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PRC के चलते रद्द हुआ अरुणाचल में होने वाला पहला इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल

PRC के चलते रद्द हुआ अरुणाचल में होने वाला पहला इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल

कर्फ्यू के बावजूद विरोध प्रदर्शनकारियों ने  वाहनों व सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया

कर्फ्यू के बावजूद विरोध प्रदर्शनकारियों ने वाहनों व सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया

स्थिति पर नियंत्रण पाने तक कर्फ्यू लगा दिया गया है और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं. विरोध के चलते प्रदर्शनकारियों ने सीएम और डिप्टी कमिश्नर के घर को आग लगा दी थी.

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    अरुणाचल सरकार द्वारा परमानेंट रेज़ीडेंट सर्टिफिकेट (पीआरसी) की घोषणा किए जाने के बाद इसका असर राजधानी इटानगर में होने वाले पहले इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल पर भी देखने को मिला. जिस जगह पर कार्यक्रम होना था उसके बाहर खड़े वाहनों को आग लगा दी गई और कुछ कलाकारों के म्यूज़िकल यंत्रों को भी जला दिया गया. इसकी वजह से कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया और कलाकारों को बचाकर वहां से बाहर निकाला गया.

    खराब स्थिति को देखते हुए अरुणाचल के मुख्य सचिव सत्य गोपाल ने कहा कि नामसाई और चांगलांग जिले के गैर अरुणाचल प्रदेश की जनजातियों को पीआरसी देने पर हुए बवाल के चलते अभी इस कार्यक्रम को रोक दिया गया है.

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    स्थिति पर नियंत्रण पाने तक कर्फ्यू लगा दिया गया है और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं. विरोध के चलते प्रदर्शनकारियों ने सीएम और डिप्टी कमिश्नर के घर को आग लगा दी थी. इस दौरान प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सुरक्षाबलों द्वारा की गई फायरिंग में एक व्यक्ति की मौत भी हो गई थी.

    वरिष्ठ कांग्रेस नेता टकम संजय ने कहा, 'बीजेपी इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है. जब पूरा राज्य जल रहा है तब गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू के पास हिंसा को खत्म करने के लिए समय नहीं है.' हालांकि, राज्य में शांति बहाली के लिए गृह मंत्रालय ने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के 10 कंपनियों को भेजा है. आधिकारिक तौर पर जारी एक बयान में कहा गया है कि राज्य में जारी हिंसा को रोकने के मद्देनजर 1,000 जवानों की तैनाती की गई है.

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    बता दें कि जॉइंट हाई पॉवर कमेटी ने सभी स्टेकहोल्डर्स से बातचीत के बाद छह समुदायों को परमानेंट रेसिडेंट सर्टिफिकेट (पीआरसी) देने की सिफारिश की है. ये छह समुदाय राज्य के मूल निवासी नहीं हैं. हालांकि, दशकों से नामसाय और चांगलांग जिलों में रह रहे हैं.

    बता दें कि पीआरसी का मुद्दा पिछले साल दिसंबर से गरमाया था जब राज्य सरकार ने घोषणा की थी कि मोरान, देउरी, मिशिंग, सोनोवाल सहित छह जनजातियों को पीआरसी दिया जाएगा. पिछले शुक्रवार को उस वक्त फिर से हिंसा शुरू हो गई जब सरकार इसके मद्देनज़र बिल लेकर आई.

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    Tags: Arunachal pradesh, Bihar Violence, Muzaffarnagar Riots

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