केंद्रीय मंत्री बोले- NPR में पूर्वजों के मूल निवास के बारे में जानकारी देना जरूरी, ये है इसकी वजह

केंद्रीय मंत्री बोले- NPR में पूर्वजों के मूल निवास के बारे में जानकारी देना जरूरी, ये है इसकी वजह
सारंगी ने कहा, ' मुझे लगता है कि एनपीआर अद्यतन के दौरान व्यक्तियों को पूर्वजों की जानकारी देने जरूरी है. (फाइल फोटो)

सारंगी ने कहा कि लोग पाकिस्तान या बांग्लादेश (Pakistan or Bangladesh) से आने के बाद यहां अपने मूल निवास को गुप्त रखकर लाभ उठा सकते हैं.

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भुवनेश्वर. भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री प्रताप सारंगी (Pratap Sarangi) ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी (NPR) को अपडेट करने के दौरान सबको अपने पूर्वजों के मूल निवास के बारे में जानकारी देना जरूरी है, क्योंकि इसका संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा से है. सारंगी के बयान से कुछ घंटे पहले बीजद के वरिष्ठ सांसद पिनाकी मिश्रा (Pinaki Mishra) ने कहा था कि मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के नेतृत्व वाली पार्टी एनपीआर में लोगों के माता-पिता के जन्मस्थान के बारे में सवाल पूछने वाले प्रावधान का विरोध करती है.

सारंगी ने कहा, 'मुझे लगता है कि एनपीआर अपडेट के दौरान व्यक्तियों को पूर्वजों की जानकारी देने जरूरी है. लोग पाकिस्तान या बांग्लादेश से आने के बाद यहां अपने मूल निवास को गुप्त रखकर लाभ उठा सकते हैं. उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, 'इससे भविष्य में समस्याएं पैदा हो सकती हैं. यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए इस मोर्चे पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए. ये मेरा विचार है.'



प्रावधान के विरोध में है
लोकसभा में बीजद संसदीय दल के नेता पिनाकी मिश्रा ने पहले कहा था कि ओडिशा सरकार एनपीआर को अपडेट करने के दौरान एक खंड को लागू नहीं करेगी जो व्यक्ति के माता-पिता के जन्मस्थान से संबंधित है. इस बीच, कांग्रेस नेता और कोरापुट के सांसद सप्तगिरि उल्का ने कहा, 'कांग्रेस व्यक्तियों से उनके माता-पिता के जन्म स्थान का उल्लेख करने के प्रावधान के विरोध में है. हम सीएए, एनआरसी के साथ-साथ एनपीआर के भी विरोध में हैं.'

अभी कोई जरूरत नहीं है
बता दें कि अभी पूरे देश में सीएए, एनआरसी और एनपीआर को लेकर विरोध हो रहा है. तमाम विपक्षी पार्टियों का कहना है कि एनपीआर की अभी कोई जरूरत नहीं है. वहीं, कुछ पार्टियों का कहना है कि एनपीआर में मात-पिता  या पूर्वजों के मूल निवास के बारे में जानकारी देना जरूरी नहीं होना चाहिए. क्योंकि देश के अधिकांश लोगों के पास जमीन नहीं है. ऐसे में उनके पूर्वजों के मूल निवास का कोई फ्रूव नहीं हैं.

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