंगे. अपने स्टेटमेंट में प्रधानमंत्री ने कहा कि वो जी-7 और अतिथि देशों के कुछ नेताओं से मिलने के साथ ही जर्मनी में मौजूद भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात करेंगे. प्रधानमंत्री मोदी म्यूनिख में भारतीय समुदाय से संबंधित जिस कार्यक्रम को संबोधित करेंगे, उसके बारे में कहा जा रहा है कि कोविड-19 महामारी फैलने के बाद से जर्मनी में इस तरह का ये सबसे बड़ा कार्यक्रम होगा. प्रधानमंत्री ने कहा कि “जी-7 सम्मलेन यात्रा के दौरान मैं यूरोप से आये भारतीय डायस्पोरा से मिलने के लिए भी उत्सुक हूं, जो ना केवल अपने-अपने देशों की अर्थव्यवस्थाओं में ज़बरदस्त योगदान दे रहे हैं, बल्कि यूरोपीय देशों के साथ भारत के संबंधों को और भी समृद्ध कर रहे हैं.”

प्रधानमंत्री मोदी की पिछली जर्मनी यात्रा इसी साल मई महीने में हुई थी और उसी दौरान जी-7 शिखर सम्मेलन के लिए निमंत्रण भारत और जर्मनी के बीच सालों पुराने मजबूत एवं करीबी साझेदारी को ध्यान में रखते हुए ही दिया गया. जी-7 समूह दुनिया के सात सबसे अमीर देशों का समूह है जिसकी अध्यक्षता अभी जर्मनी के पास है. सात आर्थिक महाशक्तियों के इस समूह में ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और अमेरिका शामिल हैं. यानी इस बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रो, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो समेत दुनिया के शीर्षस्थ राजनेता हिस्सा ले रहे हैं. जर्मनी ने भारत के अलावा अर्जेंटीना, इंडोनेशिया, सेनेगल और दक्षिण अफ्रीका को भी अतिथि के रूप में सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है.

जी-7 सम्मलेन पर रूस-यूक्रेन युद्ध की छाया पड़ना तय
जी-7 सम्मलेन में प्रधानमंत्री मोदी दो सत्रों को संबोधित कर सकते हैं जिसमें पहला सत्र जलवायु, पर्यावरण और ऊर्जा सुधारों का होगा और दूसरे में समूचे विश्व के लिए खाद्य सुरक्षा, लैंगिक समानता और लोकतंत्र की मजबूती पर भाषण होगा. यात्रा पर निकलने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं जर्मन प्रेसीडेंसी के तहत जी-7 शिखर सम्मेलन के लिए जर्मनी के चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़ के निमंत्रण पर जर्मनी के श्लॉस एल्मौ का दौरा करूंगा और इस दौरान जर्मनी के चांसलर से मिलकर खुशी होगी. वैसे जी-7 सम्मलेन पर रूस-यूक्रेन युद्ध की छाया पड़ना तय है. सम्मलेन शुरू होने से पहले पेंटागन के प्रेस सचिव जॉन किर्बी ने कहा कि इस सम्मेलन का मकसद इन देशों को रूस से अलग करना नहीं है, लेकिन हमारा मकसद समान सिद्धांतों और पहलों वाले देशों को एकजुट करना ज़रूर है. वहीं यूक्रेन संकट शुरू होने के समय से ही भारत का रुख स्पष्ट है कि जल्द-से-जल्द युद्ध विराम होना चाहिए और बातचीत एवं कूटनीति के जरिये समस्या का समाधान निकाला जाना चाहिए.

जी-20 की बैठक 2023 में जम्मू कश्मीर में होगी
भारत के लिए ये सम्मलेन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत इसी साल इंडोनेशिया से जी-20 की अध्यक्षता लेगा और जी-20 की बैठक 2023 में जम्मू कश्मीर में होगी जिसके सफल आयोजन के लिए 5 सदस्यीय समिति का गठन भी किया गया है. जी-20 सम्मलेन में जी-7 के सभी देश शामिल होंगे, ऐसे में इन सभी देशों के नेताओं से एकसाथ मिलने का ये सुनहरा मौका भारत को मिला है.

यूएई में ऐसा होगा पीएम मोदी का कार्यक्रम
प्रधानमंत्री मोदी 28 जून को यूएई के पूर्व राष्ट्रपति शेख खलीफा बिन जायद अल नाहयान के निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए खाड़ी देश जाएंगे. शेख नाहयान का 13 मई को निधन हो गया था. 2004 से जब शेख नाहयान ने संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति और अबू धाबी के शासक के रूप में कामकाज संभाला तब से उन्होंने भारत-यूएई संबंधों पर बहुत काम किया. प्रधानमंत्री मोदी से पहले भारत की ओर से शोक प्रकट करने के लिये उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू वहां गए थे. 28 जून को शोक जताने के बाद प्रधानमंत्री मोदी संयुक्त अरब अमीरात के नए राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान को शुभकामनाएं भी देंगे और एक संक्षिप्त बैठक भी करेंगे. अनुमान है कि भारत और यूएई ईंधन और खाद्य सुरक्षा को लेकर चर्चा कर सक्रते हैं. प्रधानमंत्री मोदी उसी रात संयुक्त अरब अमीरात से दिल्ली वापस कूच कर जायेंगे.

Tags: Germany, Narendra modi, Saudi arabia

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