चांद की सतह पर पहुंच कर सबसे पहले 'विक्रम' के साथ सेल्फी लेगा 'प्रज्ञान'

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Updated: September 7, 2019, 12:20 AM IST
चांद की सतह पर पहुंच कर सबसे पहले 'विक्रम' के साथ सेल्फी लेगा 'प्रज्ञान'
यान को चंद्रमा की निचली कक्षा में उतारने का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा

रूस, अमेरिका और चीन के बाद भारत ऐसा करने वाला दुनिया का चौथा तथा चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बन जाएगा.

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  • Last Updated: September 7, 2019, 12:20 AM IST
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बस कुछ ही घंटों के बाद इसरो (ISRO) का चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) चांद की सतह पर ऐतिहासिक कदम रखेगा. लैंडर 'विक्रम' के चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग के साथ ही भारत का चंद्रयान-2 दुनिया के सामने इतिहास रच देगा. चंद्रयान-2 रात करीब डेढ़ से ढाई बजे के बीच चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा.

रात करीब 1:38 बजे चंद्रयान-2 चांद के ऊपर से लगभग 35 किलोमीटर की ऊंचाई से चांद की सतह की तरफ जाना शुरू करेगा. यहां से करीब 1:48 बजे चंद्रयान-2 की ऊंचाई से इस पर ब्रेक लगा दिया जाएगा. इतनी रफ्तार के बीच चंद्रयान-2 पर ब्रेक लगाना आसान नहीं है, यही कारण है कि इसे रोकने के लिए इंजन को विपरीत दिशा में स्टार्ट किया जाएगा. इस प्रक्रिया को पूरा कर लेने के बाद 1:50 बजे विक्रम लैंडर चांद की सतह की मैपिंग शुरू करेगा और यहां से ठीक दो मिनट के बाद करीब 1:52 बजे विक्रम लैंडर चांद की सतह की कुछ तस्वीरें भारत को भेजना शुरू कर देगा.

चांद की तस्वीर लेने के बाद करीब 1:53 बजे के आसपास विक्रम लैंडर चांद की सतह पर उतरेगा. इसके दो घंटे के बाद करीब 3:53 बजे विक्रम लैंडर, रोवर के बाहर आने के लिए अपने दरवाजे को खोलकर रैंप बाहर निकालेगा. रैंप खुलने के आधे घंटे के बाद 4 बजकर 23 मिनट पर प्रज्ञान ऑन होगा. सुबह 5:03 बजे प्रज्ञान रोवर सोलर पैनल एक्टीवेट होगा. इसके बाद 5:19 बजे प्रज्ञान रोवर विक्रम लैंडर से रैंप की सहारे चांद की सतह पर बाहर उतरेगा. उसे चांद की सतह पर उतरने में करीब दस मिनट लगेंगे. चांद की सतह पर उतरने के बाद प्रज्ञान रोवर सबसे पहले विक्रम लैंडर की सेल्फी लेगा और पृथ्वी पर भेजेगा.

ऐसा करने वाला दुनिया का पहला देश बनेगा भारत

इसरो को यदि ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ में सफलता मिलती है तो रूस, अमेरिका और चीन के बाद भारत ऐसा करने वाला दुनिया का चौथा तथा चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बन जाएगा. अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि ‘चंद्रयान-2’ लैंडर और रोवर को लगभग 70 डिग्री दक्षिणी अक्षांश में दो गड्ढों ‘मैंजिनस सी’ और ‘सिंपेलियस एन’ के बीच एक ऊंचे मैदानी इलाके में उतारने का प्रयास करेगा.

चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर एक साल चांद पर रह सकेगा
चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर का जीवनकाल एक साल का है. इस दौरान यह चंद्रमा की लगातार परिक्रमा कर हर जानकारी पृथ्वी पर मौजूद इसरो के वैज्ञानिकों को भेजता रहेगा. वहीं, रोवर ‘प्रज्ञान’ का जीवनकाल एक चंद्र दिवस यानी कि धरती के 14 दिन के बराबर है. इस दौरान यह वैज्ञानिक प्रयोग कर इसकी जानकारी इसरो को भेजेगा.

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First published: September 7, 2019, 12:17 AM IST
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