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दिल्ली में 10 दिनों के लिए प्रदूषण इमरजेंसी, नियम तोड़ने वाले पर होगा लीगल एक्शन

न्यूज 18 क्रिएटिव

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सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) ने एक नवंबर से निर्माण जैसी कई गतिविधियों को प्रतिबंधित कर दिया है.

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    दिल्ली एनसीआर में गुरुवार को प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर पहुंचने के बाद कुछ इमरजेंसी उपाय लागू किए गए हैं. इसके साथ ही राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने निर्देश दिया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाएगी. जबकि दिल्ली सरकार ने कहा है कि निजी वाहनों को नियंत्रित करने के लिए 'ऑड-ईवन' योजना को लागू करने के लिए पूरी तरह से तैयार रहने की ज़रूरत है.

    राष्ट्रीय राजधानी में सुबह तेज हवा के चलते वायु गुणवत्ता 'गंभीर' से 'बेहद खराब' श्रेणी में पहुंच गई है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) ने एक नवंबर से निर्माण जैसी कई गतिविधियों को प्रतिबंधित कर दिया है. साथ ही अगले 10 दिनों के लिए सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने के लिए दिल्लीवासियों से आग्रह किया गया है. क्योंकि वायु की गुणवत्ता में और गिरावट की संभावना है.

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    प्राधिकरण के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में निजी वाहनों से 40 प्रतिशत प्रदूषण होता है. ईपीसीए ने लोगों से निजी वाहनों के उपयोग को कम करने और इस अवधि के दौरान पूरी तरह से डीजल वाहनों को रोकने का आग्रह किया है. दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में कुल 35 लाख निजी वाहन हैं.

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    एक ईपीसीए सदस्य ने मंगलवार को कहा था कि वायु गुणवत्ता में गिरावट के मामले में वे 1 नवंबर से निजी वाहनों के उपयोग को नियंत्रित करने पर भी विचार कर रहे हैं. इसके तहत दिल्ली सरकार ने बुधवार को था कहा कि वह इमरजेंसी को लागू करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं. इसपर दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा, 'दिल्ली सरकार ग्रेडियड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (जीआरपी) के अनुसार प्रदूषण कम करने के लिए बचाव संबंधी योजनाओं को लागू करने के लिए तैयार हैं. इसमें ऑड-ईवन योजना भी शामिल है.'

    वर्ष 2016 में भी ऑड-ईवन योजना को दो बार 1 से 15 जनवरी और 15 से 30 अप्रैल के बीच लागू किया गया था. जीआरपी शहर की बिगड़ी वायु गुणवत्ता से निपटने के लिए एक इमरजेंसी योजना है. इसे 15 अक्टूबर से लागू किया गया था. वहीं दिल्ली मेट्रों ने घोषणा की है कि उसने बुधवार से अपने नेटवर्क पर 21 अतिरिक्त ट्रेनें चलाई हैं. जिससे सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करके प्रदूषण के स्तर को कम करने में सहयोग मिलेगा.

    ईपीसीए ने सार्वजनिक रूप से आह्वान किया है कि मंगलवार को प्रदूषण का स्तर गंभीर पहुंचाने के साथ ही पिछले दो हफ्तों में शहर की वायु गुणवत्ता में गिरावट आई है. जिसके कारण अधिकारियों ने 1 से 10 नवंबर के बीच में कोयले और बायोमास का उपयोग करने वाले उद्योगों और निर्माण कार्य को बंद करने संबंधित कई दिशा निर्देश जारी किए हैं.

    दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड डीपीसीसी के आदेश के अनुसार गुरुवार से खुदाई सहित सभी निर्माण कार्य की रोकथाम होगी. दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण पैदा करने वाले सभी तरह के निर्माण कार्य बंद रहेंगे और आसपास के क्षेत्रों में भी निर्माण बंद रहेगा. डीपीसीसी ने परिवहन विभाग और यातायात पुलिस को वाहनों के प्रदूषण की जांच करने और दिल्ली एनसीआर में बाहर से आने वाले वाहनों को नियंत्रित करने का निर्देश दिया है.

    ईपीसीए ने बुधवार को कहा, 'हमें सुनिश्चित करना है कि कचरे को जलाया तो नहीं जा रहा है और प्रदूषण के सभी मामलों की भी गहनता से जांच करनी चाहिए.'

    केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के राज्य प्रदूषण नियंत्रण निकायों को वायु प्रदूषण की जांच के लिए निर्देशों का पालन नहीं करने वाले लोगों या एजेंसियों के खिलाफ आपराधिक मामले चलाने के निर्देश दिए हैं. बुधवार को दिल्ली की कुल वायु गुणवत्ता सूचकांक सीपीसीबी द्वारा 366 पर दर्ज की गई थी.

    केन्द्र संचालित 'सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी फॉर कास्टिंग एंड रिसर्च' (सफर) के एक अधिकारी ने बताया कि सुबह तेज हवा का चलना वायु गुणवत्ता में सुधार का कारण हो सकता है. अधिकारी ने बताया, 'सुबह हवा की रफ्तार तेज थी. यह राहत बनकर आई. इससे प्रदूषक कण तेजी से बिखरे और वायु गुणवत्ता नाजुक से बेहद खराब श्रेणी की हो गई.'

    मंगलवार को इस मौसम की सबसे खराब वायु गुणवत्ता दर्ज की गई थी और प्रदूषण स्तर 401 के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया. जिसके कारण अधिकारियों ने निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध के अलावा कोयला और बायोमास ईंधन से संचालित उद्योगों में कामकाज पर एक नवंबर से 10 नवंबर तक रोक लगा दी.

    वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) शून्य से 50 को 'अच्छा' माना जाता है जबकि 51 से 100 को 'संतोषजनक', 101 एवं 200 को 'सामान्य', 201 एवं 300 को 'खराब', 301 एवं 400 को 'बेहद खराब' और 401 एवं 500 को 'गंभीर' माना जाता है. राजधानी में प्रदूषण स्तर के बिगड़ने का सिलसिला जारी रहने पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण निजी वाहनों के इस्तेमाल को नियंत्रित करने पर विचार कर रहा है. बुधवार को हवा में घुले हुए अतिसूक्ष्म प्रदूषक कण पीएम 2.5 को 215 दर्ज किया गया. पीएम 10 की तुलना में ये कण स्वास्थ्य के लिए अधिक खतरनाक होते हैं.

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