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'सर्जिकल स्‍ट्राइक पहले भी हुए, इसे बढ़ाकर पेश करने से कुछ नहीं मिला'- PM मोदी की विदेश नीति पर प्रणब मुखर्जी

प्रणब मुखर्जी ने अपनी किताब में लिखी बात. (File pic)
प्रणब मुखर्जी ने अपनी किताब में लिखी बात. (File pic)

पूर्व राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी (Pranab Mukherjee) ने अपनी पुस्‍तक में सर्जिकल स्‍ट्राइक पर बात करते हुए लिखा है कि सीमा पर पाकिस्‍तान द्वारा जारी तनाव को देखते हुए भारतीय बलों की ओर से ऐसी स्‍ट्राइक सामान्‍य सैन्‍य ऑपरेशंस का हिस्‍सा होती हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 6, 2021, 1:08 PM IST
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नई दिल्‍ली. दिवंगत पूर्व राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी (Pranab Mukherjee) का संस्मरण ‘द प्रेसिडेंसियल ईयर्स, 2012-2017’ अब सामने आया है. उन्‍होंने यह पुस्‍तक 2020 में अपने निधन से पहले लिखी थी. इसमें उन्‍होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की विदेश नीति को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया लिखी है. उन्‍होंने इसमें साफतौर पर लिखा है कि 2016 में भारतीय सेना (Indian Army) की ओर से आतंकियों पर की गई सर्जिकल स्‍ट्राइक (Surgical Strike) को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की कोई आवश्‍यकता नहीं थी. उन्‍होंने यह भी लिखा है 'हमें इन ऑपरेशंस पर जरूरत से अधिक बात करके कुछ हासिल नहीं हुआ है.'

पूर्व राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपनी पुस्‍तक में सर्जिकल स्‍ट्राइक पर बात करते हुए लिखा है कि सीमा पर पाकिस्‍तान द्वारा जारी तनाव को देखते हुए भारतीय बलों की ओर से ऐसी स्‍ट्राइक सामान्‍य सैन्‍य ऑपरेशंस का हिस्‍सा होती हैं. इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विभिन्न विदेश नीति संबंधी पहलुओं पर अपनी राय साझा करते हुए पूर्व राष्‍ट्रपति मुखर्जी ने लिखा है कि तत्कालीन पाकिस्‍तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की बेटी के जन्मदिन में शरीक होने के लिए पीएम मोदी का लाहौर का आश्चर्यजनक दौरा भारत में मौजूद परिस्थितियों को देखते हुए अनावश्यक था.

मोदी सरकार में विदेश संबंधों का उल्लेख करते हुए मुखर्जी ने कहा है कि भारत-पाकिस्तान संबंधों में हालात को देखते हुए 2015 में प्रधानमंत्री मोदी का लाहौर में रुकना गैरजरूरी था. मुखर्जी ने अपनी आत्मकथा के चौथे खंड में लिखा, 'कोई मोदी से अप्रत्याशित उम्मीद कर सकता है.' क्योंकि वह किसी वैचारिक विदेश नीति के साथ नहीं आए थे. पूर्व राष्‍ट्रपति ने किताब में पीएम मोदी की ओर से अपने शपथ ग्रहण समारोह में सार्क देशों के नेताओं और चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग की भारत में दो बार मेजबानी करने को लेकर उनकी सराहना भी की है.



मुखर्जी ने अपने संस्‍मरण में लिखा है, 'जब नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री का पद ग्रहण किया तब उनके पास विदेश मामलों का कोई भी अनुभव नहीं था. गुजरात के मुख्‍यमंत्री के रूप में उन्होंने कुछ देशों का दौरा किया था, लेकिन ये यात्राएं उनके राज्य की भलाई के लिए सीमित थीं. इन यात्राओं का घरेलू या वैश्विक विदेश नीतियों से कोई वास्‍ता नहीं था. ऐसे में विदेश नीति उनके लिए सही मायने में अपरिचित क्षेत्र था. लेकिन उन्होंने वो किया जो किसी प्रधानमंत्री ने पहले नहीं किया था. 2014 में अपने शपथ ग्रहण समारोह में उन्‍होंने सार्क देशों के शासनाध्यक्षों को आमंत्रित किया था. इनमें पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भी शामिल थे. उनकी इस आउट ऑफ द बॉक्स पहल ने विदेश नीति के कई दिग्गजों को आश्चर्यचकित किया.

पूर्व राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपने संस्‍मरण में इमरान खान के पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रूप में उभरने को 'एक दिलचस्प घटना' बताया. उन्होंने कहा, 'हालांकि हमें इंतजार करना होगा और देखना होगा कि इमरान कैसे आगे बढ़ते हैं, खासकर भारत से संबंधित मुद्दों के संबंध में. मुझे व्यक्तिगत रूप से लगता है कि भारत को उनके साथ जुड़ना चाहिए. वह राजनेताओं की एक नई नस्ल का हिस्सा हैं.'
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