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मिशन 2019 पर नज़र, PM मोदी ने मंत्रियों की बैठक में मांगे आउट ऑफ बॉक्‍स आ‍इडिया!

मिशन 2019 पर नज़र, PM मोदी ने मंत्रियों की बैठक में मांगे आउट ऑफ बॉक्‍स आ‍इडिया!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री मोदी अब इस माप-तौल में लग गए हैं कि बीजेपी को हराने के लिए उठी विपक्षी एकता की हवा को कैसे पलटा जाए.

    कर्नाटक में सरकार न बना पाने का मलाल और कैराना लोकसभा चुनावों में झटके के बाद पीएम मोदी भी हरकत में आ गए हैं. प्रधानमंत्री मोदी अब इस माप-तौल में लग गए हैं कि बीजेपी को हराने के लिए उठी विपक्षी एकता की हवा को कैसे पलटा जाए. चिंतन इस बात पर हो रहा है कि सरकार के विकास के कामों को जनता खास कर दूरदराज के गांवों तक कैसे पहुंचाया जाए. इन्ही चिंताओं के मद्देनजर पीएम मोदी ने अपनी काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स की बैठक बुलायी तो उसमें भी राजनीतिक मुद्दा ही हावी रहा.

    दो घंटे से ज्यादा चली इस बैठक में पीएम मोदी बार-बार अपने कैबिनेट के सहयोगियों से यही पूछते रहे कि सरकार के कामों को जनता तक पहुंचाने का कोई आउट ऑफ बॉक्स आइडिया क्या हो सकता है. सूत्र बताते हैं कि इस अपील के बावजूद उनके ज्यादातर सहयोगी खामोश ही रहे.

    संसद भवन में आयोजित काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स की बैठक में पीएम मोदी ने तमाम कैबिनेट के सहयोगियों को कहा कि इन चार सालों में सरकार ने जो कुछ भी किया है वह बात सही तरीके से लोगों तक पहुंचे. सरकार के काम की समीक्षा के साथ-साथ मंत्रियों और सांसदों को जनता से सीधा संवाद करने की हिदायत दी गई है. पीएम मोदी सरकार और बीजेपी के कार्यक्रम 'संपर्क से समर्थन' के जरिए समाज के प्रबुद्ध लोगों तक पहुंचने की योजना से खासे उत्साहित नजर आए.

    'संपर्क से समर्थन' को अच्छा रेस्‍पॉन्‍स
    इस कार्यक्रम पर अब तक बनी रिपोर्ट की मानें, तो इसे अच्छा खासा समर्थन मिला है. इस कार्यक्रम को पूरा करने के लिए 30 जून तक का समय निर्धारित किया गया है. सूत्र बताते हैं कि इसके बाद तमाम नेताओं के इन कार्यक्रमों पर एक रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे अगली काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स की बैठक में रखा जाएगा.

    बैठक के दौरान दो प्रेजेंटेशन भी हुए. पहले में ग्राम स्वराज अभियान के तहत पूरे किए गए कार्यों की समीक्षा की गई. ग्राम स्वराज अभियान की शुरुआत 14 जुलाई को की गई थी.


    ग्राम स्‍वराज अभियान का दायरा बढ़ाया
    इसके तहत तमाम मंत्रियों, सांसदों और नेताओं को गांवों में रात बिताने का निर्देश दिया गया था. करीब 16,850 दूरदराज के गांव जहां 50 फीसदी से ज्यादा दलित आबादी हो उन्हें चिन्हित किया गया. 1200 ज्वॉइंट सेक्रेट्री स्तर के अधिकारियों को मॉनिटरिंग का जिम्मा दिया गया कि इन गांवों में सरकार की सात योजनाओं का शत प्रतिशत कवरेज हो जाए. अब इन गांवों की संख्या 65000 कर दी गयी है और कोशिश यह है कि 15 अगस्त की डेडलाइन तक इन गांवों में केंद्र सरकार की सात योजनाओं का शत प्रतिशत लाभ मिल जाए. यह कार्यक्रम पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक हैं.

    115 पिछड़े जिलों पर नजर
    काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स की बैठक में दूसरा प्रजेंटेशन देश के सबसे पिछड़े 115 जिलों पर था. इन जिलों को पीएम मोदी ने एसपिरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स (आकांक्षापूर्ण जिले) का नाम दिया है. पीएम मोदी जानते हैं कि योजनाओं का असर जमीन पर पहुंचने में खासा समय लगता है और इसके लिए राज्य सरकारों का सहयोग भी जरुरी होता है. लेकिन उनकी पूरी कोशिश यही है राजनीति से अलग हटकर इन पिछड़े जिलों और इन इलाकों में विकास की मुख्यधारा से दूर रहे लोगों तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने में वो सफल रहे तो फिर मिशन 2019 सफल बनाना मुश्किल नहीं होगा. इन कार्यक्रमों से बीजेपी और सरकार का नाम दूरदराज के ग्रामीण इलाकों तक पहुंच ही जाएगा.

    Tags: BJP, General Election 2019, Narendra modi

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