इस हत्याकांड के इर्द-गिर्द घूमेगा आंध्र का चुनाव! जगन और नायडू के बीच जमकर जारी वार

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने विवेकानंद रेड्डी की हत्या की जांच के लिए एसआईटी गठित की है, जबकि जगनमोहन रेड्डी इसकी सीबीआई जांच चाहते हैं. इस मामले पर दोनों के बीच ज़ुबानी जंग जारी है.

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Updated: March 20, 2019, 2:07 PM IST
इस हत्याकांड के इर्द-गिर्द घूमेगा आंध्र का चुनाव! जगन और नायडू के बीच जमकर जारी वार
जगन मोहन रेड्डी और चंद्रबाबू नायडू के बीच इस मामले पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है.
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Updated: March 20, 2019, 2:07 PM IST
वेंकटेश हाकिमपेट
कुछ दिन पहले 15 मार्च को वाईएस विवेकानंद रेड्डी की उनके विरोधियों ने कुल्हाड़ी से हत्या कर दी. मंत्री रह चुके विवेकानंद रेड्डी आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी के छोटे भाई थे. राज्य के होने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों से ठीक पहले हुई इस हत्या से आंध्र प्रदेश की जनता सदमे में है. विवेकानंद की हत्या ने आंध्र प्रदेश के सियासी हलकों और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी तथा कांग्रेस खेमे में सनसनी पैदा कर दी. इस हत्या से वे भी उतने ही सदमे में हैं, जितना कि विवेकानंद के परिवार वाले, क्योंकि कांग्रेस से उनके निकट संबंध थे. उनको नज़दीक से जानने वाले और मीडिया में उनके मित्र उन्हें एक विनम्र व्यक्ति के रूप में जानते हैं. विवेकानंद रेड्डी एसवी विश्वविद्यालय, तिरुपति से कृषि में स्नातक थे.

विवेकानंद की हत्या वाईएसआरसीपी के लिए एक बहुत ही बड़ा झटका है. इस हत्याकांड की वजह से एन चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देसम पार्टी और वाईएस जगनमोहन रेड्डी के बीच झगड़े और एक दूसरे पर दोषारोपण के एक नए सिलसिले को जन्म दिया है. इस मौत की गुत्थी अभी भी नहीं सुलझी है. ऐसे में इस बात की पूरी आशंका है कि आगामी चुनाव पर इस राजनीतिक हत्या का गहरा साया रहेगा.

जगनमोहन रेड्डी ने इस हत्या की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है और इस मामले की जांच के लिए एसआईटी के गठन की मांग भी की गई है. कुछ स्थानीय टीवी चैनल ने यह प्रचारित किया कि गंगी रेड्डी नामक एक व्यक्ति का विवेकानंद रेड्डी की हत्या में हाथ है और इन दोनों के बीच बेंगलुरु और अन्य स्थानों पर 130 करोड़ रुपये मूल्य की ज़मीन को लेकर विवाद था.

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वाईएसआर कांग्रेस के अध्यक्ष जगनमोहन रेड्डी ने राज्यपाल ईएसएल नरसिम्हन से मांग की है कि वे इस हत्या की जांच सीबीआई से कराएं. उन्होंने आरोप लगाया कि इस हत्या में मुख्यमंत्री का हाथ है.

हालांकि, आंध्र प्रदेश की सरकार ने इस मामले में एसआईटी गठित कर इसकी जांच करा रही है. चंद्रबाबू नायडू ने इस हत्या के लिए ज़िम्मेदार ठहराये जाने के कारण जगनमोहन रेड्डी को अपना निशाना बना रहे हैं. अपनी हर बैठक में आंध्र के मुख्यमंत्री बहुत संभलकर बयान देते हैं और बताते हैं कि कैसे जगनमोहन रेड्डी अपने चाचा की मौत को अपने फ़ायदे के लिए भुनाने जैसा अमानवीय कार्य कर रहे हैं. श्रीकाकुलम, नेल्लोर, प्रकाशम और गुंटूर में अपने राजनीतिक सभाओं में टीडीपी प्रमुख ने विवेकानंद की हत्या के लिए जगनमोहन रेड्डी को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि वह दोहरे मानदंड अपना रहे हैं. पहले यह बताया गया था कि विवेकानंद की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई पर शीघ्र ही इस बात की पुष्टि की गई कि बाथरूम में उनकी हत्या कर दी गई. वाईएसआरसीपी अब उनके लिए न्याय की मांग कर रहा है.
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चंद्रबाबू ने कई बार कहा है कि विपक्षी दल ने इस घटना पर पर्दा डालने की कोशिश की और हत्या के आरोप से बचाने के लिए सबूत बदल दिए. उन्होंने जगनमोहन रेड्डी पर आरोप लगाया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कहने पर सीबीआई जांच की मांग की है. मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि  मोदी राज्य में अपनी राजनीतिक फ़ायदे के लिए यहाँ कुछ चोरों और आपराधिक नेताओं को शह दे रहे हैं. उन्होंने चेतावनी दी और कहा कि राज्य सरकार अपराधी को सज़ा दिलाएगी. नायडू ने जगन के उस बयान पर अफ़सोस व्यक्त किया जिसमें उन्होंने चुनावी फ़ायदे के लिए उन पर इस हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया था.

