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मन की बात: पीएम मोदी बोले- परीक्षा को उत्सव जैसा महसूस करें छात्र, फिर होगा चमत्कार

मन की बात: पीएम मोदी बोले- परीक्षा को उत्सव जैसा महसूस करें छात्र, फिर होगा चमत्कार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार 'मन की बात' रेडियो कार्यक्रम में बच्चों की पढ़ाई और उनके सर्वांगीण विकास को लेकर कई अहम बातें बताई. पीएम मोदी ने कहा कि आम तौर पर धारणा ऐसी है कि अगर विद्यार्थी खेलकूद में ध्यान देते हैं, तो पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाते. ये धारणा ही गलत है.

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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार 'मन की बात' रेडियो कार्यक्रम में बच्चों की पढ़ाई और उनके सर्वांगीण विकास को लेकर कई अहम बातें बताई.

    पीएम मोदी ने कहा कि आम तौर पर धारणा ऐसी है कि अगर विद्यार्थी खेलकूद में ध्यान देते हैं, तो पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाते. ये धारणा ही गलत है. अपनी खुद की मेहनत से जो परिणाम प्राप्त होगा, उससे जो आत्मविश्वास बढ़ेगा, वो अद्भुत होगा.

    कुछ लोग नकल करने में पूरा जोर लगा देते हैं. अगर यही कोशिश पढ़ाई में लगाएं तो नकल की जरूरत ही नहीं पड़े. मेरा आपसे आग्रह है कि ख़ुद से स्पर्द्धा करे. पहले क्या किया था, आगे कैसे करूंगा, अच्छा कैसे करूंगा.... बस, इस पर ध्यान केंद्रित करें.

    आपने खेल जगत में देखा होगा. क्योंकि उसमें तुरंत समझ आता है, इसलिए मैं खेल जगत का उदहारण देता हूं. जीवन को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिस्पर्धा काम आती है. जब मैं इसकी बात कहता हू, तो उसका मतलब है, स्वयं से स्पर्द्धा करना.

    उन्होंने कहा कि सर्वांगीण विकास करना है, तो किताबों के बाहर भी एक ज़िन्दगी होती है. वो बहुत विशाल होती है. उसको जीने का सीखने का यही समय होता है. ‘प्रतिस्पर्द्धा’ एक बहुत बड़ी मनोवैज्ञानिक लड़ाई है. सचमुच में, जीवन को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिस्पर्द्धा काम नहीं आती है.

    किसी वकील के पास जाते हैं, तो क्या उस वकील की मार्कशीट देखते हैं? आप उसके अनुभव को, उसके ज्ञान को, उसकी सफलता की यात्रा को देखते हैं. आप में से कोई ऐसा नहीं होगा, जिसने अपने फैमिली डॉक्टर को कभी, वे कितने नंबर से पास हुए थे, पूछा होगा. किसी ने नहीं पूछा होगा.

    जीवन में आपको नॉलेज काम आने वाला है, स्किल काम आने वाली है, आत्मविश्वास काम आने वाला है, संकल्पशक्ति काम आने वाली है. मार्क और मार्कशीट का एक सीमित उपयोग है. ज़िंदगी में वही सब कुछ नहीं होता है.

    हमारे सबके सामने, हमारे पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी का बड़ा प्रेरक उदाहरण है. वे वायुसेना में भर्ती होने गए, असफल हो गए.

    आपने कैसा जीवन जिया, कैसा जीवन जी रहे हो, कैसा जीवन जीना चाहते हो, उसका एक्ज़ाम नहीं है. आप जो परीक्षा देने जा रहे हैं, वो साल भर में आपने जो पढ़ाई की है, उसका एक्ज़ाम है. ये आपके जीवन की कसौटी नहीं है.

    जब टेंशन होती है, तब आपका नॉलेज, आपका ज्ञान, आपकी जानकारी नीचे दब जाती हैं और आपका टेंशन उस पर सवार हो जाता है. आपको ये पता होना चाहिए, मेमोरी को रिकॉल करने का जो पावर है, वो रिलेक्सेशन में सबसे ज़्यादा होता है.

    मैं आपसे कहूंगा कि जितनी ज़्यादा ख़ुशी से इस समय को बिताओगे, उतने ही ज़्यादा नंबर पाओगे, करके देखिए. हम सब का दायित्व है कि इन तीन-चार महीनों को अपने-अपने तरीक़े से, अपनी-अपनी परंपरा और परिवार के वातावरण को लेते हुए, उत्सव में परिवर्तित करें.

    कन्याकुमारी से कश्मीर तक और कच्छ से कामरूप तक, अमरेली से अरुणाचल प्रदेश तक, ये तीन-चार महीने परीक्षा ही परीक्षाएं होती हैं. पूरा परिवार एक टीम के रूप में इस उत्सव को सफल करने के लिए अपनी-अपनी भूमिका उत्साह से निभाए. देखिए, देखते ही देखते बदलाव आ जाएगा.

    मैं माता-पिता को ज़्यादा आग्रह से कहता हूँ कि आप इन तीन-चार महीने एक उत्सव का वातावरण बनाइए.

    Tags: Mann Ki Baat

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