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SC/ST एक्‍ट के मामलों में अग्रिम जमानत के प्रावधान को बरकरार रख सकता है सुप्रीम कोर्ट

News18India
Updated: October 4, 2019, 12:09 PM IST
SC/ST एक्‍ट के मामलों में अग्रिम जमानत के प्रावधान को बरकरार रख सकता है सुप्रीम कोर्ट
एससी/एसटी एक्‍ट पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है.

सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने 3 अक्‍टूबर को हुई सुनवाई में एससी-एसटी एक्ट (SC ST ACT) के मामले को लेकर दाखिल याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.

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  • Last Updated: October 4, 2019, 12:09 PM IST
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नई दिल्‍ली. सुप्रीम कोर्ट (supreme court) एससी/एसटी एक्‍ट (SC/ST ACT) के अंतर्गत आने वाले मामलों में अग्रिम जमानत (Anticipatory bail) के प्रावधान को बरकरार रख सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने 3 अक्‍टूबर को हुई सुनवाई में एससी-एसटी एक्ट के मामले को लेकर दाखिल याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. बता दें कि 20 मार्च, 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट में बदलाव करते हुए तुरंत गिरफ्तारी पर रोक हटा दी थी. उस वक्त सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पहले जांच होगी और फिर गिरप्तारी होगी. लेकिन 1 अक्‍टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने अपने इस फैसले को पलट दिया था.

1995 के फैसले पर गौर
संशोधित कानून के मुताबिक यह साफ है कि इन मामलों में अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने 1995 के एक केस पर गौर किया ताकि अपवाद को हटाया जा सके. 1995 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि अग्रिम जमानत के खिलाफ एक्‍ट के सेक्‍शन 18 के अंतर्गत लगी रोक को तब तक नहीं हटाया जा सकता, जब तक एससी/एसटी के लोगों के खिलाफ अत्याचार का कोई प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता है.

एक अक्‍टूबर को हुई थी सुनवाई

एक अक्‍टूबर को कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि कोर्ट का सुसंगत विचार यह है कि अगर प्रथम दृष्टया मामला 1989 के एससी/एसटी अधिनियम के प्रावधानों के तहत नहीं आता है, तो उस मामले में अग्रिम जमानत के अनुदान पर सेक्‍शन 18 के तहत बनाई गई रोक लागू नहीं होती है. इस प्रकार अधिनियम के प्रावधानों का दुरुपयोग उपरोक्त निर्णय द्वारा ध्यान में रखा जाना है'

जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने हाल ही में इस फैसले पर जोर दिया. जबकि अधिनियम के तहत शिकायतों की प्रारंभिक जांच और गिरफ्तारी प्राधिकरण की मंजूरी पर अदालत के पिछले फैसलों पर भी गौर किया. गुरुवार को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निरोधक अधिनियम के तहत आरोपी की गिरफ्तारी से पहले जमानत के प्रावधान को हटाना गैरजरूरी है.

ललिता कुमारी केस पर भी गौर
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एक और स्पष्टीकरण ललिता कुमारी केस में संवैधानिक पीठ के फैसले के बारे में भी है. ललिता कुमारी केस में बड़ी बेंच ने माना था कि पुलिस 'असाधारण' परिस्थितियों में प्रारंभिक जांच कर सकती है और यहां तक कि उन मामलों में जांच कर सकती है जिनमें एफआईआर दर्ज की गई है. इसका मतलब यह नहीं कि संबंधित अभियुक्तों की तुरंत गिरफ्तारी की जाएगी.

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First published: October 4, 2019, 11:52 AM IST
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