वैक्सीनेशन अभियान में आई राजनीति, PM मोदी के मुफ्त टीकाकरण के ऐलान ने बंद की सबकी जुबान

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि वैक्सीन को लेकर अफवाहें चिंतित करने वाली हैं.

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि वैक्सीन को लेकर अफवाहें चिंतित करने वाली हैं.

केन्द्र सरकार के सूत्रों ने बताया कि भारत के तमाम विपक्षी दलों ने टीकाकरण अभियान को हर संभव नुकसान पहुंचाने की कोशिश की. सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने कोरोना वैक्सीन पर सवाल उठा कर और उसके बारे में लोगों मे भ्रम पैदा कर पूरी वैक्सीनेशन प्रक्रिया को भटकाने की कोशिश की.

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सोमवार को पीएम मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संदेश में पूरे देश के मुफ्त टीकाकरण का ऐलान किया. लेकिन कोरोना टीकाकरण की रणनीति पर याद दिलाया कि मानवता के इस काम में वाद विवाद को पूरा देश अच्छा नही मानता है. पीएम मोदी उन लोगों को भी आड़े हाथों लिया जो वैक्सीन को लेकर दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान को लेकर भ्रम पैदा करते आए हैं. पीएम मोदी ने कहा कि ये लोग देश के भोले भाले लोगों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं और देश के लोगों को इनसे बच के रहने की जरुरत है.

केन्द्र सरकार के सूत्रों ने बताया कि भारत के तमाम विपक्षी दलों ने टीकाकरण अभियान को हर संभव नुकसान पहुंचाने की कोशिश की. सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने कोरोना वैक्सीन पर सवाल उठा कर और उसके बारे में लोगों मे भ्रम पैदा कर पूरी वैक्सीनेशन प्रक्रिया को भटकाने की कोशिश की. सूत्रों ने आरोप लगाया कि चाहे वो दवाओं की विश्वसनियता पर सवाल उठाने का मसला हो या फिर वैक्सीन के राज्यों के बीच बंटवारे पर विवाद पैदा करना. विपक्षी पार्टियां लगातार पूरी देश के लिए टीकाकरण अभियान शुरू करने की मांग करते रहे. ये पार्टियां जानती थीं कि केन्द्र सरकार ने एक साइंटिफिक तरीके से टीकाकरण की प्राथमिकताएं तय की थी.

टीकाकरण अभियान पर विपक्षी दलों का यू टर्न

केन्द्र सरकार के सूत्र बताते हैं कि जनवरी 16 को टीकाकरण अभियान की शुरुआत के बाद से ही राहुल गांधी, ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल ने सबसे पहले टीकाकरण के विकेन्द्रीकरण की मांग रखी लेकिन केन्द्र सरकार ने इसे डीसेन्ट्रलाइज कर दिया गया तो ये सभी नेता यू टर्न लेते हुए इसको सेन्ट्रलाइज करने की मांग करने लगे. राहुल गांधी ने 9 अप्रैल को पीएम मोदी को खत लिख कर मांग की कि राज्य सरकारों को टीकाकरण की प्रक्रिया में ज्यादा ताकत मिले ताकि वो टीका खरीद भी सकें और अपने हिसाब से इसका बंटवारा भी कर सकें. लेकिन ठीक एक महीने के बाद ही वो पलट गए और एक ट्वीट कर के कहा कि सरकार की टीकाकरण की नीति समस्या बढ़ा रही है. दवा केन्द्र खरीदे और बंटवारा राज्यों के हाथ में जाए.
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने मांग की कि राज्य सरकारों को दवा कंपनियों से करार कर दवा लेने का अघिकार तुरंत दे देना चाहिए. लेकिन जब केद्र ने डीसेन्ट्रलाइज कर दिया, तब सोनिया गांधी ने कहा कि केन्द्र अपनी जिम्मेदारी से बच रहा है. कांग्रेस कार्यसमिति में टीके की बर्बादी पर कोई चर्ची नहीं हुए जबकि स्वास्थख्य मंत्रालय के आंकड़े लगातार बता रहे थे कि दवा की बर्वादी की ज्यादातर शिकायतें कांग्रेस शासित राज्यों से आ रही थीं. ममता बनर्जी ने 24 फरवरी को पीएम को खत लिख कर कहा था कि वो सीधे राज्यों के पैसे से दवाएं खरीद सकतीं हैं. लेकिन उन्होने भी मई में यू टर्न लेते हुए कहा कि केन्द्र खुद राज्यों के लिए सीधा दवा खरीदे. केन्द3 सरकार के सूत्रों के मुताबिक अरविंद केजरीवाल भी आरोप लगने मे पीछे नहीं रहे. उन्होने मार्च में टीकाकरण के विकेन्द्रीकरण की मांग की ताकि जिन्हे वो जिन्हे टीका देना चाहते हैं उन्हें दे सकें. लेकिन मई में यू टर्न लेते हुए कहा कि केन्द्र ही ये काम करे.



