अवमानना का केस झेल रहे प्रशांत भूषण ने 21 अक्टूबर के अपने ट्वीट के लिए मांगी माफी, CJI को लेकर किए थे ट्वीट

प्रशांत भूषण के खिलाफ उनके दो ट्वीट्स को लेकर ये कार्यवाही शुरू की गई है.
प्रशांत भूषण के खिलाफ उनके दो ट्वीट्स को लेकर ये कार्यवाही शुरू की गई है.

प्रशांत भूषण ने कहा, मध्यप्रदेश में कांग्रेस छोड़ कर शिवराज (सिंह चौहान) सरकार में मंत्री बनने वाले कांग्रेस विधायकों की सीटों पर कल मतदान हुआ.

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नई दिल्ली. अधिवक्ता प्रशांत भूषण (Prashant bhushan) ने भारत के प्रधान न्यायाधीश एस. ए. बोबड़े की आलोचना करने वाले 21 अक्टूबर के अपने ट्वीट में ‘गलती’ पर खेद जताया है. उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार द्वारा प्रधान न्यायाधीश को विशेष हेलीकॉप्टर मुहैया कराए जाने की आलोचना की थी. भूषण ने कहा था कि कान्हा राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा के दौरान प्रधान न्यायाधीश ने विशेष हेलीकॉप्टर सेवा ली, वह भी ऐसे वक्त में जब दल बदल करने वाले मध्यप्रदेश के विधायकों की अयोग्यता का मुकदमा उनके समक्ष लंबित है. मध्यप्रदेश सरकार का टिके रहना इस मुकदमे पर निर्भर है.’’

हालांकि भूषण ने अपने इस ट्वीट पर चार नवंबर को खेद जताया. उन्होंने ट्वीट किया है, ‘‘मध्यप्रदेश में कांग्रेस छोड़ कर शिवराज (सिंह चौहान) सरकार में मंत्री बनने वाले कांग्रेस विधायकों की सीटों पर कल मतदान हुआ. शिवराज सरकार का टिके रहना इन विधायकों के पुन:निर्वाचन पर निर्भर है, उनके मंत्री पद को चुनौती देने वाली प्रधान न्यायाधीश की अदालत में लंबित याचिका के फैसले पर नहीं. मैं नीचे के ट्वीट में अपनी गलती पर खेद प्रकट करता हूं.’’

क्या था विवादित ट्वीट में
प्रशांत भूषण के खिलाफ उनके दो ट्वीट्स को लेकर ये कार्यवाही शुरू की गई है. जिनमें से एक में उन्होंने कहा था कि पिछले छह सालों में देश में लोकतंत्र को बर्बाद करने में चार प्रधान न्यायाधीशों की भूमिका रही है. दूसरा ट्वीट उन्होंने मौजूदा प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे की उस तस्वीर को लेकर किया था, जिसमें वो हार्ले डेविडसन बाइक पर बैठे नज़र आए थे. भूषण ने CJI बोबडे पर बाइक पर बिना हेलमेट और मास्क के बैठने का आरोप लगाया था.




साल 2009 में भी अवमानना के नोटिस का सामना कर चुके हैं प्रशांत
प्रशांत भूषण न्यायपालिका से जुड़े मसले लगातार सवाल उठाते रहे हैं और हाल ही में उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान दूसरे राज्यों से पलायन कर रहे कामगारों के मामले में शीर्ष अदालत के रवैये की तीखी आलोचना की थी. भूषण ने भीमा-कोरेगांव मामले में आरोपी वरवर राव और सुधा भारद्वाज जैसे जेल में बंद नागरिक अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं के साथ हो रहे व्यवहार के बारे में बयान भी दिये थे.
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