आर्टिकल 370 हटने के बाद कश्मीर के इस इलाके में आतंकवाद बढ़ने की आशंका

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Updated: August 22, 2019, 6:08 PM IST
आर्टिकल 370 हटने के बाद कश्मीर के इस इलाके में आतंकवाद बढ़ने की आशंका
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर में आतंक में बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद जताई है (सांकेतिक फोटो)

वर्तमान स्थिति में पुलिस अफसरों को आशंका है कि जिहादियों (Jihadis) की घुसपैठ (Infiltration) में बढ़ोतरी होगी. हालांकि, सेना (Security Forces) का कहना है कि वे आतंकवाद (Militancy) को बढ़ने नहीं देंगे.

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(आकाश हसन)

इस साल जनवरी में, पुलिस ने बारामूला (Baramula) को कश्मीर (Kashmir) का पहला "आतंकवाद-मुक्त" क्षेत्र (Militancy Free Area) घोषित किया था. कहा गया था कि जिले में अब कोई स्थानीय आतंकवादी (Local Terrorist) सक्रिय नहीं है. हालांकि, कुछ महीनों के भीतर हिंसक उग्रवाद (Violent Insurgency) फिर से दिखाई देने लगा.

आर्टिकल 370 (Article 370) और आर्टिकल 35ए हटने के बाद 5 अगस्त से कश्मीर (Kashmir) के कई हिस्से बंद हैं. इस सप्ताह अधिकारियों ने 20 दिनों से अधिक समय के बाद अपना पहला आतंकवाद-विरोधी अभियान चलाया. जम्मू-कश्मीर पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और सेना की एक संयुक्त टीम ने उत्तरी कश्मीर के बारामूला में देर रात ऑपरेशन को अंजाम देने के बाद लश्कर-ए-तैयबा (LTE) के एक आतंकी को मार गिराया.

पाक जिहादियों से ज्यादा हुई, स्थानीय उग्रवादियों की संख्या

20 वर्षीय आतंकी, मोमिन रसूल गोजरी ने एक महीने पहले हथियार उठाया था. वह यहीं का निवासी था. एक अधिकारी ने News18 को बताया कि साल 1997 के बाद से बारामूला ओल्ड टाउन (Baramula Old Town) में यह पहला सफल ऑपरेशन रहा.

सालों से अधिकांश आतंकवादी दक्षिण कश्मीर में सक्रिय रहे हैं, लेकिन लगभग तीन सप्ताह के अंतराल के बाद यह ऑपरेशन उत्तरी कश्मीर में हुआ.

दक्षिणी क्षेत्रों में उग्रवाद साल 2010 से बढ़ रहा है. स्थानीय उग्रवादियों की संख्या पाकिस्तानी जिहादियों को संख्या से ज्यादा हो गई है. पिछले तीन वर्षों में 500 से अधिक आतंकी मारे गए हैं.
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दक्षिण से उत्तर कश्मीर की ओर आतंक के बढ़ने की आशंका
संविधान के अनुच्छेद 370 में संशोधन और जम्मू-कश्मीर राज्य के पुनर्गठन के बाद उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के बाद पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अब ऐसा लग रहा है कि मानों आतंकवाद दक्षिण से उत्तरी कश्मीर की ओर आ रहा है.

करीब एक दशक से जवाबी कार्रवाई का हिस्सा रहे एक सीनियर पुलिस अफसर ने कहा, "हो सकता है यह ट्रेंड उल्टी दिशा में लौट जाए. 1990 में जब आतंकी गतिविधियों की शुरुआत हुई थी तो यह ज्यादातर उत्तरी कश्मीर के इलाकों में ही हावी था."

एक अफसर ने News18 से कहा, "हमें हमेशा लोगों की सहने की क्षमता को ध्यान में रखना चाहिए. जहां पर आतंकवादी सक्रिय हैं और जहां हमेशा जवाबी कार्रवाई चलती रहती हैं, वहां की हालत बहुत खराब रहती है, अर्थव्यवस्था (Economy) को नुकसान पहुंचता है और अपराध की घटनाओं में भी बढ़ोतरी होती है."

पुराने बारामूला इलाके में सुरक्षाबल 1997 के बाद से ही एक भी ऑपरेशन को सफलता से अंजाम नहीं दे सके. (फाइल फोटो)


1997 से इस इलाके में सफल नहीं हो सका है एक भी ऑपरेशन
अफसरों (पुलिस) को आशंका है कि अलग-अलग क्षेत्रों में आतंकवाद की स्थिति अलग-अलग वक्त में बदलती रहती है. जैसे केंद्र के इस फैसले के बाद से कश्मीर की स्थिति तनावपूर्ण थी, लेकिन वहां कोई भी जवाबी कार्रवाई नहीं हुई.

