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जब .22 की राइफल से निशाना साधते थे नरेंद्र मोदी

Brajesh Kumar Singh, Group Consulting Editor | News18Hindi
Updated: January 27, 2020, 9:16 PM IST
जब .22 की राइफल से निशाना साधते थे नरेंद्र मोदी
मोदी के एनसीसी से जुड़ने की कहानी काफी रोचक है.

एनसीसी के जूनियर डिविजन में थे मोदी. करीब दो साल तक मोदी एनसीसी में सक्रिय रहे थे और उस दौरान अनुशासन का पाठ उन्होंने बखूबी पढ़ा, जो एनसीसी के मूल में है.

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  • Last Updated: January 27, 2020, 9:16 PM IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल (मंगलवार) दोपहर एनसीसी कैडेट्स से मुखातिब होने वाले हैं. राजधानी दिल्ली में करियप्पा परेड ग्राउंड पर वो न सिर्फ इन कैडेट्स के गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण करेंगे, बल्कि उनके मार्च पास्ट को भी निहारेंगे और साथ में इन कैडेट्स की तरफ से पेश किये जाने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी लुत्फ उठाएंगे. हर साल गणतंत्र दिवस के मौके पर देश भर से सैकड़ों की तादाद में एनसीसी कैडेट्स दिल्ली आते हैं. पिछले साल भी मोदी इन कैडेट्स के रिपब्लिक डे कैंप में गये थे और एनसीसी रैली को संबोधित किया था. कल भी मोदी यही करने वाले हैं.

दरअसल मोदी के लिए ये अपने छात्र जीवन की स्मृति को ताजा करने जैसा भी है, जब वो खुद एनसीसी के कैडेट हुआ करते थे. मोदी के बचपन की एकमात्र तस्वीर जो सामने है, ये वही तस्वीर है, जो बतौर एनसीसी कैडेट 1965 में खीची गयी थी. उस समय मोदी महज पंद्रह साल के थे और अपने जन्मस्थल वडनगर के बीएन हाईस्कूल के विद्यार्थी थे. एनसीसी के जूनियर डिविजन में थे मोदी. करीब दो साल तक मोदी एनसीसी में सक्रिय रहे थे और उस दौरान अनुशासन का पाठ उन्होंने बखूबी पढ़ा, जो एनसीसी के मूल में है. आजादी के तुरंत बाद 16 जुलाई 1948 को एनसीसी की स्थापना की गई थी, उसके पीछे सोच यही थी कि किशोर वय के छात्रों में अनुशासन, देश प्रेम और राष्ट्रीय एकता की भावना को सुदृढ किया जा सके.

पहली पंक्ति में बाएं से पहली तस्‍वीर पीएम मोदी के बचपन की है. ये फोटो 1965 में खीची गई थी.


मोदी के एनसीसी से जुड़ने की कहानी भी काफी रोचक है. वडनगर के बीएन हाईस्कूल में उनके इंस्ट्रक्टर थे गोरधनभाई पटेल. गोरधनभाई मूल तौर पर अंग्रेजी के शिक्षक थे और स्कूल में एनसीसी के जूनियर डिविजन आर्मी विंग की गतिविधियां उन्हीं की अगुआई में चलती थीं. फिलहाल 84 वर्ष के हो चुके गोरधनभाई को आज भी याद है कि छोटे कद का एक लड़का आठ-दस और बच्चों के साथ उनके पास आया था एनसीसी में शामिल होने की दरख्वास्त लेकर. एनसीसी के जूनियर डिविजन में शामिल होने के लिए कम से कम तेरह साल की आयु होनी चाहिए और सामान्य तौर पर अच्छी सेहत की उम्मीद भी की जाती है. गोरधन भाई ने जब उस बालक को देखा तो पहली नजर में तो यही ख्याल आया कि उसे एनसीसी के लिए रिजेक्ट कर दें, लेकिन उस बच्चे की आंखों में कुछ ऐसी चमक और चेहरे पर ऐसा दृढ विश्वास था कि वो ना नहीं कर सके और अपेक्षाकृत कमजोर सेहत और छोटे कद वाले इस बच्चे का टेस्ट लेने का मन बना लिया, साथ आये उन आठ-दस बच्चों के साथ, जो नन्हें नरेंद्र की तुलना में ज्यादा स्वस्थ और अधिक उंचाई वाले थे.

