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OPINION: विवादित बयानों से बीजेपी के लिए मुसीबत बन गई हैं प्रज्ञा ठाकुर

News18Hindi
Updated: November 28, 2019, 8:49 AM IST
OPINION: विवादित बयानों से बीजेपी के लिए मुसीबत बन गई हैं प्रज्ञा ठाकुर
प्रज्ञा ठाकुर के विवादित बोल

भाजपा (BJP) के शीर्ष नेतृत्व द्वारा लगातार चेतावनी देने के बावजूद प्रज्ञा सिंह ठाकुर (Pragya Singh Thakur) के विवादित बयानों का सिलसिला थम नहीं रहा है.

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  • Last Updated: November 28, 2019, 8:49 AM IST
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(सुनील)

जब पूरा देश इस वक्त राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का 150वीं जयंती वर्ष (Mahatma Gandhi 150 Birth Anniversary) मना रहा है, तभी गांधी नाम, उनके विचार, उनके दर्शन का सबसे ज्यादा अपमान किया जा रहा है. उनके हत्यारे नाथूराम गोडसे (Nathuram Godse) को महिमा मंडित करने के सुनियोजित षड्यंत्र किए जा रहे हैं.

देशवासियों के सामने से अजीब सी भ्रमित करने वाली तस्वीर है. केंद्र में सत्तारूढ़ मोदी सरकार पूज्य बापू के 150वें जयंती वर्ष को स्वच्छता अभियान के रूप में मना रही है. गांधी जी के दर्शन, उनके विचार पूरे देश में प्रचारित, प्रसारित किए जा रहे हैैं. मोदी जी स्वयं पूरी दुनिया में जहां भी जा रहे हैं, वहां गांधी गान, गांधी दर्शन का बखान कर गांधी प्रतिमाओं के सामने नमन कर रहे हैं. वहीं भाजपा के कुछ अतिवादी नेता गांधी के देश में ही गांधी का अपमान कर रहे हैं. बापू के विचारों-दर्शन सब पर पलीता लगा रहे हैं. गोडसे के विचारों के भक्त सोशल मीडिया पर गांधी की कुछ खास तस्वीरों को दिखाते हुए आपत्तिजनक टिप्पणी कर रहे हैैं.

लोकसभा में प्रज्ञा का विवादित बयान

पहले उदाहरण के रूप में बात करते हैं अतिवादी साध्वी, भोपाल से भाजपा की सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर की, जो एक के बाद एक विवादित बयानों की वजह से अपनी पार्टी (भाजपा) के लिए बड़ी मुसीबत बनती जा रही हैं. प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने एक बार फिर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताया है, लेकिन इस बार यह बयान सड़क पर नहीं, बल्कि संसद में दिया है. यह वही बयान है, जो पहली बार भोपाल लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ते हुए प्रज्ञा ठाकुर ने दिया था. आगर-मालवा नामक एक इलाके में उस वक्त प्रज्ञा ने कहा था कि 'नाथूराम गोडसे देशभक्त थे, देशभक्त हैं और देशभक्त रहेंगे'. बयान पर खूब बवाल मचा. भाजपा की काफी छीछालेदर के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नाराजगी सामने आई. मोदीजी ने तल्ख लफ्ज़ों में कहा था कि गोडसे को देशभक्त कहने वाली साध्वी प्रज्ञा को वह दिल से कभी माफ नहीं कर पाएंगे.

प्रज्ञा 2008 के मालेगांव मस्जिद ब्लास्ट की आरोपी हैैं.


सलाहकार समिति में प्रज्ञा
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हालांकि अब प्रज्ञा ठाकुर को देश की रक्षा मंत्रालय की 21 सदस्यीय सलाहकार समिति में रखा गया है. यह समिति देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले जवानों, सुरक्षा, सेना की संवेदनशील आवश्यकताओं पर मंथन कर अपनी सिफारिशें देती है. इस महत्वपूर्ण समिति में आतंकवाद की एक आरोपी को स्थान मिलना सरकार की सोच, समझ, कथनी, करनी को लेकर कई सवाल खड़े करता है. बता दें कि प्रज्ञा 2008 के मालेगांव मस्जिद ब्लास्ट की आरोपी हैैं. एनआईए में केस चल रहा है. बीमारी के आवेदन पर जमानत पर सीखचों से बाहर हैं.

बुधवार को लोकसभा में गोडसे को देशभक्त बताने वाला प्रज्ञा का बयान तब आया, जब एसपीजी कानून को लेकर एक संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान ए राजा सदन में कि महात्मा गांधी हत्याकांड में गोडसे का अदालत में दिया बयान पढ़ रहे थे. तभी साध्वी प्रज्ञा ने हस्तक्षेप करते हुए गोडसे को देशभक्त बताया. साध्वी के ये कहते ही सदन में हंगामा हो गया.

