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मोदी सरकार ने 5 साल में 96 भ्रष्‍ट अधिकारियों को जबरन रिटायर किया

भाषा
Updated: November 28, 2019, 6:30 PM IST
मोदी सरकार ने 5 साल में 96 भ्रष्‍ट अधिकारियों को जबरन रिटायर किया
कार्मिक राज्य मंत्री डॉ जितेन्द्र सिंह ने कहा कि 96 भ्रष्‍ट अधिकारियों को समय से पहले रिटायर किया गया है.

नरेंद्र मोदी सरकार (PM Narendra Modi) ने भ्रष्‍ट अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई की है. कार्मिक राज्य मंत्री डॉ जितेन्द्र सिंह (Union Minister of State Dr Jitendra Singh) ने कहा कि 96 भ्रष्‍ट अधिकारियों को जबरन रिटायर किया गया है.

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नई दिल्‍ली. सरकार (Government) ने गुरुवार को बताया कि पिछले पांच साल में करीब 96 भ्रष्ट अधिकारियों को जनहित में समयपूर्व सेवानिवृत्ति दी गई. कार्मिक राज्य मंत्री डॉ जितेन्द्र सिंह (Union Minister of State Dr Jitendra Singh) ने राज्यसभा (Rajya Sabha) को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि 96 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है.

जितेंद्र सिंह ने कहा, ' 21 नवंबर 2019 तक की स्थिति के अनुसार जुलाई, 2014 से अक्टूबर 2019 तक सत्यनिष्ठा पोर्टल पर अपलोड की गई सूचना तथा आंकड़ों के मुताबिक विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों के कुल 96 अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही की गई है. उन्होंने बताया कि इन 96 भ्रष्ट अधिकारियों को जनहित में समयपूर्व सेवानिवृत्ति दी गई.

जितेंद्र सिंह ने बताया कि मूल नियम (एफआर), 56(जे)(एल), केंद्रीय सिविल सेवा (सीसीएस, पेंशन) नियमावली 1972 के नियम 48 के प्रावधानों के अनुसार, सरकार के पास लोकहित में सत्यनिष्ठा की कमी और अकुशलता के आधार पर सरकारी कर्मियों को समय से पहले सेवानिवृत्त करने का पूरा अधिकार है. मंत्री ने कहा, 'ये नियम सरकारी सेवकों की समय समय पर समीक्षा और समय पूर्व सेवानिवृत्ति की नीति तय करते हैं जो एक सतत प्रक्रिया है.'

इनकम टैक्स विभाग के 21 अफसरों को जबरन रिटायर किया

अभी दो दिन पहले ही सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोपित टैक्स अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखते हुए 21 को जबरन रिटायर करने का फैसला लिया है. ये सभी अफसर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (Income Tax Department) के हैं. इस साल जून के बाद यह पांचवां मौका है जब सरकार ने भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें जबरन रिटायर किया है. इससे सरकार ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार और अक्षमता के खिलाफ उसकी कार्रवाई जारी रहेगी.

इस नियम के तहत हुई कार्रवाई- सेंट्रल सिविल सर्विसेज 1972 के नियम 56 (J) के हिसाब से 30 साल तक सेवा पूरी कर चुके या 50 साल की उम्र पर पहुंच चुके अधिकारियों की सेवा सरकार समाप्त कर सकती है.

(I) उन्हें नोटिस और तीन महीने के वेतन-भत्ते देकर घर भेजा जा सकता है. ऐसे अधिकारियों के काम की हर तीसरे महीने समीक्षा की जाती है और अगर उन पर भ्रष्टाचार या अक्षमता/अनियमितता के आरोप पाए जाते हैं तो जबरन रिटायरमेंट दिया जा सकता है.
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(II) सरकार के पास यह विकल्प दशकों से मौजूद है, लेकिन अब तक गंभीरता से इस पर कारवाई नहीं की जाती थी. मोदी सरकार में भी साल 2014, 2015 और 2017 में इस नियम पर गंभीरता से अमल करने के आदेश दिए गए, इस टर्म में सरकार अब कमर कसकर इसे लागू कराने के प्रयास में जुटी है.

(III) इस नियम में अब तक ग्रुप ए और बी के अधिकारी ही शामिल थे, अब ग्रुप सी के अधिकारी भी इसमें आ गए हैं. केंद्र सरकार ने सभी केंद्रीय संस्थानों से इस बारे में मासिक रिपोर्ट मंगाना शुरू कर दिया है. सरकार के जरिए ऐसे अधिकारियों को अनिवार्य रिटायरमेंट दिया जा सकता है. ऐसा करने के पीछे सरकार का मकसद नॉन-परफार्मिंग सरकारी सेवक को रिटायर करना होता है.

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First published: November 28, 2019, 6:27 PM IST
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