इन कार्रवाईयों का हिस्सा रहे एक सीनियर पुलिस अफसर ने कहा कि हमें आतंकियों के मौजूद होने की जानकारी मिली थी और हमने मंगलवार की शाम करीब 07:50 बजे ऑपरेशन शुरू किया. सेना के सामने कई सारी चुनौतियां होती हैं. घाटी में परिस्थितियां खतरनाक हैं और सूत्रों का कहना है कि इस इलाके में 1997 से ही एक भी ऑपरेशन (Operation) सफल नहीं रहा है.

पुराने शहर में ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों को निशाना बनाते हैं स्थानीय पत्थरबाज
बारामूला का पुराने शहर का इलाका सुरक्षाबलों के लिए कठिनाई भरा रहा है. अफसर बताते हैं, "हम जब भी कोई ऑपरेशन लॉन्च करते हैं, हमें स्थानीय युवाओं की ओर से पत्थरबाजी (Stone Pelting) का सामना करना पड़ता है, जो हमारे लिए ऑपरेशन पूरा करना बहुत मुश्किल बना देता है." उन्होंने यह भी कहा, "पिछले कुछ सालों में ऐसे बहुत से ऑपरेशन आम नागरिकों की जान को होने वाले खतरे को देखते हुए कैंसिल करने पड़े हैं."

पुराना शहर, झेलम के किनारे पर बसा एक भीड़भाड़ वाला इलाका है, जहां पर पुराने-जर्जर मकान और पतली-पतली गलियां हैं. पुलिस ने यहां चलाए जा रहे ऑपरेशन के बारे में बताया कि जैसे ही एक आतंकी को सुरक्षाबल के जवान ने एक घर में घेरा, उसने दो ग्रेनेड उछाल दिए. जिसमें सुरक्षा बलों के दो लोग, जिनमें एक अफसर भी था, घायल हो गए. उनमें से एक SPO बिलाल अहमद ने चोटों के चलते दम तोड़ दिया और सब-इंस्पेक्टर अमरदीप परिहार अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं.

हालांकि सेना ने कहा है कि वह आतंकियों को उत्तरी कश्मीर में जड़ें नहीं जमाने देगी (सांकेतिक फोटो)


आसानी से आतंकविरोधी ऑपरेशन को अंजाम दे पा रहे हैं सुरक्षाबल
फिलहाल चल रही शांति को देखकर माना जा रहा है कि घाटी में आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन रोक दिए गए हैं. लेकिन पुलिस ने इससे इंकार किया है. एक अफसर ने कहा, ''ऑपरेशन रोके नहीं गए हैं. बल्कि सुरक्षाबल कानून और व्यवस्था बनाए रखने में व्यस्त हैं और यही वजह है कि फिलहाल कोई ऑपरेशन नहीं हो रहा है."

गोलियां चलने से तीन घरों को नुकसान हुआ है और सुरक्षाबलों को स्थानीय युवाओं की ओर से पत्थरबाजी का सामना भी करना पड़ा है. लेकिन क्योंकि संचार व्यवस्था इस इलाके में 5 अगस्त से ही बाधित है. इस एनकाउंटर की जानकारियां आसपास नहीं फैलीं और वे आसानी से इस एनकाउंटर को अंजाम दे सके.

जिहाद की घटनाओं में और बढ़ोतरी की आशंका, लेकिन कानून से मदद मिलने का भरोसा
इन परिस्थितियों के साथ, पुलिस अफसरों को यह भरोसा भी है कि जिहादियों की घुसपैठ की घटनाओं में अब और बढ़ोतरी होगी.

एक अफसर (पुलिस) ने कहा, "दक्षिणी कश्मीर में पहले से ही स्थितियां खराब हैं और जब और ज्यादा आतंकी घाटी में घुसेंगे तो वे उत्तरी कश्मीर के आस-पास आने की कोशिश भी करेंगे."

हालांकि सेना का कहना है कि वे उत्तरी कश्मीर में आतंकवाद को वैसे जड़ें नहीं जमाने देंगे, जैसे इसने अपनी जड़ें दक्षिणी कश्मीर में जमा रखी हैं.

इस वक्त, कानून बहुत ही ज्यादा कड़े हो चुके हैं. एक अफसर ने कहा, UAPA कानून में हुए संशोधन के साथ हम हम जमीन पर काम कर रहे आतंकियों से और भी कड़ाई से निपट सकते हैं.

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First published: August 22, 2019, 5:37 PM IST
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