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स्टडी में बड़ा खुलासा, भारत में ऐसे लोगों को कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा ज्यादा

इन 227 समूहों में 1600 से अधिक लोगों के उच्च घनत्व वाले जीनोमिक डेटा की जांच की गई. (फाइल फोटो)

इन 227 समूहों में 1600 से अधिक लोगों के उच्च घनत्व वाले जीनोमिक डेटा की जांच की गई. (फाइल फोटो)

मुख्य आबादी से अलग-थलग पड़ी आबादी के बीच संक्रमण (Corona Infection) के जोखिम को पता करने के लिए 227 समूहों पर जीनोमिक डेटा का इस्तेमाल किया गया. इसमें कई लोग कोविड-19 (Covid-19) के प्रति अधिक संवेदनशील पाए गए.

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    नई दिल्ली: पहले की तुलना में देश में कोरोना वायरस के संक्रमण (Coronavirus Infection) की दर में काफी गिरवाट आई है लेकिन त्योहारों के मौसम में अभी भी संक्रमण का खतरा बना हुआ है. इस बीच कोरोना वायरस को लेकर एक रिसर्च में बड़ा खुलासा हुआ है. काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी हैदराबाद (CSIR-CCMB) और वाराणसी स्थित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने एक अध्ययन में यह पाया है कि देश में अभी भी उस आबादी को कोरोना वायरस का सबसे ज्यादा खतरा बना हुआ है जो अलग-अलग जगहों पर बिखरी हुई है.

    हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक शोधकर्ताओं ने पाया उदारहण के तौर पर यह भी बताया कि देश में आदिवासी जनजातियां जैसे ओन्गे और जरावा जैसी जनजातियों को कोरोना का खतरा बना हुआ है. ये दोनों ही जनजातियां भारत की मुख्य भूमि की आबादी से अलग थलग हैं. सामान्यतया ये आबादी अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में पाई जाती है.

    227 समूहों पर हुआ अध्ययन
    सीएसआईआर के कुमारसामी थंगराज के साथ शोध करने वाले बीएचयू के प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे ने कहा कि अलग थलग आबादी के बीच कोविड-19 के संक्रमण को रोकने के प्रयास पर भी कुछ समस्याएं सामने आ सकती हैं. उन्होंने बताया कि अलग थलग पड़ी आबादी के बीच संक्रमण के जोखिम को पता करने के लिए 227 समूहों पर जीनोमिक डेटा का इस्तेमाल किया गया. इसमें कई लोग कोविड-19 के प्रति अधिक संवेदनशील पाए गए.

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    एचटी के मुताबिक इन 227 समूहों में 1600 से अधिक लोगों के उच्च घनत्व वाले जीनोमिक डेटा की जांच की गई. इनमें से, ओन्गे और जरावा जनजातियों के बीच कोविड-19 जोखिम की दर अधिक पाई गई. अध्ययन में कहा गया है कि ये निवासी संरक्षित क्षेत्रों में रहते हैं और आम जनता को उनके साथ बातचीत करने की अनुमति नहीं है इसलिए वायरस का खतरा काफी कम रहता है लेकिन, द्वीपवासियों के बीच मामलों की संख्या को देखने के बाद, यह कहा जा सकता है कि वे मुख्य रूप से अवैध तरीकों से द्वीप में आए लोगों और स्वास्थ्य कर्मियों से के संपर्क में आने से संक्रमण के जोखिम में हैं.

    स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक गुरुवार को केंद्र शासित प्रदेश अंडमान और निकोबार में दो और कोरोना के नए पॉजिटिव मामले सामने आए. जिसके बाद यहां कोरोना से संक्रमित होने वालों की कुल संख्या 7637 हो गई. अब तक कुल 7499 लोग कोविड से पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं.

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