National Education Policy पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बोले- रट्टा मारने की आदत को कम करेगी यह नीति

कॉंफ्रेंस संबोधित करते राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
कॉंफ्रेंस संबोधित करते राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: उच्च शिक्षा के कार्यान्वयन' पर विजिटर्स कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कहा कि राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों में महिला छात्रों की हिस्सेदारी बेहद कम है. तकनीकी शिक्षा में उनकी हिस्सेदारी विशेष रूप से कम है. इसे दुरुस्त करने की जरूरत है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 19, 2020, 12:28 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ramnath Kovind) ने कहा है कि नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (National Education Policy) का उद्देश्य 21 वीं सदी की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में हमारी शिक्षा प्रणाली को पुनर्जीवित करना है. उन्होंने कहा कि यह सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देकर एक न्यायसंगत और जीवंत समाज विकसित करने की दृष्टि रखता है.

राष्ट्रपति कोविंद ने शनिवार को 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: उच्च शिक्षा के कार्यान्वयन' पर विजिटर्स कॉन्फ्रेंस ('Implementation of National Education Policy 2020: Higher Education' ) को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि 2.5 लाख ग्राम पंचायतों, 12,500 से अधिक स्थानीय निकायों और लगभग 675 जिलों में व्यापक भागीदारी के बाद राष्ट्रीय शिक्षा नीति तैयार की गई है. 2 लाख से अधिक सुझावों पर विचार किया गया है.

नवाचार के केंद्र हों उच्च शिक्षा के विश्वविद्यालय और संस्थान
राष्ट्रपति ने कहा कि -'मैं डॉ. आरपी निशंक, सांसद संजय धोत्रे भारत के शिक्षा मंत्रालय में संबंधित अधिकारी  और नीति निर्माण की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अन्य संस्थानों की सराहना करता हूं. इसके साथ ही एनईपी 2020 तैयार करने वाले डॉ. कस्तूरीरंगन और उनकी टीम विशेष प्रशंसा के पात्र हैं. एनईपी का मकसद है कि स्टूडेंट अंक या ग्रेड के लिए रटने की आदत को छोड़े. यह  समालोचनात्मक सोच और अन्वेषण की भावना को प्रोत्साहित करना चाहता है.
यह भी पढ़ें: स्टूडेंट्स से पीएम मोदी बोले- मार्कशीट को प्रेशरशीट ना बनाएं, दिया 5-C और 5-E का मंत्र



कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा- 'हमारी परंपरा में सीखने की जिज्ञासा को प्रोत्साहित किया जाता है. जिगिषा या किसी बहस या तर्क को जीतने की इच्छा से इसे सीखने की जिज्ञासा को अधिक महत्व दिया गया था.' उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा के विश्वविद्यालय और संस्थान नवाचार के केंद्र होने चाहिए. उन्हें राष्ट्रीय और स्थानीय समस्याओं का अभिनव समाधान प्रदान करना चाहिए. स्थानीय समस्याओं के समाधान प्रदान करने के लिए स्थानीय संसाधनों के सामुदायिक भागीदारी और उपयोग को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए.एनईपी 2020 के प्रभावी कार्यान्वयन से भारत को उसके शिक्षा के महान केंद्र होने का गौरव दोबारा मिल सकता है.

लचीलापन छात्रों के लिए बहुत उपयोगी- राष्ट्रपति
राष्ट्रपति ने कहा - भारत प्राचीन काल में विश्व स्तर पर सम्मानित शिक्षा केंद्र था. तक्षशिला और नालंदा के विश्वविद्यालयों को प्रतिष्ठित दर्जा प्राप्त था. लेकिन आज भारत के उच्च शिक्षा संस्थानों को वैश्विक रैंकिंग में उच्च स्थान प्राप्त नहीं है.

शैक्षणिक बैंक ऑफ क्रेडिट (एबीसी) पॉलिसी में एक प्रमुख बदलाव है जो छात्रों के लिए बहुत मददगार होगा. यह विभिन्न उच्च शिक्षा संस्थानों से अर्जित शैक्षणिक क्रेडिट को डिजिटल रूप से संग्रहीत करेगा ताकि छात्रों द्वारा हासिल किए गए क्रेडिट को ध्यान में रखते हुए डिग्री प्रदान की जा सके. यह छात्रों को उनकी व्यावसायिक, व्यावसायिक या बौद्धिक आवश्यकताओं के अनुसार पाठ्यक्रम लेने की अनुमति देगा. यह लचीलापन छात्रों के लिए बहुत उपयोगी होगा.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज