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बिजली संकट की दहलीज पर खड़ी दिल्ली, विपक्ष कर रहे सवाल कब नींद से जागे केजरीवाल

बिजली संकट की दहलीज पर खड़ी दिल्ली, विपक्ष कर रहे सवाल कब नींद से जागे केजरीवाल

कोयले की क‍िल्‍लत का बड़ा असर आने वाले समय में बिजली के उत्‍पादन पर पड़ेगा. (File pic)

कोयले की क‍िल्‍लत का बड़ा असर आने वाले समय में बिजली के उत्‍पादन पर पड़ेगा. (File pic)

Power Cut in Delhi: दिल्ली में संभावित बिजली संकट पर अब राजनीति भी शुरू हो गई है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चौधरी अनिल कुमार (Chaudhary Anil Kumar) ने कहा है कि दूसरे राज्यों की राजनीति में व्यस्त अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) दिल्ली की समस्याओं से बेपरवाह हैं, क्योंकि दिल्ली में बिजली संकट की जानकारी उन्हें बिजली कम्पनियों द्वारा मिली है, जबकि दिल्लीवासी काफी लंबे समय से ही बिजली संकट झेल रहे हैं.

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नई दिल्ली. दिल्ली में बिजली संयत्रों के लिए कोयले का स्टॉक (Coal Shortage) खत्म होने की खबर पर केजरीवाल सरकार (Kejriwal Government) ने बड़ा बयान दिया है. दिल्ली के ऊर्जा मंत्र सत्येंद्र जैन (Satyendra Jain) ने कहा, ‘देश में थर्मल पॉवर प्लांट में कोयले की कमी आई है, जिसकी वजह से बिजली उत्पादन कम हुआ है. दिल्ली में कोयले से बिजली उत्पादन नहीं होता है. दूसरे राज्यों के पॉवर प्लांट से दिल्ली में अधिकतम बिजली आपूर्ति की जाती है.’ दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी इस सिलसिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है. इधर, इस मुद्दे पर अब विपक्षी पार्टियां केजरीवाल सरकार पर हमलावर हो गई है. दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष चौधरी अनिल कुमार ने कहा है कि दूसरे राज्यों की राजनीति में व्यस्त केजरीवाल दिल्ली की समस्याओं से बेपरवाह हैं, क्योंकि दिल्ली में बिजली संकट की जानकारी उन्हें बिजली कम्पनियों द्वारा मिली है, जबकि दिल्लीवासी काफी लंबे समय से बिजली संकट झेल रहे हैं.

हालांकि एक तरह केजरीवाल सरकार के मंत्री दिल्ली में बिजली की किल्लत से इंकार कर रहे हैं तो दूसरी तरफ केंद्र सरकार से अपील कर रहे हैं कि रेलवे वैगन का इंतजाम किया जाए, जल्द से जल्द कोयले को पावर प्लांट तक पहुंचाया जाए. जैन ने कहा है कि केजरीवाल सरकार कोशिश कर रही है कि किसी भी तरह बिजली खरीद कर दिल्ली में पर्याप्त आपूर्ति की जाए.

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कोयला संकट से आने वाले दिनों में दिल्ली में बिजली की कटौती हो सकती है. (सांकेतिक तस्वीर)

दिल्ली में बिजली समस्या आने वाली है?
बता दें दिल्ली सरकार ने कहा है कि देश में थर्मल पॉवर प्लांट में कोयले की कमी आई है. जिसकी वजह से बिजली उत्पादन कम हुआ है. दिल्ली में कोयले से बिजली उत्पादन नहीं होता है. दूसरे राज्यों के पॉवर प्लांट से दिल्ली में अधिकतम बिजली आपूर्ति की जाती है.‌ केंद्र सरकार से दिल्ली सरकार अपील करती है कि रेलवे वैगन का इंतजाम किया जाए और जल्द से जल्द कोयले को पावर प्लांट तक पहुंचाया जाए. दिल्ली सरकार कोशिश कर रही है कि किसी भी तरह बिजली खरीद कर पर्याप्त आपूर्ति की जाए.

केजरीवाल सरकार का क्या है प्लान
जैन ने मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘देश में बिजली की मांग काफी कम है. इसके बाद भी पॉवर प्लांट बिजली का उचित उत्पादन नहीं कर पा रहे हैं. दिल्ली में कोयले से बिजली का उत्पादन नहीं किया जाता है. दिल्ली के बाहर स्थित पॉवर प्लांट से दिल्ली में अधिकतम बिजली आपूर्ति की जाती है. ज्यादातर बिजली केंद्र सरकार के एनटीपीसी से खरीदी जाती है, जहां कोयले का भंडार कम से कम एक महीने का रखना होता है, जो घट कर एक दिन का ही रह गया है. इसके अलावा ज्यादातर पावर प्लांट अपनी 100 फीसद क्षमता पर नहीं चल रहे हैं.

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दिल्ली में कोयले से बिजली का उत्पादन नहीं किया जाता है. (File pic)

केजरीवाल सरकार ने केंद्र से क्या अपील की है
सत्येंद्र जैन ने कहा कि केंद्र सरकार से दिल्ली सरकार अपील करती है कि रेलवे वैगन का इंतजाम किया जाए और जल्द से जल्द कोयले को इन पॉवर प्लांट तक पहुंचाया जाए और कम से कम एक महीने का भंडार सुनिश्चित किया जाए. साथ ही देश के सभी पॉवर प्लांट को उनकी 100 फीसद क्षमता पर चलाया जाए.

विपक्ष क्यों केजरीवाल पर हमलावर हो गई है?
कांग्रेस पार्टी क प्रदेश अध्यक्ष चौ0 अनिल कुमार ने कहा है कि अगस्त/सितम्बर से जब बिजली कम्पनियां कोयला संकट से जूझ रही है और 10-20 दिनों तक कोयला बिजली उत्पन्न करने के लिए भंडार करके रखना जरुरी है, तब अरविन्द केजरीवाल ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखने में कोयला समाप्ति की कगार पर आने का इंतजार क्यों किया? उन्होंने कहा कि यह पहला मौका नही है जब मुख्यमंत्री केजरीवाल के कुप्रबंधन और असफल प्रशासन का प्रदर्शन सामने आया हो, इससे पहले भी कोविड काल में केजरीवाल का निक्कमापन दिल्ली वासी देख चुके है.

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केंद्र सरकार का कहना है कि हमारे पास कोयले का पर्याप्‍त भंडार मौजूद है.

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बता दें कि दिल्ली में बिजली संकट का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि दिल्ली के गैस आधारित पावर प्लांट जिन्हें वैकल्पिक तौर पर पूरी क्षमता से इस्तेमाल किया जा सकता था उनके पास भी 1-2 दिनों का ईंधन भी पूरा नही है, जबकि दिल्ली में बिजली सप्लाई के लिए जो थर्मल पावर जेनेरेटिंग प्लांट से आपूर्ति की मुख्य तौर पर जाती है उनमें से अधिकांश के पास 1-2 दिनों से भी कम कोयले का स्टॉक बचा है और बिजली वितरण कम्पनियों ने उपभोक्ताओं को बिजली कट के मोबाईल पर संदेश भेज रही है, उसके बाद केजरीवाल नींद से जागे है, जो पूरी तरह से दिल्ली के प्रति असंवेदनशीलता को उजगार करता है।

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