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पूर्व CJI रंजन गोगोई को राष्ट्रपति ने राज्यसभा के लिए किया नामित

News18Hindi
Updated: March 16, 2020, 10:33 PM IST
पूर्व CJI रंजन गोगोई को राष्ट्रपति ने राज्यसभा के लिए किया नामित
पूर्व CJI रंजन गोगोई को राष्ट्रपति ने राज्यसभा के लिए नामित किया है. (फाइल फोटो)

पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) को राज्यसभा के लिए नामित किया गया है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनित किया है.

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  • Last Updated: March 16, 2020, 10:33 PM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) को राज्यसभा के लिए नामित किया गया है. केंद्र सरकार की ओर से देर शाम जारी किए गए नोटिफिकेशन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (President Ramnath Kovind) ने पूर्व सीजेआई को राज्यसभा के लिए मनोनित किया है. गोगोई ने अयोध्या राम मंदिर समेत कई महत्वपूर्ण मामलों पर फैसला सुनाया था.

पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई का कार्यकाल 13 महीने रहा था. वह 3 अक्टूबर 2018 को भारत के 46वें चीफ जस्टिस बने थे. गोगोई 17 नवंबर 2019 को रिटायर हुए थे. उन्होंने पिछले साल 9 नवंबर को राम मंदिर पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया था.

पूर्व CJI रंजन गोगोई राज्यसभा के लिए किया गया मनोनित




इन अहम मुद्दों पर सुनाया था फैसला



पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने अपने रिटायरमेंट के पहले कई बड़े फैसले सुनाए थे, जिनमें से एक राफेल डील भी था. पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक से लेकर अयोध्या जैसे बड़े निर्णय लिए. ये ऐसे मुद्दे थे जो लंबे समय से चले आ रहे थे. 17 नवंबर 2019 को गोगोई का कोर्ट में आखिरी दिन था. जाते-जाते चीफ जस्टिस ने ऐसे ऐतिहासिक फैसले सुनाए जो लोगों को लंबे समय तक याद रहेंगे. उन्होंने मुस्लिम महिलाओं के हित को ध्यान में रखते हुए तीन तलाक पर फैसला सुनाया था. इसके अलावा सबरीमाला मंदिर, चीफ जस्टिस के ऑफिस को RTI के दायरे में लाने, सरकारी विज्ञापनों में नेताओं की तस्वीर पर पाबंदी और सरकारी विज्ञापन जैसे मामलों पर फैसला सुनाया था.

पूर्व चीफ जस्टिस के कामकाज के तरीके पर उठाए थे सवाल

सीजेआई गोगोई उन चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों में शामिल थे, जिन्होंने जनवरी 2018 में संवाददाता सम्मेलन कर तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाए थे. न्यायमूर्ति गोगोई और शीर्ष न्यायालय के तीन अन्य न्यायाधीशों न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर, न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ ने 12 जनवरी 2018 को अभूतपूर्व कदम उठाते हुये संवाददाता सम्मेलन कर आरोप लगाया था कि सुप्रीम कोर्ट में प्रशासन और मुकदमों का आवंटन सही तरीके से नहीं हो रहा.

सीजेआई के पद पर न्यायमूर्ति गोगोई का कार्यकाल विवादों से अछूता नहीं रहा. उन्हें यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना भी करना पड़ा था. हालांकि, वह इसमें पाक-साफ करार दिए गए. जस्‍टिस एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय एक आंतरिक जांच समिति ने उन्हें इस मामले में ‘क्लीन चिट’ दे दी थी.

जस्टिस गोगोई को अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद शीर्षक विवाद मामले पर उनके फैसले के लिए याद किया जाते हैं. सबरीमाला अयप्पा मंदिर में हर आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति देने के फैसले के खिलाफ समीक्षा याचिकाओं पर भी उन्होंने फैसला सुनाया था.

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First published: March 16, 2020, 9:25 PM IST
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