Opinion: पीएम मोदी ने गरीबों को अभी से दिया दीपावली और छठ का तोहफा

Opinion: पीएम मोदी ने गरीबों को अभी से दिया दीपावली और छठ का तोहफा
पीएम मोदी का राष्‍ट्र के नाम संबोधन.

PM Narendra Modi Speech: प्रधानमंत्री ने पीएम ग़रीब कल्याण अन्न योजना (PM Garib Kalyan Yojana) का विस्तार नवंबर तक यानी अगले पांच महीने तक करने की घोषणा की, तो कोरोना काल (Coronavirus) में पेट कैसे भरेगा, इस चिंता से जूझ रहे ग़रीबों के कलेजे में ठंडक ज़रूर पड़ी होगी.

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29 जून को चीन के 59 ऐप पर रोक लगाने के फैसले के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि 30 जून को देश के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) चीन (China) के ख़िलाफ़ कुछ सख़्त ऐलान कर सकते हैं. लेकिन ऐसा नहीं हुआ और मीडिया और देश में बनी चीन विरोधी धारणाओं से उद्वेलित वर्ग की मंशा के उलट प्रधानमंत्री ने एलएसी (LAC) पर चीन की दादागीरी पर भारत के सख़्त रुख़ पर कुछ नहीं कहा. कोरोना काल में मोदी का यह छठवां संबोधन था.

प्रधानमंत्री ने पीएम ग़रीब कल्याण अन्न योजना का विस्तार नवंबर तक यानी अगले पांच महीने तक करने की घोषणा की, तो कोरोना काल में पेट कैसे भरेगा, इस चिंता से जूझ रहे ग़रीबों के कलेजे में ठंडक ज़रूर पड़ी होगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दुनिया इस बात पर हैरान है कि भारत ने 80 करोड़ ग़रीबों को प्रति माह प्रति व्यक्ति पांच किलो गेंहू या चावल और एक किलो दाल मुफ़्त में मुहैया कराई. अगले पांच महीने भी यह सुविधा जारी रहेगी और इस पर 90 हज़ार करोड़ रुपये से ज़्यादा का ख़र्चा आएगा. इस योजना पर कुल ख़र्च 1.5 लाख करोड़ रुपये आने का अनुमान है, यह भी प्रधानमंत्री ने बताया.

प्रधानमंत्री की इस घोषणा से एक बात तो स्पष्ट हो गई है कि केंद्र सरकार मान कर चल रही है कि कोरोना की वजह से अगले पांच महीने तक देश की अर्थव्यस्था पूरी तरह पटरी पर नहीं आ सकेगी. कम से कम अगले पांच महीने तक कोरोना संकट अर्थव्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त करने के लिए किए जाने वाले प्रयासों में बाधा पहुंचाता रहने वाला है. वैसे भी बारिश के मौसम की वजह से दिक्कतें आती ही हैं. ग़रीबों को रोज़ी-रोटी मुहैया कराने के हरसंभव प्रयास तो किए ही जा रहे हैं, लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए कि इस दौरान कोई वंचित भूखा रहने को मजबूर हो. प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कुछ आंकड़े भी बताए. उन्होंने बताया कि इस दौरान 20 करोड़ ग़रीबों के जन-धन खातों में 31 हज़ार करोड़ रुपये डाले गए. नौ हज़ार से ज्यादा किसानों के खातों में 18 हज़ार करोड़ रुपये डाले गए. गांवों में श्रमिकों को रोज़गार देने के लिए सरकार 50 हजार करोड़ रुपये ख़र्च कर रही है.



साफ़ है कि नरेंद्र मोदी को आंकड़े बताने की ज़रूरत इसलिए पड़ी, ताकि विपक्ष के दावों की हवा निकाली जा सके. उल्लेखनीय है कि मोदी के संबोधन से कुछ घंटे पहले ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अगले कुछ महीनों के लिए अपनी पार्टी की न्याय योजना लागू करने की मांग करते हुए ग़रीबों के खातों में 7500 रुपये हर महीने डाले जाने की मांग की. हो सकता है कि उन्हें अंदाज़ा रहा हो कि पीएम का संबोधन ग़रीबों के कल्याण से जुड़ी किसी महत्वपूर्ण घोषणा के बारे में होने वाला हो सकता है.



प्रधानमंत्री ने कहा कि जुलाई महीने से देश में त्यौहारी सीज़न शुरू होने वाला है. ऐसे में ज़रूरतें बढ़ती हैं और ख़र्च भी ज़्यादा होता है. प्रधानमंत्री ने सरकार की एक राष्ट्र-एक राशन कार्ड योजना का भी ज़िक्र किया. उन्होंने कहा कि इससे उन भारतीयों को फ़ायदा मिलेगा, जो रोज़गार के सिलसिले में दूसरे राज्यों में जाते हैं. एक ही राशन कार्ड होगा, तो किसी को कहीं भी दिक्कत नहीं आएगी. हर राज्य में सरकारी कल्याण योजना का फ़ायदा ग़रीब उठा सकते हैं. इस मौक़े पर मोदी ने ग़रीबों के लिए कल्याणकारी योजनाओं को सफल बनाने के लिए देश के किसानों और करदाताओं का भी शुक्रिया अदा किया. उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए सबको दिन-रात एक करनी होगी. लोकल के लिए और वोकल होना पड़ेगा. मोदी का संदेश साफ़ है कि सरकारों के साथ-साथ पूरे देश को मिल कर काम करना होगा. नए सिरे से आत्मोदय करना होगा, तभी हम आत्मनिरभर बन सकते हैं.



प्रधानमंत्री ने कहा कि सही समय पर सही निर्णय करने की वजह से दुनिया के मुक़ाबले भारत में कोरोना से मरने वालों की संख्या काफ़ी कम रही है. आलोचना करने वाले भी जानते हैं कि यह सही बात भी है. मोदी ने अनलॉक-1 में लापरवाही बरतने के लिए लोगों को ऐसा नहीं करने की नसीहत दी. उन्होंने कहा कि जब ज़्यादा सतर्कता की ज़रूरत है, तब लोग लापरवाही कर रहे हैं. लॉकडाउन जैसी सावधानी आज भी बरतने की ज़रूरत है.

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कुल मिलाकर प्रधानमंत्री का यह संबोधन लोगों की धारणाओं के उलट रहा. चीन, नेपाल जैसे सोच में गर्मी पैदा करने वाले मसलों का ज़िक्र नहीं कर उन्होंने यही संदेश दिया कि कूटनैतिक मोर्चे पर सकारात्मक काम हो रहा है और पब्लिक फ़ोरम पर उसका खुलकर ज़िक्र करना ज़रूरी नहीं होता.
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