प्रशांत भूषण ने SC में दोहराया महात्मा गांधी का कथन, 'दया की भीख नहीं मांगूंगा, कोर्ट जो सजा देगी, खुशी-खुशी स्वीकार कर लूंगा'

प्रशांत भूषण ने SC में दोहराया महात्मा गांधी का कथन, 'दया की भीख नहीं मांगूंगा, कोर्ट जो सजा देगी, खुशी-खुशी स्वीकार कर लूंगा'
प्रशांत भूषण पर एक और अवमानना केस में 24 अगस्त को सुनवाई होनी है.

Prashant Bhushan Contempt Case: प्रशांत भूषण (lawyer Prashant Bhushan) ने बहस टालने और रिव्यू पिटीशन लगाने का मौका देने की अर्जी लगाई थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अर्जी खारिज कर दी. भूषण ने कहा था कि पुनर्विचार याचिका दायर होने और उस पर विचार होने तक कार्यवाही टाली जाए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 20, 2020, 2:19 PM IST
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नई दिल्ली. अवमानना मामले में दोषी पाए जाने के बाद वकील प्रशांत भूषण (lawyer Prashant Bhushan) ने सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगने से एक बार फिर इनकार कर दिया है. प्रशांत भूषण ने कहा कि वो इस मामले में सजा से नहीं डर रहे और उन्हें अदालत की दया या उदारता की दरकार नहीं है, उन्हें जो भी सजा दी जाएगी वो मंजूर है. सुप्रीम कोर्ट आज अदालत की अवमानना का दोषी पाए गए प्रशांत भूषण को सजा देने पर सुनवाई टाले जाने की याचिका पर विचार कर रहा है. इस दौरान प्रशांत भूषण ने कहा है कि वो इस बात को लेकर हैरान हैं कि जिस शिकायत के आधार पर उन्हें दोषी ठहराया गया है वो उन्हें अदालत की तरफ से नहीं दी गई.

बता दें कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सजा को लेकर सुनवाई थी. ऐसे में उन्होंने बहस टालने और रिव्यू पिटीशन लगाने का मौका देने की अर्जी लगाई थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अर्जी खारिज कर दी. भूषण ने कहा था कि पुनर्विचार याचिका दायर होने और उस पर विचार होने तक कार्यवाही टाली जाए.

'जुर्माना भरने के लिए तैयार'
लाइव लॉ ने प्रशांत के बयान को छापते हुए लिखा है, ' मेरे ट्वीट में ऐसा कुछ भी नहीं था. ये एक नागरिक के रूप में अपने कर्तव्य का निर्वहन करने के लिए किए गए प्रयास थे. मैंने सोच समझ के साथ ये ट्वीट किए थे.' प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में महात्मा गांधी के कथन को दोहराते हुए कहा, "मैं दया की भीख नहीं मांगूंगा, मैं उदारता दिखाने की अपील भी नहीं करूंगा. अदालत जो सजा देगी उसे खुशी-खुशी स्वीकार कर लूंगा."
 खुली आलोचना आवश्यक है



भूषण ने ये भी कहा, 'मेरा मानना है कि संवैधानिक व्यवस्था की रक्षा के लिए किसी भी लोकतंत्र में खुली आलोचना आवश्यक है. संवैधानिक व्यवस्था को बचाना व्यक्तिगत या व्यावसायिक हितों के बारे में आना चाहिए. मेरे ट्वीट मेरे सर्वोच्च कर्तव्यों में एक छोटे से प्रयास थे.'

अपील खारिज
बता दें कि उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को प्रशांत भूषण की इस अपील को खारिज कर दिया कि उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही में सजा तय करने संबंधी दलीलों की सुनवाई शीर्ष अदालत की दूसरी पीठ द्वारा की जाए. न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अगुआई वाली पीठ ने भूषण को विश्वास दिलाया कि जब तक उन्हें अवमानना मामले में दोषी करार देने के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका पर निर्णय नहीं आ जाता, सजा संबंधी कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी. पीठ ने भूषण के वकील दुष्यंत दवे से कहा कि वह न्यायालय से अनुचित काम करने को कह रहे हैं कि सजा तय करने संबंधी दलीलों पर सुनवाई कोई दूसरी पीठ करे. शीर्ष अदालत ने न्यायपालिका के खिलाफ भूषण के दो अपमानजनक ट्वीट को लेकर उन्हें 14 अगस्त को आपराधिक अवमानना का दोषी ठहराया था.
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