बाबरी विध्वंस पर प्रकाश जावड़ेकर बोले- उस दिन ऐतिहासिक भूल को समाप्त किया

प्रकाश जावड़ेकर. (फाइल फोटो)

Babari Mosque Demolition: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अपने फैसले के बाद मुस्लिम समुदाय को मस्जिद निर्माण के लिए 5 एकड़ जमीन देने के आदेश दिए थे. जिसके बाद अयोध्या में धन्नीपुर मस्जिद का काम 26 जनवरी को औपचारिक रूप से शुरू होने जा रहा है.

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    नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर (Prakash Javdekar) ने अयोध्या स्थित राम मंदिर को लेकर बड़ी बात कही है. उन्होंने कहा है कि आक्रमणकारी जानते थे कि देश के प्राण इस मंदिर में हैं. इसलिए उसे गिरा दिया गया. खास बात है कि विवादित जमीन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2019 में राम जन्मभूमि मंदिर बनाने वाले ट्रस्ट के पक्ष में फैसला सुनाया था. इसके बाद मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ जमीन दिए जाने के आदेश दिए थे.

    दिल्ली में प्रकाश जावड़ेकर ने कहा 'बाबर जैसे विदेशी आक्रमणकारी जब भारत आए, तो उन्होंने राम मंदिर ही क्यों तोड़ा. देश में लाखों मंदिर हैं.' केंद्रीय मंत्री ने कहा 'उन्हें समझ आया कि देश के प्राण अगर कहीं हैं, तो इसी राम मंदिर में हैं. इसलिए राम मंदिर पर आक्रमण हुआ.' उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रमणकारियों ने वहां मंदिर को हटाकर एक विवादित ढांचा बनाया था. उन्होंने कहा 'जहां इबादत नहीं होती, वो मस्जिद नहीं होती.'







    इस दौरान उन्होंने बाबरी विध्वंस के समय के बारे में भी बात की. उन्होंने कहा कि 6 दिसंबर 1992 को दुनिया ने देखा कि एक ऐतिहासिक भूल कैसे समाप्त हुई. उस दिन कारसेवकों ने उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित बाबरी मस्जिद को ढहा दिया था. इस मामले से उमा भारती, लालकृष्ण आडवाणी समेत भारतीय जनता पार्टी के कई बड़े नेताओं का नाम जोड़ा गया था.

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    26 जनवरी से शुरू हो रहा है मस्जिद निर्माण
    सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले के बाद मुस्लिम समुदाय को मस्जिद निर्माण के लिए 5 एकड़ जमीन देने के आदेश दिए थे. जिसके बाद अयोध्या में धन्नीपुर मस्जिद का काम 26 जनवरी को औपचारिक रूप से शुरू होने जा रहा है. इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट ने कहा है कि वे निर्माण कार्य के शुरू होने के मौके पर एक समारोह आयोजित करने का विचार कर रहे हैं. उन्होंने कहा है कि प्रोजेक्ट की औपचारिक शुरुआत के दौरान पौधारोपण किया जाएगा और राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा.

    ओवैसी बोले- इस नाइंसाफी को नहीं भूलना
    बीते साल दिसंबर में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बाबरी विध्वंस की 28वीं बरसी पर ट्वीट किया था। ओवैसी ने लिखा, 'अगली पीढ़ी को यह बताने और सिखाने का याद रखें कि 400 से ज्यादा सालों से हमारी बाबरी मस्जिद अयोध्या (Ayodhya) में खड़ी थी. हमारे बुजुर्गों ने इसके हॉल में नमाज पढ़ी हैं, इसके मैदान में अपने रोजे तोड़े हैं और जब उनका इंतकाल हुआ, तो उन्हें पास के कब्रिस्तान में दफनाया गया.' एक अन्य ट्वीट में ओवैसी ने लिखा '1949 में 22-23 दिसंबर की रात में हमारी बाबरी मस्जिद को अपवित्र किया गया और 42 सालों के लिए कब्जे में कर लिया गया.'

    उन्होंने लिखा था '1992 में आज की इस तारीख पर हमारी मस्जिद को दुनिया के सामने ढहा दिया गया. इसके लिए जिम्मेदार लोगों ने एक दिन भी सजा नहीं भुगती.' खास बात है कि दोनों ट्वीट में ओवैसी ने आखिर में लिखा है 'इस नाइंसाफी को नहीं भूलना.'

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