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राष्ट्रपति कोविंद ने पेश की दोस्ती की मिसाल, भीड़ में दोस्त को देख लगाया गले

News18Hindi
Updated: December 10, 2019, 8:58 AM IST
राष्ट्रपति कोविंद ने पेश की दोस्ती की मिसाल, भीड़ में दोस्त को देख लगाया गले
उत्कल विश्वविद्यालय का प्लेटिनम जुबली समारोह

उत्कल विश्वविद्यालय के प्लेटिनम जुबली समारोह के दौरान दोस्ती की मिसाल देते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ram Nath Kovind) ने लोगों की भीड़ में अपने दोस्त को देख सब कुछ भूल उन्हें स्टेज पर बुला गले लगा लिया.

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  • Last Updated: December 10, 2019, 8:58 AM IST
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भुवनेश्वर. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ram Nath Kovind) ने उत्कल विश्वविद्यालय (Utkal University) के प्लेटिनम जुबली समारोह के दौरान दोस्ती की मिसाल पेश की. उन्होंने लोगों की भीड़ में अपने दोस्त को देख सब कुछ भूल उसे स्टेज पर बुला गले लगा लिया. दरअसल बात कुछ ऐसी है कि राष्ट्रपति कोविंद 8 दिसंबर को ओडिशा के उत्कल विश्वविद्यालय के प्लेटिनम समारोह में हिस्सा लेने गए थे, जहां उनकी मुलाकात अपने एक प्रिय मित्र से हो गई.

ऐसा रहा दोनों दोस्त का मिलन
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को उनके नरम स्वभाव के लिए ही जाना जाता है. सोमवार को उन्होंने समापन समारोह के दौरान लोगों की भीड़ में अपने एक पुराने मित्र को पहचान लिया. बिना सोचे समझे उन्होंने वहीं बैठे केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) से अपने मित्र को स्टेज पर लाने के लिए कहा. मित्र के स्टेज पर आते ही राष्ट्रपति ने उसे गले से लगा लिया. यह सब देख वहां मौजूद लोग भी आश्चर्य से देख खुश हो गए.

आखिर कौन है ये मित्र

इस समारोह में ओडिशा के पूर्व राज्यसभा सदस्य बीरभद्र सिंह मौजूद थे, जो राष्ट्रपति के करीब 12 साल पुराने मित्र हैं. बीरभद्र सिंह 2000 से 2006 तक राज्यसभा में एससी/एसटी के सदस्य थे, जहां उन्होंने राष्ट्रपति के साथ काम किया था. जैसे ही स्टेज पर आये तो दोनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा, दोनों मित्रों ने एक दूसरे को गले लगा लिया और एक साथ फोटो भी खिंचवाए. बीरभद्र सिंह ने बताया कि वो दोनों 12 साल बाद एक दूसरे से मिल रहें हैं.


समारोह के दौरान कही ऐसी बात
उत्कल विश्वविद्यालय की प्लेटिनम जुबली के समापन समारोह में राष्ट्रपति ने कहा कि विश्वविद्यालय कोई 'आइवरी टॉवर' नहीं होते बल्कि यह विचारों के महान केंद्र होते हैं. यह समाज का हिस्सा होते हैं, इसलिए इन्हें सामाजिक बदलाव का हिस्सा बनना चाहिए. उन्होंने कहा कि शिक्षक समुदाय को ऐसे शोधों का हिस्सा बनना चाहिए जो न केवल नए ज्ञान का सृजन करें बल्कि जो समाज को सहारा देने के भी काम आएं.

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First published: December 10, 2019, 8:32 AM IST
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