जिस 13 के अंक को दूसरे मानते हैं अशुभ, उसका प्रणब मुखर्जी के साथ है अजब रिश्ता

जिस 13 के अंक को दूसरे मानते हैं अशुभ, उसका प्रणब मुखर्जी के साथ है अजब रिश्ता
प्रणब मुखर्जी का सोमवार को 84 साल की उम्र में निधन हो गया

इस विदाई की घड़ी में प्रणब मुखर्जी (Pranab Mukherjee) के व्यक्तित्व के कई पहलुओं को उदास राष्ट्र (nation) याद कर रहा है. लेकिन उनसे जुड़ी एक बात के बारे में शायद कम लोगों को ही पता हो.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 31, 2020, 7:52 PM IST
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नई दिल्ली. पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी (Pranab Mukherjee) का सोमवार को 84 साल की उम्र में दिल्ली में सेना के आरआर अस्पताल में निधन हो गया. उनके बेटे अभिजीत मुखर्जी (Abhijit Mukherjee) ने ट्वीट कर पूर्व राष्ट्रपति (Former President) के निधन की पुष्टि की. प्रणब मुखर्जी लंबे समय से बीमार चल रहे थे. कुछ हफ्ते पहले उनके मस्तिष्क का ऑपरेशन हुआ था. उन्हें कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus Infection) भी था. उनके फेफड़ों में इंफेक्शन (Lung infection) की पुष्टि भी हुई थी. फेफड़ों में इंफेक्शन के बाद से ही उनकी हालात बिगड़ती जा रही थी.

इस विदाई की घड़ी में प्रणब मुखर्जी (Pranab Mukherjee) के व्यक्तित्व के कई पहलुओं को उदास राष्ट्र (nation) याद कर रहा है. लेकिन उनसे जुड़ी एक बात के बारे में शायद कम लोगों को ही पता होगा. यूं तो 13 अंक को अशुभ माना जाता है. लेकिन पूर्व राष्ट्रपति (Former President) प्रणब मुखर्जी के मामले में ये अंक काफी शुभ रहा है. प्रणब मुखर्जी के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं (important events) का गवाह 13 अंक या 13 तारीख रही है.

विवाह 13 जुलाई को!
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का विवाह सुब्रा मुखर्जी से 13 जुलाई 1957 को हुआ.
देश के 13वें राष्ट्रपति!


प्रणब मुखर्जी जब 2012 में राष्ट्रपति निर्वाचित हुए तो वो इस पद पर आसीन होने वाले देश के 13वें राष्ट्रपति थे.

राष्ट्रपति चुनाव में प्रणब मुखर्जी को मिले वोटों में भी 13 का अंक!
प्रणब मुखर्जी के लिए अंक 13 कई मौकों पर खास रहा है. प्रणब मुखर्जी को कुल वोट 7,13,763 मिले थे और इसमें भी 13 अंक है.

13 नंबर के बंगले में आवास!
राष्ट्रपति बनने से पहले प्रणब मुखर्जी यूपीए सरकार में वित्त मंत्री थे और दिल्ली के तालकटोरा मार्ग स्थित 13 नंबर के बंगले में रहते थे. जुलाई, 1996 से लेकर 25 जुलाई 2012 तक प्रणब मुखर्जी इसी बंगले में रहते थे.

13 तारीख को बतौर राष्ट्रपति के उम्मीदवार के विकल्प के तौर पर सामने आया नाम!
13 जून 2012 को सबसे पहली बार यूपीए की तरफ से राष्ट्रपति उम्मीदवार के दो नाम सामने आए तो उनमें एक नाम प्रणब मुखर्जी और दूसरा हामिद अंसारी का था. ममता बनर्जी जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से राष्ट्रपति उम्मीदवार के मसले पर उम्मीदवार के नाम पर बैठक करने पहुंचीं तो बैठक के बाद ममता बनर्जी ने दो लोगों का नाम सामने रखा है- हामिद अंसारी और प्रणब मुखर्जी का.

यह भी पढ़ें:- प्रणब मुखर्जी के निधन पर PM मोदी ने जताया शोक

संसद में बतौर राज्य सभा सांसद 13 जुलाई को ही पहली बार सत्र में उपस्थित!
1969 में प्रणब मुखर्जी की काबिलियत से प्रभावित होकर इंदिरा गांधी ने प्रणब दा को पश्चिम बंगाल से राज्यसभा के लिए चुना. प्रणब मुखर्जी 13 जुलाई, 1969 को पहली बार संसद में बतौर सांसद पहुंचे.
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