पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को आज भारत रत्न देंगे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

प्रणब मुखर्जी के अलावा भारत का यह सर्वोच्च नागरिक सम्मान सामाजिक कार्यकर्ता नानाजी देशमुख और असम के प्रख्यात गायक भूपेन हजारिका को भी दिया जाएगा.

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Updated: August 8, 2019, 11:07 PM IST
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को आज भारत रत्न देंगे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के साथ भारत का यह सर्वोच्च सम्मान मरणोपरांत नानाजी देशमुख और भूपेन हजारिका को भी दिया जाना है (फाइल फोटो)
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Updated: August 8, 2019, 11:07 PM IST
भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को गुरुवार को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा. मुखर्जी के अलावा यह पुरस्कार मरणोपरांत सामाजिक कार्यकर्ता नानाजी देशमुक और ख्यातिप्राप्त असमिया गायक भूपेन हजारिका को भी दिया जाना है. इसी साल की शुरुआत में इन तीनों को भारत रत्न दिए जाने की घोषणा की गई थी.

प्रणब मुखर्जी ने भारतीय राजनीति में लंबी पारी खेली है. उन्होंने अपना करियर कोलकाता के डिप्टी अकाउंटेंट जनरल कार्यालय में बतौर क्लर्क शुरु किया था. हालांकि उनकी मेहनत और बुद्धिमत्ता उन्हें न सिर्फ राजनीति में लाई बल्कि उन्होंने राजनीति के क्षेत्र में इतना अच्छा काम किया कि भारत के सर्वोच्च पद पर आसीन हुए यानी राष्ट्रपति बने.

एक क्लर्क से शुरु हुआ प्रणब मुखर्जी का सफर राष्ट्रपति के पद तक जाता है
प्रणब मुखर्जी का जन्म पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के एक छोटे से गांव मिराटी में एक ब्राह्मण परिवार में 11 दिसंबर, 1935 में हुआ था. उनके पिता कामदा किंकर मुखर्जी अपने क्षेत्र के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों में शामिल थे. आजादी की लड़ाई के दौरान वे 10 साल जेल में भी रहे थे. उनके पिताजी 1920 में इंडियन नेशनल कांग्रेस के सक्रिय सदस्य बन गए थे.

1947 में देश की आजादी के बाद भी वे राजनीति में सक्रिय रहे और 1952 से 1964 तक वे पश्चिम बंगाल विधान परिषद के सदस्य भी रहे. प्रणब मुखर्जी ने पिता के सहयोग से ही राजनीति में प्रवेश किया था.

केंद्र सरकार में मंत्री का पद ठुकराकर देश-सेवा में जुटे रहे नानाजी देशमुख
नानाजी देशमुख को मरणोपरांत भारत के सबसे बड़े नागरिक सम्मान से सम्मानित किया जा रहा है. वे ताउम्र राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य रहे. उन्होंने इस दौरान बड़े स्तर पर समाजसेवा के काम किए और देश के बड़े विचारकों में उनकी गिनती की जाती रही. अक्सर उनके उदार सर्वग्राही नजरिये की बात की जाती है, जिसके चलते उन्होंने न केवल महात्मा गांधी बल्कि जयप्रकाश नारायण को भी मन से स्वीकार किया.
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1977 में जनता पार्टी की सरकार में जब मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने नानाजी देशमुख को एक उद्योग मंत्री का पद स्वीकारने का न्यौता दिया लेकिन नानाजी ने इस प्रस्ताव को विनम्रता से नकार दिया. इसके साल भर बाद ही उन्होंने सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया और रचनात्मक कार्यों में जुट गए.

लीजेंड गायक भूपेन हजारिका ने मात्र 10 साल की उम्र में रिकॉर्ड किया था पहला गीत
सिनेमा, संगीत और कला के क्षेत्र में महानतम योगदान देने के लिए भूपेन हजारिका को भारत का यह सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया जाना है. भूपेन हजारिका न सिर्फ हिंदी बल्कि असमिया और बंगाली भाषाओं के कलाजगत के प्रमुख स्तंभ थे.

पद्म पुरस्कारों और दादा साहेब फाल्के जैसे अपने प्रतिष्ठित सम्मानों से डॉक्टर भूपेन हजारिका को पहले ही नवाजा जा चुका है. लीजेंड असमिया गायक भूपेन हजारिका ने अपना पहला गीत मात्र 10 साल की उम्र में रिकॉर्ड किया था.

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First published: August 8, 2019, 5:39 AM IST
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