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बंगाल उपचुनाव: प्रशांत किशोर और तेलुगु वोटर्स ने बदली ममता की किस्मत

News18Hindi
Updated: November 30, 2019, 9:52 AM IST
बंगाल उपचुनाव: प्रशांत किशोर और तेलुगु वोटर्स ने बदली ममता की किस्मत
कहा जा रहा है कि चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की मेहनत भी ममता बनर्जी की पार्टी के लिए रंग लाई

बंगाल उपचुनाव (Bengal Bypolls) में इस बार ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की पार्टी TMC ने धमाकेदार जीत दर्ज कर विरोधियों को ये संदेश दे दिया है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में भी उनका ही दबदबा रहेगा.

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  • Last Updated: November 30, 2019, 9:52 AM IST
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(सुजीत नाथ)

कोलकाता. पश्चिम बंगाल में पिछले दिनों हुए उपचुनाव (Bengal Bypolls) में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की पार्टी ने ज़ोरदार प्रदर्शन करते हुए तीनों सीटों पर कब्जा जमाया. ये सीटें हैं खड़गपुर, करीमपुर और कलियागंज. इससे पहले कलियागंज सीट पर ही केवल तृणमूल कांग्रेस (TMC) का कब्जा था, जबकि खड़गपुर सीट बीजेपी तथा करीमपुर सीट कांग्रेस के पास थी. छह महीने पहले लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने इन इलाकों में टीएमसी को कड़ी टक्कर दी थी. तो आखिर इन छह महीनों में ऐसा क्या हुआ जो ममता बनर्जी ने यहां की बाज़ी पलट दी.

खड़गपुर में रेलवे के निजीकरण का मुद्दा
टीएमसी ने खड़गपुर सदर में रेलवे के निजीकरण का मुद्दा उठाया. यहां इस मुद्दे को लेकर गैर-बंगाली वोटर्स खासकर तेलुगु भाषी लोग खासे नाराज़ थे और ममता की पार्टी ने इसे भुनाने की कोशिश की. खड़गपुर सदर विधानसभा क्षेत्र में करीब 2.24 लाख वोटर्स हैं, जिसमें से करीब एक लाख गैर-बंगाली और तेलुगु हैं. यहां रहने वाले ज़्यादातर लोग रेलवे में काम करते हैं.

कलियागंज में NRC का मुद्दा
कलियागंज में टीएमसी ने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी NRC का मुद्दा उठाया. लोगों को बताया गया कि केंद्र सरकार अब असम के बाद यहां भी NRC लाने वाली है. यहां टीएमसी ने बड़े-बड़े होर्डिंग्स, पोस्टर्स लगवाकर लोगों को NRC से होने वाले नुकसान के बारे में बताया. लोगों को ये बताने की कोशिश की गई ममता बनर्जी NRC के सख्त खिलाफ है.

TMC को कड़ी टक्कर
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हालांकि यहां ममता बनर्जी की पार्टी को बड़े अंतर से जीत नहीं मिली. दरअसल इन इलाकों में 50 फीसदी जनसंख्या में राजबोंशी समुदाय के लोग रहते हैं और ये सब यहां NRC लाने के पक्ष में हैं. यहां टीएमसी के तपन देब सिंघा ने बीजेपी के उम्मीदवार कमल चंद्र सरकार को 2304 वोटों से हराया.

20% वोट का स्विंग
धमाकेदार जीत के बाद टीएमसी की इंटरनल रिव्यू में बताया गया कि पार्टी को खड़गपुर सदर और कलियागंज में करीब 60-70 हज़ार वोटों का स्विंग मिला. यानी पार्टी करीब 20 फीसदी वोट खींचने में कामयाब रही. खड़गपुर की सीट पर हमेशा कांग्रेस का दबदबा रहा है. यहां कांग्रेस के ज्ञान सिंह सोहनपाल को 1982 से लगातार जीत मिली है.

जीत का अंतर
साल 2016 में यहां बीजेपी के दिलिप घोष ने सोहनपाल को 6000 वोटों से हराया था. घोष को 2019 के लोकसभा सीट में भी 44961 सीटों से जीत मिली थी. कलियागंज में टीएमसी के प्रदीप सरकार ने बीजेपी के परमानंद झा को 20788 वोटों से हराया. करीमपुर में टीएमसी ने अपनी बादशाहत कामय रखते हुए 23910 वोटों से जीत दर्ज की.

प्रशांत किशोर का कमाल
कहा जा रहा है कि चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की मेहनत भी ममता बनर्जी की पार्टी के लिए रंग लाई. किशोर ने सभी पक्षों की नाराज़गी दूर की. वो उन सब को एक साथ मंच पर ले कर आए जो पार्टी से दूर चले गए थे. उन्‍होंने ममता बनर्जी को आलोचना करने से बचने और विवादों से दूर रहने की सलाह दी थी. उन्‍होंने कहा था कि ममता बनर्जी को खासतौर से पीएम नरेंद्र के खिलाफ कुछ भी विवादित बयान देने से बचना है. पीके ने ममता बनर्जी की प्राथमिकताओं में बदलाव कराया. साथ ही चुनाव के बजाय सुशासन पर ध्‍यान देने को कहा.

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First published: November 30, 2019, 9:07 AM IST
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