बेंगलुरु: गरीबों और अप्रवासी मजदूरों के सामने भोजन का संकट

बेंगलुरु में गरीबों के सामने लॉकडाउन के दौरान भोजन का गंभीर संकट रहा. (प्रतीकात्मक तस्वीर-AP)
बेंगलुरु में गरीबों के सामने लॉकडाउन के दौरान भोजन का गंभीर संकट रहा. (प्रतीकात्मक तस्वीर-AP)

एक नए सर्वे (New Survey) के मुताबिक लॉकडाऩ के दौरान बेंगलुरु में अप्रैल और मई के दौरान गरीब लोगों को रोजगार की दिक्कतों के साथ भोजन की परेशानी से बड़े स्तर पर जूझना पड़ा.

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  • Last Updated: June 24, 2020, 11:05 AM IST
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बेंगलुरु. दक्षिण भारतीय राज्य कर्नाटक (Karnataka) की राजधानी बेंगलुरु (Bengaluru) में गरीबों को लंबे लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान भोजन के लिए बुरी तरह से जूझना पड़ रहा है. एक नए सर्वे के मुताबिक लॉकडाऩ के दौरान बेंगलुरु में अप्रैल और मई के दौरान गरीब लोगों को रोजगार की दिक्कतों के साथ भोजन की परेशानी से बड़े स्तर पर जूझना पड़ा. सर्वे के मुताबिक असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले स्थानीय और अप्रवासी मजदूरों पर इसका सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ा. समाज के इस तबके के पास कैश की कमी के साथ-साथ भोजन का संकट भी खड़ा हो गया था.

सार्वजनिक वितरण प्रणाली से नहीं मिल पाई मदद
हालांकि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिए गरीबों के एक बड़े तबके के पास खाने-पीने के सामान की आपूर्ति जारी रही, लेकिन अन्य राज्यों के मजदूरों को इसका लाभ नहीं मिल पाया. लॉकडाउन होने के एक हफ्ते के भीतर ही राज्य सरकार ने इंदिरा कैंटीन में फ्री खाने के जरिए गरीबों तक मदद पहुंचाने की कोशिश की थी. लेकिन महज एक हफ्ते के भीतर ही इस निर्णय को वापस ले लिया गया. कहा गया कि इस स्कीम का दुरुपयोग भी किया जा सकता है.

एनजीओ और अन्य संस्थाओं द्वारा वितरित खाद्य सामग्री पर निर्भरता
ऐसी स्थिति में लोगों के पास एनजीओ और अन्य संस्थाओं द्वारा वितरित की जा रही भोजन सामग्री पर निर्भर रहने के अलावा कोई विकल्प नहीं मौजूद था. फर्स्टपोस्ट पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक कई जगहों पर स्थानीय और अप्रवासी मजदूरों के पास दूसरे टाइम के भोजन तक की व्यवस्था नहीं थी. पीडीएस सिस्टम को लेकर भी शिकायतें की गईं कि अनाज खराब क्वालिटी का उपलब्ध कराया गया.



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रिपोर्ट में कई लोगों से बातचीत के आधार पर बताया गया है कि आखिर कैसे उन्हें लॉकडाउन के दौरान खाने-पीने के सामान के लिए जूझना पड़ा.

कर्नाटक की हुई है तारीफ
हालांकि कर्नाटक की कोरोना की रोकथाम के लिए काफी तारीफ भी की गई है. येदियुरप्पा सरकार ने कोरोना के मामलों को नियंत्रित रखा है. इसके लिए नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कर्नाटक की कोरोना के खिलाफ प्रयासों के लिए तारीफ की है. उन्होंने बताया है-अन्य महानगरों के मुकाबले बेंगलुरु में प्रति दस लाख पर कोरोना संक्रमण के मामले काफी कम हैं. हर कंफर्म केस के लिए राज्य में 47 लोगों की औसत ट्रेसिंग की गई. दिल्ली में ये आंकड़ा 2.1 है.

अब तक राज्य में कोविड-19 के कुल 9721 मामले सामने आए हैं. इनमें 6004 स्वस्थ हो चुके हैं और एक्टिव केस की संख्या 3567 है. राज्य में कोरोना की वजह से 150 लोगों ने जान गंवाई है.
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