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CAA पर प्रकाश सिंह बादल का बीजेपी पर वार, 'नफरत के बीज नहीं बोने चाहिए'

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Updated: February 14, 2020, 12:22 PM IST
CAA पर प्रकाश सिंह बादल का बीजेपी पर वार, 'नफरत के बीज नहीं बोने चाहिए'
शिरोमणि अकाली दल के नेता प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि 'सरकार को धर्म के आधार पर किसी का पक्ष नहीं लेना चाहिए.' फाइल फोटो

शिरोमणि अकाली दल ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है. इसके वरिष्ठ नेता प्रकाश सिंह बादल ने महाराजा रणजीत सिंह का हवाला देते हुए कहा, 'उन्होंने एक मुस्लिम को विदेश मंत्री नियुक्त किया था. उन्हें वोटों की चिंता नहीं थी. वह धर्मनिरपेक्षता के सही अर्थ को समझते थे.'

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पंजाब. नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर पिछले साल से ही देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी हैं. वहीं दिल्ली के कई इलाकों सहित शाहीन बाग (Shaheen Bagh) में करीब दो महीने से इस कानून को वापस लेने की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन हो रहा है.

जहां ज्‍यादातर विपक्षी दलों का आरोप है कि यह कानून मुस्लिमों के खिलाफ है. वहीं अब बीजेपी (BJP) के सहयोगी शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने भी मोदी सरकार पर निशाना साधा है. इसके वरिष्ठ नेता प्रकाश सिंह बादल (Parkash Singh Badal) ने अमृतसर में आयोजित एक रैली में कहा कि 'सरकार को धर्म के आधार पर किसी का पक्ष नहीं लेना चाहिए और सरकार को सभी धार्मिक समुदायों के बीच एकता का आह्वान करना चाहिए.'

उन्‍होंने आगे कहा, 'यह गंभीर और चिंता का विषय है कि देश में वर्तमान स्थिति इतनी अच्छी नहीं है. सभी धर्मों का सम्मान करना चाहिए. अगर कोई सरकार कामयाब होना चाहती है, तो उसे अल्पसंख्यकों को साथ लेना ही होगा. इसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी शामिल होने चाहिए. इन सभी समुदायों को ऐसा महसूस होना चाहिए कि वे सभी एक परिवार का हिस्सा हैं. उन्हें एक-दूसरे को गले लगाना चाहिए. नफरत के बीज नहीं बोने चाहिए.'

इसके बाद उन्‍होंने यह भी कहा कि 'हमारे संविधान में लिखा है कि हमारे देश में धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक शासन होगा. धर्मनिरपेक्षता के पवित्र सिद्धांतों से कोई विचलन हमारे देश को कमजोर करेगा. सत्ता में रहने वालों को एकजुट होकर और एक धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र के रूप में भारत की रक्षा के लिए अथक प्रयास करना चाहिए. सरकार को सिख गुरुओं से सीख लेनी चाहिए, जिन्होंने भाईचारे और सामाजिकता की वकालत की.' उन्होंने महाराजा रणजीत सिंह का हवाला देते हुए कहा, 'उन्होंने एक मुस्लिम को विदेश मंत्री नियुक्त किया था. उन्हें वोटों की चिंता नहीं थी. वह धर्मनिरपेक्षता के सही अर्थ को समझते थे. इसी के बारे में हमारा संविधान बात करता है.'

गौरतलब है कि हाल में दिल्ली के विधानसभा चुनाव में शिरोमणि अकाली दल ने अपने किसी भी प्रत्याशी को चुनाव मैदान में नहीं उतारा था. हालांकि सीट बंटवारे को लेकर हुए मतभेद को इसकी वजह बताया गया. हालांकि बाद में अकाली नेताओं ने मीडिया के सामने जारी किए गए अपने बयान में कहा कि नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) को लेकर पर उनकी असहमति भी इसकी अहम वजह है.

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First published: February 14, 2020, 12:22 PM IST
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