पीएम मोदी के एनसीसी के शिक्षक गोरधनभाई (फाइल फोटो)


शिक्षक गोरधनभाई ने तीन किस्म के टेस्ट लिए. पहले तो करीब दो सौ मीटर दौड़ाया, फिर एक पैर पर लंगड़ी वाले अंदाज में करीब पचास फीट तक आगे बढ़ने के लिए बोला और फिर आखिर में मेढक की तरह कूदना यानी फ्रॉग जंपिंग कराई. गोरधनभाई के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा, जब नन्हा नरेंद्र हर टेस्ट में अपने से बड़े और ज्यादा सेहतमंद बच्चों की तुलना में आगे रहा. उन्होंने सोचा कि अच्छा हुआ कि सीधे-सीधे रिजेक्ट करने की जगह उन्होंने बच्चे का टेस्ट लिया अन्यथा उस छात्र के साथ अन्याय हो जाता. इस तरह एनसीसी में शामिल हुए नरेंद्र मोदी.

गोरधनभाई को अपने कैडेट नरेंद्र की आर्थिक सेहत का अंदाजा था. पता था कि पिता दामोदरदास मोदी वडनगर के रेलवे स्टेशन पर चाय की दुकान चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं, जहां खाली समय में हाथ बंटाने के लिए नन्हा नरेंद्र भी जाता है. लेकिन उन्हें आश्चर्य इस बात का होता था कि एनसीसी के कैडेट के तौर पर ट्रेनिंग के लिए स्कूल ग्राउंड में आने वाले नरेंद्र की शर्ट और हाफ पैंट की क्रीच हमेशा सही कैसे रहती है या फिर जूते चमकते कैसे रहते हैं, वो भी तब जव वो छात्र गांव की धूल भरी सड़क पर पैदल चलकर आता है.
गोरधनभाई ने नरेंद्र मोदी की आंखों में चमक और चेहरे पर दृढ विश्‍वास देखा था.


गोरधनभाई को जल्दी ही इस बात का पता चल गया कि नन्हा नरेंद्र शर्ट और पैंट की क्रीच ठीक करने के लिए किसी बरतन में आग अंदर डालकर उससे आयरन कर लेता है, तो स्कूल ग्राउंड में घुसने के ठीक पहले अपनी जेब में रखे पुराने कपड़े से जूते साफ कर लेता है ताकि गाउंड में जब वो पहुंचे, तो उसका टर्नआउट बढ़िया हो, जूते चमकते हों. गोरधनभाई का मानना है कि परिधान के मामले में हमेशा दुरूस्त रहने वाले नरेंद्र मोदी को ये संस्कार स्कूली दिनों में एनसीसी की तालीम के दौरान ही मिले, जो आज भी उनके व्यक्तित्व में भली-भांति परिलक्षित होते हैं और दुनिया उसकी नोटिस लेती है. शर्ट, पैंट और जूते ही नहीं, बेल्ट की पीतल वाली बकल और एनसीसी कैप में लगने वाले पीतल के निशान को भी मोदी चमकाकर रखा करते थे.

जूनियर कैडेट नरेंद्र अपने शिक्षक के प्रिय थे, क्योंकि किसी भी कार्यक्रम या फिर परेड की तैयारी के लिए वो अपने शिक्षक का हाथ बंटाने के लिए समय से पहले आ जाते थे. कभी कोई ड्रिल मिस नहीं करते थे. सभी सामानों का हिसाब रखते थे.

