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20 राज्यों में प्री-मानसून बारिश बेहद कमजोर, मौसम से लेकर फसलों पर ये होगा असर

20 राज्यों में प्री-मानसून बारिश बेहद कमजोर, मौसम से लेकर फसलों पर ये होगा असर

मानसून पूर्व बारिश से भारत की सालाना बारिश का 11 फीसद कोटा पूरा होता है. (फाइल फोटो)

मानसून पूर्व बारिश से भारत की सालाना बारिश का 11 फीसद कोटा पूरा होता है. (फाइल फोटो)

pre monsoon rain impact crops: मानसून पूर्व बारिश से भारत की सालाना बारिश का 11 फीसद कोटा पूरा होता है लेकिन इस बार 1 मार्च से 25 अप्रैल के बीच 20 राज्यों में बेहद कम बारिश हुई है. कई रिवर बेसिन में तो बिल्कुल भी बारिश नहीं हुई. जानकारों का कहना है कि इसकी वजह से गर्म हवाएं ज्यादा चल रही हैं. मौसमी सब्जियां, फल खराब हो गए हैं. गन्ने और कपास की फसलें प्रभावित हो रही हैं. खरीफ की बुवाई पर भी असर पड़ सकता है.

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    नई दिल्लीः देश में इस साल भी मानसून भले ही सामान्य रहने का अनुमान जताया गया हो, लेकिन प्री-मानसून यानी मानसून के पहले होने वाली बारिश बेहद कम रही है. भारतीय मौसम विभाग के 1 मार्च से 25 अप्रैल तक के डाटा पर गौर करें तो भारत के 20 राज्यों में मानसून से पहले की बारिश में अत्यधिक कमी दर्ज की गई है. जानकारों का कहना है कि प्री मानसून बारिश में कमी का असर मौसमी फल-सब्जियों के अलावा खरीफ फसल की बुवाई और बांधों में पानी के जलस्तर पर भी पड़ने का खतरा पैदा हो गया है.

    मानसून पूर्व बारिश से भारत की सालाना बारिश का 11 फीसद कोटा पूरा होता है. लेकिन इस बार कई रिवर बेसिन (नदी घाटी) में बिल्कुल भी बारिश नहीं हुई है या फिर कई क्षेत्रों में भारी कमी रही है. मौसम विभाग का डाटा बताता है कि महाराष्ट्र के रिवर बेसिन में 24 अप्रैल तक या तो बिल्कुल बारिश नहीं हुई, या फिर बेहद कम बारिश हुई है. आंकड़ों में देखें तो इस सीजन में यहां प्री-मानसूनी बारिश में 60 से 100 फीसदी तक की कमी आई है.

    TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, जानकारों का कहना है कि मानसून पूर्व होने वाली इस बारिश का असर वातावरण के साथ साथ कृषि क्षेत्र में देखने को मिला है. गर्म हवाएं ज्यादा चल रही हैं. तापमान वक्त से पहले बढ़ चुका है. इसकी वजह से मौसमी सब्जियां और फल खराब हो गए हैं. गन्ने और कपास की फसलें भी इसकी वजह से प्रभावित हो रही हैं. इनके अलावा खरीफ की बुवाई पर भी असर देखने को मिल सकता है.

    रिवर बेसिन में बारिश की कमी से बांधों से पानी की आपूर्ति के लिए ज्यादा दबाव बन सकता है. मौसम विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने TOI से कहा कि बारिश नहीं होने से लोगों की जरूरतें पूरी करने के लिए और खेतों में पानी की आपूर्ति के लिए डैम पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है. उसके जलस्तर में भी उल्लेखनीय कमी आ सकती है. प्री मानसून बारिश में कमी से किसानों की पानी के मौजूदा स्रोतों पर निर्भरती बढ़ जाती है. इसका असर स्रोतों में जलस्तर की गिरावट के रूप में दिखता है.

    मानसूनी बारिश की बात करें तो भारतीय मौसम विभाग (IMD) का आंकलन है कि देश में लगातार चौथे साल यानी 2022 में भी मानसून सामान्य रहने की उम्मीद है. IMD के अनुसार, इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान 1971-2020 की अवधि के 87 सेंटीमीटर दीर्घावधि औसत (एलपीए) के मुकाबले 96 से 104 प्रतिशत बारिश होने की संभावना है. मानसून के बारे में मौसम विभाग मई के आखिर में लेटेस्ट अपडेट जारी करेगा.

    Tags: Kharif crop, Monsoon, Pre Monsoon Rain

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