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विश्व के लिए आज हम आशा की किरण बनकर खड़े हुए हैं, लोकसभा में PM मोदी की खास बातें

पीएम ने कहा कि विपक्ष खासकर कांग्रेस के लोग कृषि कानूनों की हर पहलू पर चर्चा कर रहे थे, लेकिन उसके कंटेंट पर चर्चा नहीं की.
पीएम ने कहा कि विपक्ष खासकर कांग्रेस के लोग कृषि कानूनों की हर पहलू पर चर्चा कर रहे थे, लेकिन उसके कंटेंट पर चर्चा नहीं की.

PM Narendra Modi in Lok Sabha: पीएम मोदी ने कहा, 'जिन संस्कारों को लेकर हम पले-बढ़े हैं, वो हैं- सर्वे भवंतु सुखिनः, सर्वे संतु निरामया. कोरोना कालखंड में भारत ने ये करके दिखाया है.'

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 11, 2021, 1:50 PM IST
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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को लोकसभा में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण को भारत के 130 करोड़ भारतीयों की संकल्प शक्ति को प्रदर्शित करने वाला बताया. उन्होंने कहा कि विकट और विपरीत काल में भी ये देश किस प्रकार से अपना रास्ता चुनता है, रास्ता तय करता है और रास्ते पर चलते हुए सफलता प्राप्त करता है, ये सब बातें राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में थीं.


इस दौरान पीएम मोदी ने वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में अहम भूमिका निभाने वाले कोरोना वॉरियर्स की सराहना की. उन्होंने कहा, 'हम कोरोना से जीत पाए, क्योंकि डॉक्टर्स, सफाई कर्मचारी, एम्बुलेंस का ड्राइवर ये सब भगवान के रूप में आए. हम उनकी जितनी प्रशंसा करें, जितना गौरवगान करेंगे, उससे हमारे भीतर भी नई आशा पैदा होगी.'


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1. देश जब आजाद हुआ, जो आखिरी ब्रिटिश कमांडर थे, वो आखिरी तक यही कहते थे कि भारत कई देशों का महाद्वीप है और कोई भी इसे एक राष्ट्र नहीं बना पाएगा, लेकिन भारतवासियों ने इस आशंका को तोड़ा. विश्व के लिए आज हम आशा की किरण बनकर खड़े हुए हैं.


2. कुछ लोग ये कहते थे कि India was a miracle democracy. ये भ्रम भी हमने तोड़ा है. लोकतंत्र हमारी रगों और सांस में बुना हुआ है, हमारी हर सोच, हर पहल, हर प्रयास लोकतंत्र की भावना से भरा हुआ रहता है.


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3. आज जब हम भारत की बात करते हैं तो मैं स्वामी विवेकानंद जी की बात का स्मरण करना चाहूंगा. 'हर राष्ट्र के पास एक संदेश होता है, जो उसे पहुंचाना होता है, हर राष्ट्र का एक मिशन होता है, जो उसे हासिल करना होता है, हर राष्ट्र की एक नियति होती है, जिसे वो प्राप्त करता है.'


4. जिन संस्कारों को लेकर हम पले-बढ़े हैं, वो हैं- सर्वे भवंतु सुखिनः, सर्वे संतु निरामया. कोरोना कालखंड में भारत ने ये करके दिखाया है.


5. हमारे लिए आवश्यक है कि हम आत्मनिर्भर भारत के विचार को बल दें. ये किसी शासन व्यवस्था या किसी राजनेता का विचार नहीं है. आज हिंदुस्तान के हर कोने में वोकल फ़ॉर लोकल सुनाई दे रहा है. ये आत्मगौरव का भाव आत्मनिर्भर भारत के लिए बहुत काम आ रहा है.


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6. हमारे लिए संतोष और गर्व का विषय है कि कोरोना के कारण कितनी बड़ी मुसीबत आएगी इसके जो अनुमान लगाए गए थे कि भारत कैसे इस स्थिति से निपटेगा. ऐसे मैं ये 130 करोड़ देशवासियों के अनुशासन और समर्पण ने हमें आज बचा कर रखा है. इसका गौरवगान हमें करना चाहिए. भारत की पहचान बनाने के लिए ये भी एक अवसर है.


7. हम कोरोना से जीत पाए, क्योंकि डॉक्टर्स, सफाई कर्मचारी, एम्बुलेंस का ड्राइवर ये सब भगवान के रूप में आए. हम उनकी जितनी प्रशंसा करें, जितना गौरवगान करेंगे, उससे हमारे भीतर भी नई आशा पैदा होगी.


8. दुनिया के बहुत सारे देश कोरोना, लॉकडाउन, कर्फ्यू के कारण चाहते हुए भी अपने खजाने में पाउंड और डॉलर होने के बाद भी अपने लोगों तक नहीं पहुंचा पाए, लेकिन ये हिंदुस्तान है जो इस कोरोना कालखंड में भी करीब 75 करोड़ से अधिक भारतीयों को 8 महीने तक राशन पहुंचा सकता है.


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9. यही भारत है जिसने जनधन, आधार और मोबाइल के द्वारा 2 लाख करोड़ रुपया कोरोना कालखंड में लोगों तक पहुंचा दिया. कोरोना कालखंड में जनधन खाते, आधार, ये सभी गरीब के काम आए, लेकिन कभी-कभी सोचते हैं कि आधार को रोकने के लिए कौन लोग सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे में गए थे? इस कालखंड में भी हमने रिफॉर्म का सिलसिला जारी रखा है. हम इस इरादे से चले है कि भारत की अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए हमें नए कदम उठाने होंगे. और हमने पहले दिन से ही कई कदम उठाए हैं.


10. मैं देख रहा था कि कांग्रेस के साथियों ने जो चर्चा की, वो कृषि कानून के रंग पर तो बहुत चर्चा कर रहे थे. अच्छा होता कि उसके कंटेट और इंटेट पर चर्चा करते. ताकि देश के किसानों तक सही चीजें पहुंचती. इस कोरोना काल में 3 कृषि कानून भी लाए गए. ये कृषि सुधार का सिलसिला बहुत ही आवश्यक और महत्वपूर्ण है और बरसों से जो हमारा कृषि क्षेत्र चुनौतियां महसूस कर रहा है, उसको बाहर लाने के लिए हमें निरंतर प्रयास करना ही होगा और हमने एक ईमानदारी से प्रयास किया भी है.




गौरतलब है कि भारत में तीन कृषि कानूनों को वापस लिए जाने और फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए कानूनी गारंटी देने की मांग के साथ पंजाब, हरियाणा और देश के विभिन्न हिस्सों से आए हजारों किसान दो महीनों से अधिक समय से राष्ट्रीय राजधानी की विभिन्न सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं.


क्या है मामला
कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार के तौर पर सरकार ने सितंबर में तीन कृषि कानूनों को लागू किया था. सरकार ने कहा था कि इन कानूनों के बाद बिचौलिए की भूमिका खत्म हो जाएगी और किसानों को देश में कहीं पर भी अपने उत्पाद को बेचने की अनुमति होगी. वहीं, किसान तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं. प्रदर्शन कर रहे किसानों का दावा है कि ये कानून उद्योग जगत को फायदा पहुंचाने के लिए लाए गए हैं और इनसे मंडी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था खत्म हो जाएगी.

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