प्रशांत भूषण की बढ़ी मुश्किल, दिल्ली बार काउंसिल ने किया तलब

दिल्ली बार काउंसिल ने प्रशांत भूषण को पेश होने का निर्देश दिया.
दिल्ली बार काउंसिल ने प्रशांत भूषण को पेश होने का निर्देश दिया.

दिल्ली बार काउंसिल (DBC) ने भूषण से जवाब मांगा है कि, न्यायपालिका (Judiciary) के खिलाफ कथित विवादित ट्वीट (Tweet) के लिए उन्हें दोषी ठहराए जाने के मद्देनजर एक अधिवक्ता के तौर पर उनका पंजीकरण रद्द करने की कार्यवाही क्यों शुरू नहीं की जानी चाहिए.

  • भाषा
  • Last Updated: September 23, 2020, 3:43 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली बार काउंसिल (DBC) ने अधिवक्ता प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) को अवमानना मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा दोषी करार दिए जाने के मद्देनजर 23 अक्टूबर को उसके सामने पेश होने का निर्देश दिया है. न्यायालय ने भूषण पर एक रुपए का सांकेतिक जुर्माना लगाया था. बार काउंसिल आफ इंडिया ने अवमानना मामले में भूषण का मामला छह सितंबर को दिल्ली बार काउंसिल के पास विवेचना करने और कानून सम्मत फैसला लेने के लिये भेजा था. इसके बाद दिल्ली बार काउंसिल ने यह कदम उठाया.

दिल्ली बार काउंसिल ने भूषण से जवाब मांगा है कि, न्यायपालिका के खिलाफ कथित विवादित ट्वीट के लिए उन्हें दोषी ठहराए जाने के मद्देनजर एक अधिवक्ता के तौर पर उनका पंजीकरण रद्द करने की कार्यवाही क्यों शुरू नहीं की जानी चाहिए. भूषण को 23 अक्टूबर को व्यक्तिगत तौर पर या वीडियो कांफ्रेंस के जरिए पेश होने का निर्देश दिया गया है. उन्हें नोटिस मिलने के बाद 15 दिन में बार काउंसिल को उत्तर देना होगा.

राज्य की बार काउंसिल ही एक व्यक्ति को वकालत करने का लाइसेंस प्रदान करती है. राज्य बार काउंसिल को ही अधिवक्ता कानून के तहत कतिपय परिस्थितियों में अपने सदस्य का वकालत करने का अधिकार निलंबित करने या इसे वापस लेने सहित व्यापक अधिकार प्राप्त हैं. दिल्ली बार काउंसिल ने नोटिस में कहा, ‘आपको सुनवाई के लिए व्यक्तिगत तौर पर या आपकी ओर से अधिकृत वकील के जरिए काउंसिल के कार्यालय में 23 अक्टूबर को शाम चार बजे पेश होना होगा. आप अपनी सुविधा के अनुसार व्यक्तिगत रूप से या वीडियो कांफ्रेंस के जरिए पेश हो सकते हैं.’




साथ ही नोटिस में कहा गया है कि, ‘आपको यह पत्र मिलने के बाद 15 दिन में काउंसिल को यह बताना होगा कि सवालों के घेरे में आए आपके ट्वीट और उच्चतम न्यायालय द्वारा अवमानना की याचिका के तहत दोषसिद्धि के मद्देनजर आपके खिलाफ वकील कानून की धारा 35 और धारा 24ए (पंजीकरण रद्द करना) के तहत कार्यवाही क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए.’

भूषण ने बुधवार सुबह ट्वीट करके नोटिस मिलने की बात स्वीकार की. काउंसिल ने कहा कि यदि भूषण उसके सामने तय तारीख को पेश नहीं होते हैं, तो ‘एकपक्षीय’ कार्यवाही की जाएगी. सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने न्यायपालिका के प्रति अपमानजनक ट्वीट करने के कारण प्रशांत भूषण को 14 अगस्त को आपराधिक अवमानना का दोषी
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