गोरधनभाई को मोदी के एनसीसी दिनों की एक घटना आज भी पूरी तरह याद है. उत्तर गुजरात में ग्रीष्मकालीन शिविर का आयोजन हुआ था, मई का महीना था, गर्मी काफी अधिक थी और अलग-अलग स्कूलों से बच्चे आये हुए थे. बच्चों को लू नहीं लगे, इसलिए दोपहरी में सबको अंदर रहने के लिए ही कहा गया था. लेकिन दोपहर में अचानक किसी काम से बाहर निकले गोरधनभाई ने देखा कि एक पेड़ के नीचे दस-बारह कैडेट खड़े हैं और एक लड़का पेड़ पर चढ़ा हुआ है. उन्हें काफी गुस्सा आया और डांट लगानी शुरु की. पता ये चला कि जो लड़का उपर चढ़ा हुआ है, वो नरेंद्र ही है. चढ़ने की वजह जानी तो पता चला कि पतंग की डोर में फंसकर एक कबूतर पेड़ की डाली पर छटपटा रहा था और पहले दो छात्रों के असफल होने के बाद पेड़ पर चढ़कर ब्लेड के जरिये पतंग की डोरियां काटकर उस कबूतर को मुक्त करने के बाद जब नरेंद्र नीचे आ रहा था, उसी वक्त गोरधनभाई वहां पहुंचे थे. डांटने की जगह अपने प्रिय छात्र की पीठ थपथपाकर गोरधनभाई वापस लौटे थे.

नरेंद्र मोदी शर्ट और पैंट की क्रीच ठीक करने के लिए किसी बरतन में आग अंदर डालकर उससे आयरन करते थे.


दो साल तक जूनियर कैडेट के तौर पर एनसीसी की ट्रेनिंग के दौरान नरेंद्र मोदी ने निशानेबाजी भी पक्की कर ली थी. गोरधनभाई बताते हैं कि एनसीसी कैडेट्स को .22 की राइफल से टार्गेट प्रैक्टिस कराई जाती थी और कैडेट के तौर पर नरेंद्र मोदी अमूमन पांच में से चार बार सही निशाना लगाने में सफल रहते थे. गोरधनभाई को लगता है कि एनसीसी के दौरान निशानेबाजी की जो प्रैक्टिस नन्हे नरेंद्र ने की थी, शायद वही आगे के सियासी जीवन में उनके काम आई और ज्यादातर लक्ष्यों पर सटीक निशाना लगाने में नरेंद्र मोदी कामयाब रहे, जो अब भी जारी है भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर.

एनसीसी की ट्रेनिंग अमूमन सुबह साढ़े छह बजे शुरु होती थी, जो अगले दो घंटे तक जारी रहती थी. गोरधनभाई की मदद के लिए सेना के जवान होते थे. इस ट्रेनिंग के दौरान भी नन्हे नरेंद्र में गोरधनभाई को नेतृत्व के नैसर्गिक गुण दिखाई पड़ते थे. अपने से ज्यादा उम्र और उंचाई वाले कैडेट्स को भी अपनी बात मनवा लेते थे नरेंद्र.

बढ़ती उम्र के कारण गोरधनभाई अब उंचा सुनने लगे हैं, लेकिन याददाश्त पर कोई असर नहीं हुआ है. उन्हें आज इस बात का काफी संतोष है कि स्कूल में सालाना एनसीसी कैडेट्स की जो सामूहिक तस्वीर काले कपड़े से ढके बड़े डिब्बानुमा कैमरे से खीची जाती थी, वो संभालकर अपने पास रख पाए. 1965 में खीची गई उस तस्वीर को गोरधनभाई ने अपने खास शिष्य को करीब चार दशक बाद सरप्राइज गिफ्ट के तौर पर वडोदरा में शिक्षक दिवस के एक कार्यक्रम के दौरान भेंट की, जिसे देखकर तब गुजरात के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल रहे मोदी भी आश्चर्यचकित हो गये थे. यही वो तस्वीर है, जो दुनिया को नरेंद्र मोदी के आरंभिक जीवन से परिचय कराती है. गोरधनभाई को गर्व है अपने उस कैडेट पर, जो न तो अपने शिक्षकों को भूला है और न ही एनसीसी के दौरान हासिल हुई तालीम के बुनियादी सिद्धांतो को. पीएम मोदी तो देश भर से आए कैडेट्स की मौजूदगी में एनसीसी के उन पुराने दिनों को एक बार फिर से याद करेंगे ही.

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First published: January 27, 2020, 8:58 PM IST
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