पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को 8 अगस्त को मिलेगा भारत रत्न

मुखर्जी के अलावा ये पुरस्कार मरणोपरांत सामाजिक कार्यकर्ता नानाजी देशमुख और असम प्रख्यात गायक भूपेन हजारिका को दिया जाएगा.

News18Hindi
Updated: July 29, 2019, 8:36 AM IST
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को 8 अगस्त को मिलेगा भारत रत्न
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी
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Updated: July 29, 2019, 8:36 AM IST
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को 8 अगस्त को सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा. मुखर्जी के अलावा ये पुरस्कार मरणोपरांत सामाजिक कार्यकर्ता नानाजी देशमुख और असम प्रख्यात गायक भूपेन हजारिका को दिया जाएगा. इन तीनों को इस साल जनवरी में इस सम्मान के लिए चुना गया था.

प्रणब दा का भारतीय राजनीति में लंबा रिश्ता रहा है. उन्होंने अपना करियर कोलकाता में डिप्टी अकाउंटेंट जनरल के कार्यालय में क्लर्क के रूप में शुरू किया था लेकिन इसके बाद अपनी मेहनत और बुद्धिमत्ता से आगे बढ़ते गए.

प्रणब मुखर्जी 

प्रणब मुखर्जी का जन्म पश्चिम बंगाल के बीरभूम ज़िले के एक छोटे से गांव मिराटी में एक ब्राह्मण परिवार में 11 दिसंबर 1935 में हुआ था. प्रणब मुखर्जी के पिताजी कामदा किंकर मुखर्जी क्षेत्र के एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे. आज़ादी की लड़ाई में वो 10 सालों से ज्यादा समय तक ब्रिटिश जेलों में कैद रहे. उनके पिताजी 1920 से इंडियन नेशनल कांग्रेस के सक्रिय कार्यकर्ता थे. देश की आजादी के बाद वो 1952 से लेकर 1964 तक पश्चिम बंगाल विधान परिषद के सदस्य रहे. प्रणब ने राजनीति में प्रवेश पिता के हाथ को पकड़ कर ही किया था

नानाजी देशमुख 

नानाजी देशमुख को मरणोपरांत देश का सर्वोच्च सम्मान 'भारत रत्न' से नवाजा गया है. नानाजी ताउम्र राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े रहे, लेकिन उन्होंने समाजसेवा का भी काम किया और देश के बड़े विचारकों में भी गिने जाते रहे. लेकिन सबसे बड़ी बात थी उनका उदार सर्वग्राही दृष्टिकोण, जिसके चलते उन्होंने ना केवल महात्मा गांधी, बल्कि जयप्रकाश नारायण को भी मन से स्वीकार किया. 1977 में मोरारजी ने जनता पार्टी के तब के जनसंघ घटक में से जिन तीन लोगों को मंत्री बनाने का ऐलान किया, उनमें एक नानाजी थे. नानाजी को उद्योग मंत्री होना था, लेकिन वे नहीं बने. इसके सालभर बाद ही उन्होंने राजनीति से संन्यास लेकर रचनात्मक कार्य में लगने की घोषणा की.

भूपेन हज़ारिका 
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सिनेमा, संगीत और कला के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए मशहूर डॉक्टर भूपेन हज़ारिका को भारत रत्‍न दिया जाएगा. वे न केवल हिंदी बल्कि असमिया और बंगाली भाषाओं के कलाजगत के प्रमुख स्तंभ रहे. पद्म और दादा साहेब फालके सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाज़े गए हज़ारिका ने पहला गीत सिर्फ 10 बरस की उम्र में गाया था.

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First published: July 29, 2019, 8:36 AM IST
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