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क्या बंगाल में ममता की डूबती नैया को पार लगा पाएंगे प्रशांत किशोर?

News18Hindi
Updated: June 6, 2019, 5:42 PM IST
क्या बंगाल में ममता की डूबती नैया को पार लगा पाएंगे प्रशांत किशोर?
चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने गुरूवार को बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकत की.

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने गुरूवार को बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकत की.

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लोकसभा चुनाव में अपनी पार्टी के प्रदर्शन के बाद से 2021 में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए अभी से तैयारी करनी शुरू कर दी है. इसी संबंध में उन्होंने गुरुवार को चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर से मुलाकत की.

खबर है कि प्रशांत किशोर ममता बनर्जी के लिए काम करने को तैयार हो गए हैं और वह अगले महीने से बंगाल के लिए रणनीति तैयार करना शुरू करेंगे. कोलकाता में दो घंटे चली बैठक के बाद ममता बनर्जी और प्रशांत किशोर के बीच इस मुद्दे पर सहमति बनी कि पीके ममता के लिए विधानसभा चुनावों की रणनीति बनाएंगे.

इन बड़े नेताओं को दिलाई सत्ता



बता दें 2014 के लोकसभा चुनाव में पीएम नरेंद्र मोदी के चुनावी रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर ने इस बार आंध्र प्रदेश में जगनमोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) की जीत में बड़ी भूमिका निभाई. प्रशांत ने   इससे पहले प्रशांत किशोर बिहार में नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल युनाइटेड के लिए भी काम कर प्रदेश में उनकी सरकार बनवा चुके हैं.



लोकसभा चुनावों में बंगाल में भारतीय जनता पार्टी को 18 सीट मिलने के बाद ममता बनर्जी को पैरों से ज़मीन खिसकती हुई दिख रही थी. जिसके बाद उन्होंने प्रशांत किशोर से मुलाकात की.

अपनी गलतियों को दोहराना नहीं चाहतीं ममता

सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार ने प्रशांत किशोर के साथ ममता की बैठक की व्यवस्था की थी. राज्य सरकार को ऐसा लग रहा था कि प्रशासन और आम आदमी के बीच तालमेल का अभाव है.

टीएमसी यह जानना चाहती है कि लोकसभा चुनावों में क्या गलत हुआ और आने वाले नगरपालिका और विधानसभा चुनावों में किस तरह पहले हुए सीटों के नुकसान की भरपाई की जा सके. इसके लिए सही रणनीति तैयार की जा सके.

इसलिए पीके को छोड़ना नहीं चाहती टीएमसी

टीएमसी की ओर से इस बात पर भी ध्यान दिया जा रहा है कि वह जो काम कर रही है उसे जनता तक पहुंचा सके. टीएमसी का मानना है कि मोदी सरकार अच्छे कम्युनिकेशन की वजह से सत्ता में आई है.

चूंकि प्रशांत किशोर ने कई अन्य राज्यों में अन्य राजनीतिक दलों के लिए एक विश्लेषक के तौर में काम किया है, इसलिए टीएमसी उन्हें अपने साथ रखना चाहती है. बता दें बंगाल में ममता ने न केवल कभी माओवादी क्षेत्र रहे जंगलमहल को खो दिया है बल्कि उन्होंने लोगों के समर्थन का एक बड़ा हिस्सा भी खो दिया है.

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First published: June 6, 2019, 5:05 PM IST
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