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West Bengal Elections: बंगाल में बीजेपी के खिलाफ TMC को जिताने के लिए क्या कर रहे हैं प्रशांत किशोर

बंगाल चुनाव में अहम है प्रशांत किशोर की भूमिका. (File pic)
बंगाल चुनाव में अहम है प्रशांत किशोर की भूमिका. (File pic)

West Bengal Assembly Elections 2021: चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prasanth Kishore) इस बार बंगाल में बीजेपी से टक्‍कर लेने के लिए मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए अहम भूमिका निभा रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 10, 2021, 8:52 AM IST
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नई दिल्‍ली. पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections 2021) होने में करीब दो महीने का समय और बचा है. इस चुनाव को लेकर इस बार बीजेपी (BJP) और टीएमसी (TMC) के बीच कड़ा मुकाबला है. वहीं चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prasant Kishore) इस बार बंगाल में बीजेपी से टक्‍कर लेने के लिए मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के लिए अहम भूमिका निभा रहे हैं. उम्मीदवार चयन की भी अटकलों के बीच प्रशांत किशोर की इंडियन पॉलिटिकल एक्‍शन कमेटी या IPAC का कहना है कि वह सत्ताधारी दल के बल को बढ़ाने के लिए काम कर रही है. किशोर की टीम टीएमसी के 'कवच' में आई दरार की पहचान करने, इसकी रणनीतिक कमियों को दूर करने तथा पार्टी के दूर जा रहे वोटरों को वापस अपने पाले में लाने की रणनीति पर काम हो रही है.

इनमें से सबसे ज्यादा अहम है, दूर चले गए वोटरों को वापस पाने की कोशिश, क्‍योंकि बीजेपी लगातार जनजाति बहुल इलाकों में अपनी पैठ बना रही है. 2019 में राज्य के पश्चिमी और उत्‍तरी हिस्‍सों में स्थित अनुसूचित जाति/जनजाति और आदिवासी वोट बीजेपी के खाते में गए थे. इससे बीजेपी को 18 संसदीय सीट जीतने में मदद मिली थी.

प्रशांत किशोर की कोशिश यही है कि तृणमूल कांग्रेस का संदेश इन लोगों तक बड़े स्‍तर पर पहुंचे. काफी हद तक यह कुछ कार्यक्रमों के जरिये हो रहा है, जिसमें मध्‍य स्‍तर और जिला स्‍तर के नेता सीधे मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी से बातचीत करते हैं.



टीएमसी को अनुसूचित जाति/जनजाति के नेताओं तक पहुंचने के लिए आयोजित किए गए ऐसे ही एक कार्यक्रम में मुख्‍यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने कहा था, 'मैं अनुसूचित जाति/जनजाति और आदिवासी समुदाय के अपने भाई से अपील करती हूं. वे (बीजेपी) आपकी कई सीटे जीते चुके हैं. उन्‍होंने जंगलमहल और उत्‍तरी बंगाल में जीत हासिल की. उनके कई नेता सांसद बने. लेकिन उन्‍होंने आपको क्‍या दिया?'
इस कार्यक्रम में वही संदेश दिया गया जो टीएमसी देना चाहती थी. ममता बनर्जी की अहम योजना 'द्वारे सरकार' के तहत अब तक अनुसूचित जाति/जनजाति के लोगों को 10 लाख जाति प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं. तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि यहां आईपीएसी की भूमिका अहम हो जाती है.

आईपीएसी टीएमसी के अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के नेताओं के साथ कम करके अनुसूचित जाति/जनजाति वोटों को वापस टीएमसी के खाते में लाना चाहती है, जिन पर बीजेपी की नजरें हैं.
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