दवा की कमी और निर्यात पर सवाल उठाए गए

कांग्रेस ने पोस्टर तक लगवाए कि दवाएं निर्यात कर दी गयीं. लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय के पास आए आंकड़ों के मुताबिक कांग्रेस शासित सरकारो ने कोरोना की दवाओं की न सिर्फ बर्वादी की बल्कि उनका पूरा इस्तेमाल भी नहीं किया. कांग्रेस का ये दोहरा मापदंड कोरोना के टीकाकरण की रफ्तार थामने में लगा था. दूसरी तरफ काग्रेस सांसद शशि थरुर ने भारत सरकार के दवा निर्यात को रोकने के फैसले पर सवाल उठाते रहे और साथ ही वैक्सीन मैत्री मिशन की निंदा भी कर डाली. शशि थरुर और अभिषेक सिंगवी ने कोरोना टीका बाजार में उपलब्ध कराने की मांग भी की. केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन पहले ऐलान कर दिया कि वो राज्य में सभी को मुफ्ट वैक्सीन देंगे. लेकिन चंद रोज के बाद ही केन्द्र से मांग की कि दवामुफ्त दवा के लिए पैसे की मांग करने लगे. झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने भी केरल सीएम की तर्ज पर वैक्सीन के लिए फंड की मांग कर डाली.

सभी वयस्क लोगों के टीकाकरण की मांग

तमाम विपक्षी नेता जानते थे कि दवा कि स्थिति क्या है और केन्द्र सरकार ने किस आधार पर टीका करण की प्राथमिकता तय की है. फिर भी उन्होने एक सुर से सबके टीकाकरण की मांग की और फिर दवाओं की कमी की शिकायत करने लगे. राहुल गांधी ने 7 अप्रैल को सबके टीकाकरण की मांग की. फिर 24 अप्रैल को देश में वैक्सीन की कमी की बात करने लगे. सोनिया गांधी ने दवा की कमी की बात की. साथ ही सोनि. गांधी ने केन्द3 सरकार को कहा कि वो वैक्सीन के लिए आयु सीमा 25 वर्ष कर दे. प्रियंका गांधी ने दवा की कमी पर सवाल उठाए और जनता से सबके टीकाकरण के लिए आवाज उठआने की अपील भी की. ममता ने बंगाल विधानसभा चुनावों के दैरान सबको टीका देने की बात की जबकि वो जानती थीं की ददवा की सप्लाई की स्थिति क्या है.

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कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी उम्र की सीमा घटाने की माग की. अशोक गहलोत ने भी 5 अप्रैल को केन्द्र सरकार से उम्र की सीमा को हटाने की अपील की. फिर 26 अप्रैल को स्वास्थ मंतत्रालय से कहा कि राज्य में दवा की कमी है. जब केन्द्र ने उद्धव ठाकरे को टीकाकरण की धीमे पड़ने के लिए खींचा तो उद्धव ने पीएम को चिठ्टी लिख कर मांग की कि उन्हें 25 साल से उपर के लोगों को टीकाकरण की इजाजत दी जाए. सूत्रों का कहना है कि सबसे गलत दावे और आरोप लगाने का रिकार्ड तो अखिलेश यादव को जाता है जिन्हने कहा था कि वो बीजेपी बैक्सिन का शाट नहीं लगवाएंगे.


केन्द्र सरकार के सूत्रों के मुताबिक वो तमाम नेता जो पूरे देश के टीकाकरण की मांग कर रहे थे, उन्होने ही कोरोना के टीके पर सवाल उठाए और उस दवा के बारे में गलत अफवाहें भी फैलायीं. इसलिए शुरुआत के दौर में भारत की जनता के बीच टीकाकरण को लेकर एक झिझक उठ खड़ी हुई थी. अब पीएम के पूरे देश के मुफ्त टीकाकरण के ऐलान के बाद सरकार के उम्मीद है की गलतियां निकालने वालों की जुबान पर ताला लग जाएगा.

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