प्रज्ञा के विवादित बोल
ये कोई पहली बार नहीं है, जब प्रज्ञा ने गांधी पर प्रहार किया हो, पार्टी को मुश्किलों में डाला हो. लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा की प्रत्याशी प्रज्ञा का पहला विवादित बयान सामने आया था, जब उन्होंने कहा था कि '26/11 के मुंबई हमले में मारे गए पुलिस अफसर हेमंत करकरे की मौत मेरे श्राप से हुई थी. उसने मुझे बहुत टॉर्चर किया था.'

प्रज्ञा की ऐसी अभद्र भाषा की जमकर आलोचना हुई थी. उसके बाद गोडसे को देशभक्त बताने वाला बयान आया, फिर सीहोर में स्वच्छता अभियान को लेकर सवाल के जवाब में प्रज्ञा ने कहा था कि मैं टॉयलेट, नाली की सफाई कराने के लिए सांसद नहीं बनी हूं. ये जिसका काम है वो करे. यहां ये बताना जरूरी है कि मोदी जी स्वयं झाडू लेकर सफाई से परहेज नहीं करते है. सड़क हो या समंदर, सभी जगह से स्वच्छता का संदेश देने की कोशिश करते हैं.

कई बार तो ऐसा लगता है गांधी के विचारों के प्रचारक मोदी जी और प्रतिरोधक प्रज्ञा ठाकुर के बीच कोई संघर्ष चल रहा है. संसद से सड़क तक सवाल किया जा रहा है कि यह ये देश गांधी जी का है, या हत्यारे गोडसे का.

गांधी जी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को महिमा मंडित करने का यह कोई प्रज्ञा का पहला प्रयास नहीं है


प्रज्ञा के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं
यह सवाल इसलिए भी खड़ा किया जा रहा कि भाजपा और मोदीजी की भारतीय जनमानस के सामने परिलक्षित विचारधारा के विपरीत लगातार विवादित बयान देकर शर्मिंदगी में डालने वाली प्रज्ञा सिंह ठाकुर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही. ऐसे में लोग सवाल तो खड़े करेंगे और भाजपा को भी गोडसे की विचारधारा वाली पार्टी बताने से नहीं हिचकेंगे.

वैसे आप देखें कि पिछले एक साल में भाजपा की दोबारा सत्ता में वापसी के बाद अतिवादी स्वर ज्यादा मुखर हुए हैं. यूपी हो या मध्यप्रदेश या बिहार या फिर पश्चिम बंगाल सभी जगह से गांधी, शांति सद्भाव पर प्रहार करने वाले विचार मुखर हो रहे हैं, क्योंकि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही. गांधी जी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को महिमा मंडित करने का यह कोई प्रज्ञा का पहला प्रयास नहीं है. कई वर्षों पहले से 'मैंने गांधी को क्यों मारा' जैसी गोडसे पर लिखी किताबें एक खास सियासी दल की बैठकों, सभा, सम्मेलनों में बुक स्टॉल पर बिकती रही हैं.

गोडसे की पूजा
बीते हफ्ते मध्यप्रदेश के ग्वालियर में हिन्दू महासभा के कुछ कर्ताधर्ताओं ने गोडसे पूजा की. इसे लेकर खासा विवाद पर विवाद खड़ा हो गया था. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ स्वयं बेहद नाराज हो गए थे और गोडसे को पूजने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी थी. इसके बाद भी गोडसे की एक परिजन ने ग्वालियर में बीच चौराहे अपने पूर्वज गोडसे की आरती उतारी, पूजा की.

लेकिन एक खास बात जो देखने को मिल रही है और जिसे नकारा नहीं जा सकता, यहां चाहे गांधी-नेहरू को जितना कोस लो, दुनिया के किसी भी कोने में इन महान विभूतियों के नाम का इतना मान है, सम्मान है, कि इनका नाम लिए बिना हमारे नेता, मंत्री, किसी को भी कोई ठौर नहीं मिलता. चाहे वह मोदी जी ही क्यों न हों, गांधी जी का नाम तो लेना ही पड़ता है. वहां कोई प्रज्ञा नहीं होती, कोई गोडसे का स्वर सुनाई नहीं देता. वहां सिर्फ गांधी का नाम, उसका जंतर चलता है.

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार है. यहां व्यक्त विचार उनके निजी है.)

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First published: November 28, 2019, 7:46 AM IST
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