शिवपाल और प्रियंका गांधी ने की मुलाकात, यूपी में बनेंगे नए समीकरण!

सूत्रों की मानें तो जल्द ही प्रियंका गांधी महागठबंधन के दूसरे दल सपा को भी मुश्किल में डाल सकती हैं. गुरुवार की सुबह प्रियंका और शिवपाल यादव बातचीत कर चुके हैं.

नासिर हुसैन | News18Hindi
Updated: March 15, 2019, 8:41 PM IST
शिवपाल और प्रियंका गांधी ने की मुलाकात, यूपी में बनेंगे नए समीकरण!
प्रियंका गांधी (file photo)
नासिर हुसैन
नासिर हुसैन | News18Hindi
Updated: March 15, 2019, 8:41 PM IST
भीम आर्मी के चीफ चन्द्रशेखर के जरिए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी बसपा को परेशानी में डाल चुकी हैं. महागठबंधन में बसपा सुप्रीमो के बदले तेवर इस बात का सबूत हैं. सूत्रों की मानें तो जल्द ही प्रियंका गांधी महागठबंधन के दूसरे दल सपा को भी मुश्किल में डाल सकती हैं. सूत्रों का कहना है कि प्रियंका गांधी ने शिवपाल यादव से मुलाकात की है. इस मुलाकात के बाद यूपी में नए सियासी समीकरण बनते नजर आ रहे हैं.

सूत्रों की मानें तो 2019 का लोकसभा चुनाव प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) के अध्यक्ष शिवपाल यादव कांग्रेस के साथ मिलकर लड़ सकते हैं. चर्चा है कि इसकी दोनों ओर से सहमति बन चुकी है. जानकारों का कहना है कि कांग्रेस और प्रसपा के इस गठबंधन पर प्रियंका गांधी के साथ हुई शिवपाल यादव की मुलाकात के बाद मुहर लग चुकी है.

सीट से लेकर दूसरे मामलों पर भी इस संबंध में भी गुरुवार की सुबह दोनों नेताओं में बातचीत हो चुकी है. अगर सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो अपने यूपी दौरे के कार्यक्रम में प्रियंका गांधी इसकी घोषणा भी कर सकती हैं. जानकारों का कहना है कि पहले ये घोषणा रविवार को लखनऊ में होनी थी.



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लेकिन उसके बाद अचानक से प्रियंका गांधी के कार्यक्रम में कुछ मामूली फेरबदल किया गया है. इसके बाद संभावना जताई जा रही है कि सोमवार को इसकी घोषणा हो सकती है. वहीं इस बारे में राजनीति के जानकार और डॉ. बीआर आंबेडकर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. अरशद का कहना है, “कांग्रेस का शिवपाल यादव के साथ जाना उसके लिए नुकसानदायक हो सकता है. अभी तक सपा कांग्रेस के साथ नरमी दिखाती रही है. लेकिन अगर शिवपाल से गठबंधन हुआ तो सपा और कांग्रेस के रिश्ते सामान्य नहीं रह जाएंगे."

"जहां सोनिया, राहुल और प्रियंका गांधी चुनाव लड़ रहे हैं वहां सपा अपना मतलब महागठबंधन का उम्मीदवार नहीं उतार रही है. वहीं हाल ही में कांग्रेस के खिलाफ गरम तेवर दिखाने वालीं मायावती की बात भी अखिलेश यादव ने खारिज कर दी. तो ऐसे में कांग्रेस सपा से नाराजगी का जोखिम नहीं ले सकती है.”

इस बारे में प्रसपा के मीडिया प्रभारी रुपेश पाठक का कहना है, देश में साम्प्रदायिक शक्तियों व भाजपा के खिलाफ संघर्ष में कांग्रेस एक महत्वपूर्ण धुरी व सेक्युलर फोर्स है, इसलिए कांग्रेस से सहज सैद्धांतिक सहमति के आधार पर अगर कोई भी समझौता होना है तो उसके बारे में प्रसपा व कांग्रेस का शीर्ष व राष्ट्रीय नेतृत्व फैसला लेगा. ध्यान रहे पूर्व में हमारे नेता शिवपाल यादव ने विभन्न मंचो पर भाजपा के विरुद्ध एक कारगर महागठबंधन की संकल्पना की थी.
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