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नेताजी सुभाष की ये प्रतिमा आजादी के महानायक को राष्ट्र की श्रद्धांजलि है, PM मोदी ने कहा

नेताजी सुभाष की ये प्रतिमा आजादी के महानायक को राष्ट्र की श्रद्धांजलि है, PM मोदी ने कहा

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण करते पीएम नरेंद्र मोदी.

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण करते पीएम नरेंद्र मोदी.

Netaji Subhas Chandra Bose Hologram Satue: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए रविवार को कहा कि हर भारतीय को देश के लिए उनके महत्वपूर्ण योगदान पर गर्व है. मोदी ने लोगों को 'पराक्रम दिवस' की भी शुभकामनाएं दीं. सरकार ने आजाद हिंद फौज के संस्थापक बोस की जयंती को 'पराक्रम दिवस' के रूप में मनाने की घोषणा की है.

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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने रविवार शाम करीब 6:30 बजे इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस (Netaji Subhas Chandra Bose) की होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण किया. इसके साथ ही उन्होंने स्थापना समारोह में वर्ष 2019, 2020, 2021 और 2022 के लिए सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार भी प्रदान किया. बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 में हुआ था.

सरकार ने आजाद हिंद फौज के संस्थापक बोस की जयंती को ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की है. इस प्रतिमा को पीएम मोदी ने आजादी के महानायक नेताजी के लिए कृतज्ञ राष्ट्र की श्रद्धांजलि बताया और कहा कि यह प्रतिमा ना सिर्फ हमारी लोकतांत्रिक संस्थाओं को, हमारी पीढ़ियों को राष्ट्रीय कर्तव्य का बोध कराएगी, बल्कि आने वाली और वर्तमान पीढ़ी को निरंतर प्रेरणा भी देती रहेगी.

इस दौरान पीएम मोदी ने उन दिनों को भी याद किया जब वे कोलकाता स्थित सुभाष चंद्र बोस के पैतृक घर गए थे. उन्होंने कहा, “ये मेरा सौभाग्य है कि पिछले वर्ष, आज के ही दिन मुझे कोलकाता में नेताजी के पैतृक आवास भी जाने का अवसर मिला था. जिस कार से वो कोलकाता से निकले थे, जिस कमरे में बैठकर वो पढ़ते थे, उनके घर की सीढ़ियां, उनके घर की दीवारें, उनके दर्शन करना, वो अनुभव, शब्दों से परे है.”

नेताजी की होलोग्राम प्रतिमा के अनावरण के मौके पर PM मोदी के संबोधन के मुख्य अंश:

1. भारत मां के वीर सपूत नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती पर पूरे देश की तरफ से मैं आज उन्हें कोटि-कोटि नमन करता हूं. ये दिन ऐतिहासिक है. ये कालखंड भी ऐतिहासिक है. ये स्थान भी ऐतिहासिक है.

2. नेताजी, जिन्होंने हमें स्वाधीन और संप्रभु भारत का विश्वास दिलाया था, जिन्होंने बड़े गर्व, आत्मविश्वास और साहस के साथ अंग्रेजों के सामने कहा था कि मैं स्वतंत्रता की भीख नहीं लूंगा, मैं इसे हासिल करूंगा.

3. ये प्रतिमा आजादी के महानायक को कृतज्ञ राष्ट्र की श्रद्धांजलि है. नेताजी सुभाष की ये प्रतिमा हमारी लोकतांत्रिक संस्थाओं को, हमारी पीढ़ियों को राष्ट्रीय कर्तव्य का बोध कराएगी. आने वाली और वर्तमान पीढ़ी को निरंतर प्रेरणा देती रहेगी.

4. पिछले साल देश ने नेताजी की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाना शुरू किया है. आज इस अवसर पर सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार भी दिए गए हैं. नेताजी के जीवन से प्रेरणा लेकर ही इन पुरस्कारों को देने की घोषणा की गई थी.

5. हमने राहत, बचाव और पुनरुद्धार पर जोर देने के साथ ही सुधारों पर भी बल दिया है. हमने राष्ट्रीय आपदा सुरक्षा बल (NDRF) को मजबूत किया, उसका आधुनिकीकरण किया, देश भर में उसका विस्तार किया. टेक्नोलॉजी से लेकर प्लानिंग और मैनेजमेंट तक, best possible practices को अपनाया गया.

