बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है देश: राष्ट्रपति

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार को कहा कि हमारे पास युवा और प्रतिभाशाली आबादी तथा अवसरों से लबरेज आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था है. पिछली तिमाही में हमारा सकल घरेलू उत्पाद बढ़कर 8.2 प्रतिशत हो गया.

भाषा
Updated: September 15, 2018, 10:23 PM IST
बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है देश: राष्ट्रपति
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (फाइल फोटो)
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Updated: September 15, 2018, 10:23 PM IST
राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने शनिवार को कर्नाटक लॉ सोसाइटी और राजा लाखामगौड़ा लॉ कॉलेज के अमृत महोत्सव समारोह में कहा कि देश के युवाओं की आकांक्षाएं तेजी से बदल रही हैं. देश बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है और आज लिए गए फैसले न सिर्फ निकट भविष्य, बल्कि शायद शेष सदी को भी प्रभावित करेंगे.

उन्होंने कहा, 'हमारे पास युवा और प्रतिभाशाली आबादी तथा अवसरों से लबरेज आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था है. पिछली तिमाही में हमारा सकल घरेलू उत्पाद बढ़कर 8.2 प्रतिशत हो गया, जो हमारी गति और क्षमता का भी संकेत देता है'. कोविन्द ने कहा कि चौथी औद्योगिक क्रांति के साथ हमारी जीवनशैली और कार्यशैली में बदलाव हुआ है और उसी तरह हमारे युवा लोगों की आकांक्षाएं हैं.

राष्ट्रपति ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को नवोन्मेष और उत्कृष्टता की खोज के अनुरूप होना चाहिए. सरकार इसे सुगम बनाने के लिए कदम उठा रही है और उच्च शिक्षा के लिए नियामक अवसंरचना को दुरुस्त करने तथा समकालीन आवश्यकताओं को पूरा करने की प्रक्रिया जारी है. उन्होंने कहा, 'मुझे विश्वास है कि इसका फल जल्द मिलेगा.'

उन्होंने कहा कि 60 शीर्ष विश्वविद्यालयों को श्रेणीकृत स्वायत्तता दी गई है और 20 उच्च शिक्षण संस्थानों को ‘श्रेष्ठता संस्थान’ के रूप में बढ़ावा देने का निर्णय भी किया गया है. एक प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के बाद हाल में कुछ श्रेष्ठता संस्थानों की घोषणा की गई. कोविन्द ने आगे कहा कि प्रकृति का कानून हर किसी को अनुशासन और सुव्यवस्था सिखाता है और मनुष्य द्वारा लिखा जाने वाला कानून सभ्यता का आधार है.

उन्होंने कहा कि कानून सिर्फ एक करियर नहीं, बल्कि इससे कहीं बढ़कर है. यह आजीविका से कहीं आगे है. यह गरीब से गरीब को न्याय उपलब्ध कराने में मदद करने तथा नियमों और मानदंडों से परिभाषित एक समाज एवं राष्ट्र का निर्माण करने वाला तंत्र है. कोविन्द ने महात्मा गांधी और भीमराव आंबेडकर के नामों का उल्लेख करते हुए उन्हें 'जनसेवा की भावना से ओतप्रोत वकील' करार दिया.
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