हर तीन माह में अपने मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड लेंगे पीएम नरेंद्र मोदी!

हर तीन माह में अपने मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड लेंगे पीएम नरेंद्र मोदी!
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल में आज होगी मंत्रिपरिषद की पहली बैठक (File Photo)

रिजल्ट न दे पाने वाले मंत्रियों पर गिर सकती है गाज, सरकार की मंशा ये है कि योजनाएं फाइलों की जगह जमीन पर उतरें, जनता को मिले लाभ!

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मंगलवार को दिन भर कृषि मंत्रालय के अधिकारी अपने विभाग के मंत्रियों को प्रजेंटेशन देते रहे कि खेती-किसानी को कैसे आसान बनाया जाएगा. किसानों की आय कैसे बढ़ेगी. अन्य मंत्रालयों में भी इसी तरह की माथापच्ची चलती रही. टारगेट तय करके उस पर काम करने का रोडमैप बनता रहा. वजह यह है कि यह सरकार अलग स्टाइल में चल रही है, जिसमें मंत्रियों को रिजल्ट देना है, वरना उनकी छुट्टी भी हो सकती है. पीएम नरेंद्र मोदी खुद कारपोरेट स्टाइल में हर तीन माह में अपने मंत्रियों के काम की समीक्षा करेंगे.

दूसरी ओर प्रधानमंत्री कार्यालय प्रतिदिन के कामकाज के आधार पर मंत्रालयों के प्रदर्शन की रिपोर्ट तैयार करेगा, ताकि जनता के लिए जो योजनाएं तैयार की जा रही हैं उसका लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे. कोई योजना फाइल में दबी न रहे.  प्रधानमंत्री की निगाह खासतौर पर उन मंत्रालयों पर है जिन पर 2022 तक अहम योजनाओं को जमीन पर उतारकर जनता को लाभ देने की जिम्मेदारी है. पीएम ने कई बड़ी योजनाओं को 2022 तक ही पूरा करने का लक्ष्य रखा है. इसी साल आजादी की 75वीं वर्षगांठ है.

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2022 तक इन योजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य



इस साल तक मोदी ने जिन योजनाओं को पूरा करने का टारगेट रखा हुआ है उनमें किसानों की आय दोगुनी करना सबसे अहम है. इसके अलावा सबको पक्का घर देने की भी योजना शामिल है. पीएम ने वादा किया था कि साल 2022 तक देश में सबको पक्का घर मिल जाएगा. सभी गांवों तक सरकार बिजली पहुंचा चुकी है, अब सभी घरों तक पहुंचाने का लक्ष्य है. बताया गया है कि तय मानक पर खरा न उतरने वाले मंत्रियों पर गाज गिर सकती है.

मंत्रिपरिषद की बैठक में क्या हुआ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दूसरे कार्यकाल में मंत्रिपरिषद की पहली बैठक को संबोधित करते हुए बुधवार को मंत्रियों से कहा कि वे समय पर ऑफिस पहुंचें. घर से काम करने वाले कल्चर से बचकर लोगों के लिए उदाहरण पेश करें.  कुछ मिनट का वक्त निकालकर अधिकारियों के साथ मंत्रालय के कामकाज की जानकारी लें. साथ ही उन्हें पार्टी सांसदों और जनता से भी मिलते रहना चाहिए. मंत्री अपने-अपने राज्य के सांसदों के साथ मुलाकात के जरिए यह सिलसिला शुरू कर सकते हैं. पीएम मोदी ने इस पर भी जोर दिया कि एक मंत्री और सांसद में बहुत फर्क नहीं है. पीएम मोदी ने इससे पहले सोमवार को सभी मंत्रालयों के सचिवों की बैठक करके सरकार के टारगेट की जानकारी दी थी.

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