6. पहले एक-एक चक्रवाती तूफान (Cyclone) में सैकड़ों लोगों की मृत्यु हो जाती थी, लेकिन पिछले दिनों आए साइक्लोन में ऐसा नहीं हुआ. देश ने हर चुनौती का जवाब एक नई ताकत से दिया. इन आपदाओं में हम ज्यादा से ज्यादा जीवन बचाने में सफल रहे.

7. जिन क्षेत्रों में भूकंप, बाढ़ या साइक्लोन का खतरा ज्यादा रहता है, वहां पर पीएम आवास योजना के तहत बन रहे घरों में भी आपदा प्रबंधन का ध्यान रखा जाता है. उत्तराखंड में चारधाम महा परियोजना में भी आपदा प्रबंधन का ध्यान रखा गया है.

8. दुनिया के अलग-अलग देशों के बीच में, सेनाओं के बीच में हमने संयुक्त सैन्य अभ्यास बहुत देखी है, लेकिन भारत ने पहली बार डिजास्टर मैनेजमेंट के लिए संयुक्त अभ्यास की परंपरा शुरू की है.

9. उत्तर प्रदेश में जो नए एक्सप्रेस वे बन रहे हैं, उनमें भी आपदा प्रबंधन से जुड़ी बारीकियों को प्राथमिकता दी गई है. आपात स्थिति में ये एक्सप्रेस वे विमान उतरने के काम आ सकें, इसका भी प्रावधान किया गया है.

10. हमारे सामने आज़ादी के सौंवे साल से पहले नए भारत के निर्माण का लक्ष्य है. नेताजी को देश पर विश्वास था, उनके ही भावों के कारण मैं कह सकता हूं कि दुनिया की कोई भी ताकत नहीं है जो भारत को इस लक्ष्य तक पहुंचने से रोक सके.

11. आज़ादी के अमृत महोत्सव का संकल्प है कि भारत अपनी पहचान और प्रेरणाओं को पुनर्जीवित करेगा. ये दुर्भाग्य रहा कि आजादी के बाद देश की संस्कृति और संस्कारों के साथ ही अनेक महान व्यक्तित्वों के योगदान को मिटाने का काम किया गया.

12. स्वाधीनता संग्राम में लाखों-लाख देशवासियों की तपस्या शामिल थी, लेकिन उनके इतिहास को भी सीमित करने की कोशिशें हुईं. लेकिन आज आजादी के दशकों बाद देश उन गलतियों को डंके की चोट पर सुधार रहा है, ठीक कर रहा है.

13. ये मेरा सौभाग्य है कि पिछले वर्ष, आज के ही दिन मुझे कोलकाता में नेताजी के पैतृक आवास भी जाने का अवसर मिला था. जिस कार से वो कोलकाता से निकले थे, जिस कमरे में बैठकर वो पढ़ते थे, उनके घर की सीढ़ियां, उनके घर की दीवारें, उनके दर्शन करना, वो अनुभव, शब्दों से परे है.

14. मैं 21 अक्टूबर 2018 का वो दिन भी नहीं भूल सकता जब आजाद हिंद सरकार के 75 वर्ष हुए थे. लाल किले में हुए विशेष समारोह में मैंने आजाद हिंद फौज की कैप पहनकर तिरंगा फहराया था. वो पल अद्भुत है, अविस्मरणीय है.

15. नेताजी सुभाष कुछ ठान लेते थे तो फिर उन्हें कोई ताकत रोक नहीं पाती थी. हमें नेताजी सुभाष की Can Do, Will Do स्पिरिट से प्रेरणा लेते हुए आगे बढ़ना है.

इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए रविवार को कहा कि हर भारतीय को देश के लिए उनके महत्वपूर्ण योगदान पर गर्व है. मोदी ने लोगों को ‘पराक्रम दिवस’ की भी शुभकामनाएं दीं. प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया, “मैं नेताजी सुभाष चंद्र बोस को उनकी जयंती पर नमन करता हूं. हर भारतीय को हमारे देश के लिए उनके महत्वपूर्ण योगदान पर गर्व है.”

Tags: India gate, Narendra modi, Netaji subhas chandra bose

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