अवमानना केस : प्रशांत भूषण इन दो ट्वीट्स को लेकर दोषी करार, 20 अगस्त को सजा पर बहस

अवमानना केस : प्रशांत भूषण इन दो ट्वीट्स को लेकर दोषी करार, 20 अगस्त को सजा पर बहस
प्रशांत भूषण पर साल 2009 में भी मामला दर्ज हुआ था. (Photo- PTI)

प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) ने प्रधान न्यायाधीश (CJI) एसए बोबडे और सुप्रीम कोर्ट के 4 पूर्व जजों को लेकर टिप्पणी की थी, जिस पर कोर्ट (Supreme Court) ने स्वत: संज्ञान लेते हुए इसे अदालत की अवमानना माना था.

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  • Last Updated: August 15, 2020, 9:44 AM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने वकील प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) को न्यायपालिका को लेकर किए गए दो ट्वीट के मामले में अवमानना का दोषी करार दिया गया है. अब 20 अगस्त को इस मामले में सुनवाई के बाद सजा की मियाद तय होगी. प्रशांत भूषण ने प्रधान न्यायाधीश (CJI) एसए बोबडे और सुप्रीम कोर्ट के 4 पूर्व जजों को लेकर ये टिप्पणी की थी, जिस पर कोर्ट ने स्वत:संज्ञान लेते हुए इसे अदालत की अवमानना माना था.

इस मामले की सुनवाई के दौरान प्रशांत भूषण ने कहा था कि ट्वीट भले ही अप्रिय लगे, लेकिन अवमानना नहीं है. उन्होंने कहा था कि वे ट्वीट न्यायाधीशों के खिलाफ उनके व्यक्तिगत स्तर पर आचरण को लेकर थे और वे न्याय प्रशासन में बाधा उत्पन्न नहीं करते. अदालत ने इस मामले में प्रशांत भूषण को 22 जुलाई को कारण बताओ नोटिस जारी किया था.





बेंच ने सुनवाई पूरी करते हुए 22 जुलाई के आदेश को वापस लेने के लिए अलग से दायर आवेदन खारिज कर दिया था. इसी आदेश के तहत न्यायपालिका की कथित रूप से अवमानना करने वाले दो ट्वीट पर अवमानना कार्यवाही शुरू करते हुए नोटिस जारी किया गया था.
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सुप्रीम कोर्ट के नोटिस का जवाब देते हुए प्रशांत भूषण ने कहा था, 'मैं ये मानता हूं कि इस बात पर मेरा ध्यान नहीं गया कि ये बाइक स्टैंड पर खड़ी थी और ऐसे में हेलमेट पहनने की जरूरत नहीं थी. इसलिए मैं अपने ट्वीट के उस हिस्से के लिए माफी मांगता हूं, लेकिन मैं अपने ट्वीट के बाकी हिस्सों के लिए माफी नहीं मांगता हूं.'

न्यायपालिका से जुड़े मसलों पर उठाते रहे हैं सवाल
प्रशांत भूषण न्यायपालिका से जुड़े मसलों पर पहले भी सवाल उठाते रहे हैं. हाल के दिनों में कोरोना के दौरान लगाए गए लॉकडाउन में दूसरे राज्यों से पलायन करने वाले प्रवासियों को लेकर भी शीर्ष अदालत के रवैये की आलोचना की थी. इसी तरह भीमा कोरेगांव मामले के आरोपी वरवर राव और सुधा भारद्वाज जैसे जेल में बंद नागरिक अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं के साथ हो रहे व्यवहार के बारे में बयान भी दिये थे.

प्रशांत भूषण ने 134 पन्नों के जवाब में अपने ट्वीट्स को सही ठहराने के लिए कई पुराने मामलों का जिक्र किया था, जिसमें सहारा-बिड़ला डायरी मामले से लेकर जज लोया की मौत, कलिको पुल आत्महत्या मामले से लेकर मेडिकल प्रवेश घोटाले, असम में मास्टर ऑफ रोस्टर विवाद, अनुच्छेद 370 को निरस्त करने से लेकर नागरिकता संशोधन अधिनियम शामिल है.'

बता दें कि अदालत की अवमानना के अधिनियम की धारा 12 के तहत दोषी को छह महीने की कैद या दो हजार रुपये तक नकद जुर्माना या फिर दोनों हो सकती है.
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