मुख्यमंत्री और विपक्षी नेता विवेकानंद की हत्या पर अब राजनीति में उलझ चुके हैं. चंद्रबाबू इस हत्या के लिए जगनमोहन को ज़िम्मेदार ठहराते हैं जबकि जगनमोहन का कहना है कि चंद्रबाबू अपने विरोधियों के सफ़ाये के लिए जाने जाते हैं. जगनमोहन अपने दादा वाईएस राजा रेड्डी की हत्या और अपने पिता वाईएस राजशेखर रेड्डी के विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के लिए भी चंद्रबाबू को ज़िम्मेदार ठहरा चुके हैं.

प्राप्त सूचना के अनुसार, पुलिस विवेकानंद के फोन में संदेश और कॉल डिटेल्ज़ की पड़ताल कर रही है. कहा जाता है कि विवेकानंद रेड्डी की शादी वाइएस राजशेखर रेड्डी की मौत के बाद 2012 में शमीम शेख से हुई थी. विवेकानंद की हत्या के बार में एक और बात यह चल रही है कि कहीं उनकी दूसरी पत्नी शेख़ शमीम का हाथ तो नहीं है क्योंकि परिवार में ज़मीन को लेकर विवाद है.हालाँकि, विवेकानंद की पत्नी और बेटी ने शमीम के बारे में पुलिस से अभी कोई शिकायत नहीं की है. पर इस बात को ध्यान में रखकर भी मामले की जांच आगे बढ़ रही है.

ऐसा समझा जाता है कि 34 साल की शमीम बालापुनुर मंडल के सिम्हाद्रीपुरम की है और उन्होंने चेन्नई से बायोटेक्नोलोजी में स्नातकोत्तर किया है और अपने चार साल के बेटे के साथ कड़प्पा के प्रकाशनगर में रह रही हैं. विवेकानंद 8 अगस्त 1950 को पुलिवेंदुला (मद्रास राज्य) में पैदा हुए जो अब आंध्र प्रदेश में है. वह कड़प्पा जिले में लिंगला नहर का डिज़ाइन तैयार किया था और लायंस क्लब के ज़िला गवर्नर बनकर सामुदायिक  सेवा शुरू की. इसके बाद वह इसके समिति अध्यक्ष बने. विवेकानंद रेड्डी पुलिवेंदुला विधानसभा क्षेत्र से 1989 और 1994 में विधायक रहे. वर्ष 1999 में उन्होंने 90000 मतों से लोकसभा का चुनाव जीता और जबकि 2004 में वह 11000 मतों से लोकसभा की सीट जीतने में सफल रहे.

सितंबर 2009 में विधान परिषद का सदस्य बनने के बाद विवेकानंद रेड्डी 30 अक्टूबर 2010 को आंध्र प्रदेश विभाजन से पहले एन किरण कुमार रेड्डी की सरकार में कृषि मंत्री बने. वर्ष 2011 में,  वाईएसआर के छोटे भाई ने कांग्रेस छोड़ दिया और पुलिवेंदुला से उस समय चुनाव लड़े जब जगन रेड्डी और उनकी माँ वाईएस विजयम्मा ने वाईएसआरसीपी की स्थापना की. इसके बाद विवेकानंद रेड्डी ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा पर वाईएस विजयम्मा के ख़िलाफ़ वह बमुश्किल अपनी ज़मानत बचा पाए जिन्होंने यह चुनाव 80 हज़ार वोट से चुनाव जीत लिया.

अपने जीवन के अंतिम समय तक विवेकानंद सार्वजनिक जीवन में थे और अपने घर पहुंचने वाले लोगों की मदद करते थे. 15 मार्च 2019 को उनकी मौत सिर पर चाकुओं से हमले के कारण हुआ.

विवेकानंद रेड्डी 1999 से 2009 तक लोकसभा के सदस्य रहे और अपने भतीजे जगनमोहन रेड्डी के लिए उन्होंने यह सीट छोड़ दिया ताकि वे संसद पहुंच सकें. उनके बड़े भाई वाईएस राजशेखर रेड्डी इससे पहले संसद के सदस्य बने और विवेकानंद रेड्डी के बाद उनके भतीजे जगनमोहन रेड्डी सांसद बने. सार्वजनिक जीवन में उनका प्रवेश लायंस क्लब के जरिये हुआ और इसके बाद वे 1979 में एमएलसी बने और जगनमोहन रेड्डी के वाईएसआरसीपी बनाने के बाद उन्होंने उपचुनाव लड़ा.

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First published: March 20, 2019, 2:07 PM IST
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