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प्रशांत किशोर की टीम को त्रिपुरा में होटल छोड़ने से रोका गया, TMC ने भाजपा पर साधा निशाना

प्रशांत किशोर की आईपीएसी की टीम को त्रिपुरा के होटल से बाहर निकलने से रोका गया. (ANI/26 July 2021)

प्रशांत किशोर की आईपीएसी की टीम को त्रिपुरा के होटल से बाहर निकलने से रोका गया. (ANI/26 July 2021)

Prashant Kishor IPAC Team: आईपीएसी स्टाफ की हिरासत को लेकर तृणमूल कांग्रेस महासचिव और पार्टी सांसद एवं ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने भाजपा पर निशाना साधा.

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    कोलकाता. चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की आईपीएसी (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) की एक टीम को कथित तौर पर त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में उनके होटल से बाहर निकलने से रोक दिया गया है. आईपीएसी की टीम यहां बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के लिए कुछ सर्वेक्षण करने आई थी. संगठन के सूत्रों की मानें, तो त्रिपुरा पुलिस सुबह से होटल की लॉबी और बाहर में डेरा डाले हुए है और आईपीएसी टीम के 22 सदस्यों में से किसी को भी परिसर से बाहर नहीं जाने दे रही है.


    समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से कहा, 'रविवार रात में पूर्वी अगरतला पुलिस ने त्रिपुरा के अगरतला स्थित होटल वुडलैंड पार्क में ठहरे प्रशांत किशोर के I-PAC के 23 सदस्यों की एक टीम को हिरासत में लिया है. उनसे पूछताछ की जा रही है और पुलिस ने चेतावनी दी है कि राज्य छोड़ने के लिए हवाईअड्डे जाने के अलावा होटल से बाहर न निकलें.'


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    आईपीएसी के कर्मचारी तृणमूल कांग्रेस के लिए राजनीतिक स्थिति और संभावित समर्थन आधार का आकलन करने के लिए अगरतला में थे. भाजपा शासित राज्य त्रिपुरा में 2023 में विधानसभा चुनाव होने हैं. पुलिस ने आईपीएसी के स्टाफ को हिरासत में रखने के लिए कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई है, केवल दावा किया है कि आईपीएसी टीम ने कोविड के मानदंडों का उल्लंघन किया है. दूसरी ओर, आईपीएसी के सूत्रों ने कहा कि टीम के पास कोविड से संबंधित सभी जरूरी कागजात हैं.


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    आईपीएसी स्टाफ के नजरबंदी की खबर उस वक्त आई जब सोमवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दिल्ली पहुंचीं. तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने 2024 के लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी सरकार को सत्ता से बेदखल करने के लिए विपक्षी एकता का आह्वान किया है, जिसमें प्रशांत किशोर स्पष्ट रूप से अहम भूमिका निभा रहे हैं. प्रशांत किशोर विधानसभा चुनावों में भी ममता के चुनावी रणनीतिकार थे.


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    आईपीएसी स्टाफ की हिरासत को लेकर तृणमूल कांग्रेस महासचिव और पार्टी सांसद एवं ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने भाजपा पर निशाना साधा. उन्होंने ट्वीट किया, 'त्रिपुरा की जमीन पर तृणमूल कांग्रेस के कदम रखने से पहले ही भाजपा की राज्य ईकाई में डर को साफ तौर पर देखा जा सकता है. वे बंगाल में हमारी जीत से इतने बौखला गए हैं कि उन्होंने अब 23 आईपीएसी कर्मचारियों को नजरबंद कर दिया है. इस देश में भाजपा के कुशासन में लोकतंत्र एक हजार मौतें मरता है!'




    वहीं, पुलिस का कहना है कि होटल में टीम से पूछताछ नियमित जांच का हिस्सा थी. समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया ने पश्चिम त्रिपुरा के पुलिस अधीक्षक माणिक दास के हवाले से कहा, 'बाहरी लोग - लगभग 22 व्यक्ति - विभिन्न स्थानों पर घूम रहे थे. चूंकि कोविड प्रतिबंध लागू हैं, इसलिए हम उनके आने और शहर में रहने के कारणों की सत्यता को परखने के लिए पूछताछ कर रहे हैं. उन सभी का सोमवार को कोविड परीक्षण किया गया, रिपोर्ट आनी अभी बाकी है. कोरोना परीक्षण के परिणाम और टीम की जांच के नतीजे मिलने के बाद, उनकी रिहाई पर निर्णय लिया जाएगा.'


    तृणमूल की राज्य इकाई के प्रमुख आशीष लाल सिंघा ने इसे 'लोकतंत्र पर हमला' बताया. पीटीआई ने उनके हवाले से कहा, 'त्रिपुरा का निवासी होने के नाते, मैं हैरान हूं. यह त्रिपुरा की संस्कृति नहीं है. त्रिपुरा में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के कुशासन के कारण टीएमसी को मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया और समर्थन से भाजपा घबरा गई है.'

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