सात समंदर पार पहुंची मोदी की उज्ज्वला योजना, भारत से घाना का करार

सात समंदर पार पहुंची मोदी की उज्ज्वला योजना, भारत से घाना का करार
प्रधानमंत्री उज्जवला योजना

दिल्ली में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और घाना के उच्चायुक्त माइकल एरॉन की मौजुदगी में इंडियन ऑयल ने घाना के नेशनल पेट्रोलियम अथॉरिटी के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किये. इसके साथ ही पीएम मोदी की उज्ज्वला योजना भारत से घाना पहुंच गई.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 23, 2020, 2:32 PM IST
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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) सरकार की महत्वकांक्षी उज्जवला योजना (Ujjwala Yojana) की गूंज अफ्रीकी महाद्वीप के मुख्य देश घाना (Ghana) तक पहुंच गई है. घाना ने अपनी नेशनल एलपीजी प्रमोशन पॉलिसी (National LPG Promotion Policy) को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए भारत से तकनीकी मदद मांगी है. दोनों देशों के बीच इसके लिए एक एमओयू (MOU) हुआ है. जिसके अंतर्गत भारत घाना को एलपीजी से जुड़ी नीतियों को क्रियान्वित करने में तकनीकी और विशेषज्ञता सहयोग प्रदान करेगा. दिल्ली में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और घाना के उच्चायुक्त माइकल एरॉन की मौजुदगी में इंडियन ऑयल ने घाना के नेशनल पेट्रोलियम अथॉरिटी के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किये.

घाना के गरीबों की तकदीर बदलेगी उज्ज्वला
दरअसल घाना ने पाया कि भारत ने उज्ज्वला योजना के जरिए एक तरफ जहां आर्थिक रूप से कमजोर तबके तक प्रदूषण रहित एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध करवाने में कामयाबी हासिल की. वहीं इसके जरिए सामाजिक, आर्थिक एवं स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याओं को भी निजात मिला है. यही वजह है कि इस अफ्रीकी देश ने पेट्रोलियम और गैस आधारित बड़ी और परंपरागत अर्थवव्यस्थाओं के बजाय नए एनर्जी लीडर भारत से मदद मांगी है.

भारत बन रहा 'गैस इकोनॉमी' का वर्ल्ड लीडर
पिछले कुछ समय में भारत ने ग्रामीण क्षेत्रों में उज्ज्वला और शहरी तथा कस्बाई क्षेत्र में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन का नेटवर्क विस्तार कर जिस तरह क्लीन फ्यूल की ओर तेजी से कदम बढ़ाया है, उससे विकसित एवं विकासशील देशों में भारत एलपीजी और पेट्रो टेक्नोलॉजी का नया लीडर बनकर उभरा है. इसकी एक बानगी घाना से पहले रूस (साइबेरिया) जैसे बड़े देशों में पेट्रोलियम सेक्टर में भारत की ओर से हो रहे निवेश की परियोजनाओं में भी देखने को मिला है.



पेट्रो फ्रेंडशिप की दिशा में प्रभावी कदम
घाना की एलपीजी नेशनल प्रमोशन पॉलिसी का लक्ष्य है कि भारत की मदद से वह उज्ज्वला की तर्ज पर 2030 तक अपनी 50 फीसदी आबादी को क्लीन एनर्जी उपलब्ध करा सके. जो न सिर्फ कम लागत वाली हो बल्कि कमर्शियल और इंडस्ट्रियल क्षेत्र के लिए भी प्रदूषण मुक्त हो. गौरतलब है कि मोदी सरकार ने पिछले पांच साल में 8 करोड़ से अधिक नए एलपीजी कनेक्शन बांटे हैं. वहीं गैस पाइपलाइन के जरिए अब कस्बाई क्षेत्रों में घरों तक एलपीजी पहुंचाए जाने के का काम भी शुरू चुका है.

अफ्रीका के बाज़ार पर भारत की नज़र
घाना को मिलने वाले इस तकनीकी सहयोग के बदले भारत को एक बड़ा बाज़ार मिलेगा. आईओसीएल जैसी भारतीय कंपनियां यहां एक बड़े शेयरधारक के रूप में पेट्रोलियम सेक्टर में कारोबारी विस्तार कर सकेंगी. उल्लेखनीय है कि उज्जवला योजना की कामयाबी में इंडियन ऑयल जैसी सरकारी कंपनियों की बड़ी भूमिका रही है.

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