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कर्नाटक में फिर सियासी हलचल, येडियुरप्पा बोले- मुझे पार्टी आलाकमान का फैसला मानना होगा

कर्नाटक में फिर सियासी हलचल शुरू हो गई है  (फाइल फोटो)

कर्नाटक में फिर सियासी हलचल शुरू हो गई है (फाइल फोटो)

दिंगालेश्वर स्वामी ने कहा कि येडियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद से नहीं हटाने की उनकी मांग इसलिए नहीं है कि वह लिंगायत है, बल्कि इसलिए है कि वह अच्छे नेता हैं एवं उन्होंने राज्य के लिए संघर्ष किया है एवं उन्हें सभी के सहयोग से प्रशासन चलाना दिया जाना चाहिए.

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    बेंगलुरु. कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को फिर बल मिला है. बताया जाता है कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी एस येडियुरप्पा ने मंगलवार को विभिन्न समुदायों के संतों के प्रतिनिधिमंडल से कहा कि उन्हें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शीर्ष नेतृत्व के निर्णय का पालन करना ही होगा. हालांकि संतों ने चेतावनी दी कि यदि येडियुरप्पा को मुख्यमंत्री के पद से हटाया गया तो कर्नाटक में भाजपा को राजनीतिक दुष्परिणाम भुगतने पड़ेंगे.

    प्रतिनिधिमंडल के अगुवा बालेहोसुर मठ के दिंगालेश्वर स्वामी ने कहा, ‘‘ येडियुरप्पा ने बस इतना ही कहा कि वह इस मुद्दे पर कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं और उन्हें आलाकमान के निर्णय का पालन करना ही होगा. उन्होंने और कुछ नहीं कहा.’’ मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद स्वामी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘जब हमने येडियुरप्पा से पूछा कि दरअसल हुआ क्या है, तो उन्होंने कहा कि वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे और आलाकमान का फैसला अंतिम है . उन्होंने और कुछ नहीं कहा.’’

    उन्होंने कहा, ‘‘संतों की एकमत राय है कि येडियुरप्पा को मत हटाइए. यदि ऐसा किया जाता है तो आपको (भाजपा को) आने वाले दिनों में दुष्परिणाम का सामना करना पड़ेगा. ’’ उन्होंने कहा, ‘‘ बदलाव की जरूरत ही क्या है? (लेकिन) हम नये नेताओं को आगे लाने के विरूद्ध नहीं हैं.’’

    दो दर्जन संतों ने की मुख्यमंत्री से मुलाकात
    राज्य से विभिन्न हिस्सों से आये भगवा वेशधारी दो दर्जन से अधिक संतों ने येडियुरप्पा के प्रति अपना समर्थन व्यक्त करने के लिए उनसे भेंट की क्योंकि कुछ वर्गों में निकट भविष्य में उनके पद से हटने की चर्चा की है. सूत्रों ने बताया कि अगले दो चार दिनों में 300-400 संतों के ‘भावी कार्ययोजना’ पर चर्चा के लिए बेंगलुरु में जुटने की संभावना है.

    दिंगालेश्वर स्वामी ने कहा कि येडियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद से नहीं हटाने की उनकी मांग इसलिए नहीं है कि वह लिंगायत है, बल्कि इसलिए है कि वह अच्छे नेता हैं एवं उन्होंने राज्य के लिए संघर्ष किया है एवं उन्हें सभी के सहयोग से प्रशासन चलाना दिया जाना चाहिए.

    उन्होंने कहा कि ये येडियुरप्पा और उनके साथी ही हैं जिनके प्रयास से भाजपा कर्नाटक में सत्ता में आ पायी. उन्होंने कहा कि राज्य के संतों एवं लोगों के बीच बीच यह भावना है कि जिन येडियुरप्पा ने कर्नाटक में भाजपा को जमीनी स्तर से खड़ा किया और उसे सत्ता में पहुंचाया, उन्हें ही अतीत में पूरे कार्यकाल के लिए प्रशासन नहीं चलाने दिया गया और अब भी वही हो रहा है.

    उन्होंने कहा, ‘‘ किसी भी स्थिति में यदि येडियुरप्पा को हटाया जाता है तो भाजपा कर्नाटक में संभवत: मिट जाएगी. यह केवल हमारा ही नहीं बल्कि राज्य के ज्यादातर लोगों की राय है. ’’

    मुख्यमंत्री के तौर पर दो साल पूरा करने वाले हैं येडियुरप्पा
    भाजपा आलाकमान से येडियुरप्पा को कार्यकाल पूरा करने देने का आह्वान करते हुए दिंगालेश्वर स्वामी ने कहा कि यह वही नेता हैं जिन्होंने अन्य दलों से 17 विधायक ‘लाकर’ सरकार बनायी तथा बाढ़ एवं कोविड की स्थिति को प्रभावी तरीके से संभाला.

    छब्बीस जुलाई को (इस कार्यकाल में) मुख्यमंत्री के रूप में दो साल पूरा करने जा रहे येडियुरप्पा पिछले सप्ताह दिल्ली गये थे और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा से भेंट की थी. इस यात्रा के बाद कुछ वर्गों में प्रश्न उठने लगे थे कि क्या पार्टी उनके उत्तराधिकारी की योजना पर काम कर रही है.

    हालांकि दिल्ली से लौटने के बाद येडियुरप्पा ने ऐसी चर्चा को खारिज करते हुए कहा था कि केंद्रीय नेतृत्व ने उनसे पद पर बने रहने के कहा है . लेकिन उनके पद से हटने की अटकलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं क्योंकि उन्होंने 26 जुलाई को भाजपा विधायक दल की बैठक बुलायी है.

    इस बीच, ऐसा जान पड़ता है कि समुदाय कारक भी सामने आ गया है और वीरशैव लिंगायत समुदाय से जुड़े राजनीतिक नेताओं एवं संतों ने उनके पीछे अपनी ताकत झोंक दी है.

    इस प्रभावशाली समुदाय के कई संतों एवं नेताओं ने भाजपा को 78 वर्षीय कद्दावर लिंगायत नेता को मुख्यमंत्री के पद से हटाये जाने के विरूद्ध आगाह किया है. कर्नाटक में लिंगायत करीब 16 फीसद हैं. वीरशैव-लिंगायत समुदाय भाजपा का अहम वोटबैंक समझा जाता है.

    वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं ‘ऑल इंडिया वीरशैव महासभा’ के प्रमुख शमानुर शिवशंकरप्पा ने कहा कि यह समुदाय उनके पीछे मजबूती से खड़ा है. इसके अलावा चित्रदुर्ग के श्री जगदगुरु मुरुघराजेंद्र मठ के प्रमुख मुरुघ शरानु, बालेहोन्नून के रांभपुरी पीठ के श्री वीर सोमेश्वर शिवाचार्य स्वामी और श्रीशैल जगदगुरू चन्ना सिद्धधर्म पंडिताराध्य जैसे समुदाय के प्रमुख संतों ने भी येडियुरप्पा को उनके पद बनाने रखने की वकालत की है और भाजपा को उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाने के विरूद्ध चेतावनी दी है.



    (Disclaimer: यह खबर सीधे सिंडीकेट फीड से पब्लिश हुई है. इसे News18Hindi टीम ने संपादित नहीं किया है.)

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