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दुनिया ने जिस कमजोरी का ताना दिया, पटेल ने उसी को ताकत बनाया: PM मोदी

सरदार पटेल की प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम में पीएम मोदी (तस्वीर-PMO)

सरदार पटेल की प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम में पीएम मोदी (तस्वीर-PMO)

पीएम मोदी ने कहा- ये ऊंचाई, ये बुलंदी भारत के युवाओं को ये याद दिलाने के लिए है कि भविष्य का भारत आपकी आकांक्षाओं का है, जो इतनी ही विराट हैं.

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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' का अनावरण कर दिया है. यह दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है. प्रधानमंत्री ने देश को एक सूत्र में पिरोने की दिशा में सरदार पटेल की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि वह नहीं होते तो हमें सोमनाथ मंदिर में दर्शन करने और चारमीनार देखने के लिए भी वीज़ा लेना पड़ता. पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के वक्त दुनिया भारत की जिस कमजोरी को लेकर ताने दे रही थी सरदार ने उसी को ताकत बनाया और अखंड भारत खड़ा कर दिया.

    प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का दिन देश के इतिहास में दर्ज किया जाएगा. उन्होंने कहा, "आज देश के वर्तमान ने इतिहास के एक व्यक्तित्व को उनके समर्पण का सम्मान दिया है." बता दें कि पटेल की इस प्रतिमा का निर्माण पद्मभूषण से सम्मानित शिल्पकार राम वी सुतार ने किया है.

    पढ़ें पीएम मोदी के भाषण की खास बातेंः

    सीएम रहते कल्पना की, पीएम बना तो मिला ये सौभाग्य
    आज वो पल है जो किसी राष्ट्र के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो जाता है. आज भारत के वर्तमान ने अपने इतिहास के एक स्वर्णिम पुरुष को सम्मानित किया है. गुजरात के सीएम के तौर पर जब मैंने इसकी कल्पना की थी तब मुझे अहसास नहीं था कि एक दिन प्रधानमंत्री के तौर इस प्रतिमा को देश को समर्पित करने का सौभाग्य मुझे मिलेगा. 31 अक्टूबर 2010 को अहमदाबाद में मैंने इस प्रतिमा का विचार सबके सामने रखा था. तब मेरे मन में एक ही भावना थी कि देश को एक करने के लिए इतना बड़ा पुरुषार्थ करने वाले को वह सम्मान मिलना चाहिए जिसका वो हकदार है.

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    '550 रियासतों में बंटा था भारत'
    आजादी के वक्त भारत साढ़े पांच सौ से ज्यादा रियासतों में बंटा था. निराशावादियों को लगता था कि भारत अपनी विविधताओं की वजह से ही बिखर जाएगा. जिस कमज़ोरी पर दुनिया हमें उस समय ताने दे रही थी, उसी को ताकत बनाते हुए सरदार पटेल ने देश को रास्ता दिखाया. आज वही भारत दुनिया से अपनी शर्तों पर संवाद कर रहा है, दुनिया की बड़ी आर्थिक और सामरिक शक्ति बनने की तरफ आगे बढ़ रहा है.

    सरदार ने 5 जुलाई, 1947 को रियासतों को संबोधित करते हुए कहा था, “विदेशी आक्रांताओं के सामने हमारे आपसी झगड़े, आपसी दुश्मनी, वैर का भाव, हमारी हार की बड़ी वजह थी. अब हमें इस गलती को नहीं दोहराना है और न ही दोबारा किसी का गुलाम होना है.” सरदार साहब के इसी संवाद से, एकीकरण की शक्ति को समझते हुए उन्होंने अपने राज्यों का विलय कर दिया. देखते ही देखते, भारत एक हो गया.

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    सरदार का संकल्प न होता तो...
    कच्छ से कोहिमा तक, करगिल से कन्याकुमारी तक आज अगर बेरोकटोक हम जा पा रहे हैं तो ये सरदार साहब की वजह से. सरदार साहब का संकल्प न होता, तो कश्मीर से कन्याकुमारी तक की सीधी ट्रेन की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी. सरदार का संकल्प न होता तो आज गीर के शेर को देखने के लिए, सोमनाथ में पूजा करने के लिए और हैदराबाद चार मीनार को देखने के लिए हमें वीज़ा लेना पड़ता.

    भारत के सामर्थ्य पर सवाल उठाने वालों के जवाब
    सरदार की ये प्रतिमा उनके सामर्थ्य और समर्पण का सम्मान तो है ही, ये न्यू इंडिया के नए आत्मविश्वास की भी अभिव्यक्ति है. ये प्रतिमा सरदार प्रण, प्रतिभा, पुरुषार्थ और परमार्थ की भावना का प्रकटीकरण है. ये प्रतिमा भारत के अस्तित्व पर सवाल उठाने वालों को ये याद दिलाने के लिए है कि ये राष्ट्र शाश्वत था, शाश्वत है और शाश्वत रहेगा.

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    राजनीति करने वालों पर होती है हैरानी
    कई बार तो मैं हैरान रह जाता हूं, जब देश में ही कुछ लोग हमारी इस मुहिम को राजनीति से जोड़कर देखते हैं. सरदार पटेल जैसे महापुरुषों, देश के सपूतों की प्रशंसा करने के लिए भी हमारी आलोचना होने लगती है. ऐसा अनुभव कराया जाता है मानो हमने बहुत बड़ा अपराध कर दिया है. महापुरुषों को याद करना अपराध है क्या?

    टूरिज्म से स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार
    स्टैच्यू ऑफ यूनिटी देश की अर्थव्यवस्था, रोज़गार निर्माण का भी महत्वपूर्ण स्थान होने वाला है. इससे हज़ारों आदिवासी बहन-भाइयों को हर वर्ष सीधा रोज़गार मिलने वाला है. सतपुड़ा और विंध्य के इस अंचल में बसे आप सभी जनों को प्रकृति ने जो कुछ भी सौंपा है, वो अब आधुनिक रूप में आपके काम आने वाला है. सरदार साहब के दर्शन करने आने वाले टूरिस्ट सरदार सरोवर डैम, सतपुड़ा और विंध्य के पर्वतों के दर्शन भी कर पाएंगे.

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    सरदार के दिखाए रास्ते पर चल रही सरकार
    सरदार पटेल चाहते थे कि भारत सशक्त, सुदृढ़, संवेदनशील, सतर्क और समावेशी बने. हम उनके इसी सपने को साकार करने की दिशा में काम कर रहे हैं. हमने उन 18 हजार गावों तक बिजली पहुंचाई है, जहां आजादी के इतने वर्षों के बाद भी बिजली नहीं पहुंची थी. देश के हर गांव को सड़क से जोड़ने, डिजिटल कनेक्टिविटी से जोड़ने का काम भी तेज गति से किया जा रहा है.

    युवाओं के लिए संदेश
    ये ऊंचाई, ये बुलंदी भारत के युवाओं को ये याद दिलाने के लिए है कि भविष्य का भारत आपकी आकांक्षाओं का है, जो इतनी ही विराट हैं. इन आकांक्षाओं को पूरा करने का मंत्र सिर्फ और सिर्फ एक ही है- एक भारत, श्रेष्ठ भारत. हमारी जिम्मेदारी है कि हम देश को बांटने की हर तरह की कोशिश का पुरजोर जवाब दें. इसलिए हमें हर तरह से सतर्क रहना है. समाज के तौर पर एकजुट रहना है.

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