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अवमानना केसः प्रशांत भूषण का पुनर्विचार याचिका से पहले उनकी दो याचिकाओं पर विचार का अनुरोध

सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने 31 अगस्त को प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) को एक रुपये का सांकेतिक जुर्माना देने या तीन महीने की साधारण कैद और तीन साल के लिए किसी भी मामले में पेश होने से प्रतिबंधित करने की सजा सुनाई थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 15, 2020, 7:59 PM IST
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नई दिल्ली. अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में एक आवेदन दायर कर यह निर्देश देने का अनुरोध किया कि उन्हें अवमानना का दोषी ठहराने और सजा के आदेशों पर पुनर्विचार के लिए दायर दो याचिकाएं उनकी अलग से दायर याचिका पर फैसला होने के बाद सूचीबद्ध की जाएं. इस अलग याचिका में भूषण ने इस तरह के मामले में अपील करने के अधिकार का सवाल उठाया है.

प्रशांत भूषण ने यह आवेदन न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष चैंबर में उनकी पुनर्विचार याचिकाओं पर विचार होने से एक दिन पहले दाखिल किया है. कोर्ट की अवमानना के अपराध में दोषी ठहराए जाने और सजा देने के आदेशों के खिलाफ भूषण की पुनर्विचार याचिकाएं बुधवार को न्यायाधीशों के चैंबर में विचारार्थ सूचीबद्ध हैं.

शीर्ष कोर्ट ने प्रशांत भूषण को न्यायपालिका के प्रति उनके 27 जून और 22 जुलाई के दो अपमानजनक ट्वीट को लेकर कोर्ट की अवमानना का दोषी ठहराया था. कोर्ट ने कहा था कि इन ट्वीट के लिए यह नहीं कहा जा सकता कि ये जनहित में न्यायपालिका के कामकाज की निष्पक्ष आलोचना थी.



शीर्ष कोर्ट ने बाद में 31 अगस्त को प्रशांत भूषण एक रुपये का सांकेतिक जुर्माना देने या तीन महीने की साधारण कैद और तीन साल के लिए किसी भी मामले में पेश होने से प्रतिबंधित करने की सजा सुनाई थी. भूषण ने 12 सितंबर को जुर्माने की रकम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करा दी और अलग से एक याचिका दायर करके ऐसे मामले में अपील करने के अधिकार का मुद्दा उठाया था.
अधिवक्ता कामिनी जायसवाल के माध्यम से मंगलवार को दायर आवेदन में भूषण ने कहा है कि उनकी 12 सितंबर की याचिका का उनकी पुनर्विचार याचिकाओं से सीधा संबंध है. उन्होंने कहा है कि इस याचिका को शीघ्र सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के बारे में 14 सितंबर को आवेदन करने के बावजूद यह मामला अभी तक सूचीबद्ध नहीं हुआ है, जबकि पुनर्विचार याचिकाएं 16 दिसंबर, 2020 को अचानक ही सूचीबद्ध हो गयी हैं.

आवेदन में कहा गया है कि यह न्याय के हित में होगा अगर शीर्ष कोर्ट उनकी अलग से दायर याचिका पर निर्णय के बाद वह पुनर्विचार याचिकाओं पर गौर करे.
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