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बिना कैबिनेट की मंजूरी के इस नियम के तहत हटा महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन

News18Hindi
Updated: November 23, 2019, 9:33 PM IST
बिना कैबिनेट की मंजूरी के इस नियम के तहत हटा महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन
महाराष्ट्र के राज्यपाल के फैसले पर संविधान विशेषज्ञों ने अपनी-अपनी राय रखी है.

इस मामले में संविधान विशेषज्ञ (Constitution Specialist) मानते हैं कि किसे मुख्यमंत्री नियुक्त करना है यह राज्यपाल (Governor) के विवेक पर निर्भर करता है. वह अगर संतुष्ट हैं तो वह मुख्यमंत्री (CM) नियुक्त कर सकते हैं.

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  • Last Updated: November 23, 2019, 9:33 PM IST
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दिल्ली. महाराष्ट्र (Maharashtra) में अप्रत्याशित राजनीतिक घटनाक्रम के तहत राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने शनिवार की सुबह देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) को मुख्यमंत्री (CM) पद की शपथ दिलाई. राजभवन में उनके साथ ही अजीत पवार (Ajit Pawar) को उप मुख्यमंत्री (Deputy CM) पद के लिए शपथ दिला दी गई. जिसके साथ ही 1 महीने से महाराष्ट्र में चल रहे राजनीतिक गतिरोध का अंत हो गया.

लेकिन इस घटनाक्रम के बाद महाराष्ट्र (Maharashtra) में राजनीतिक आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर शुरू हो गया है. कांग्रेस (Congress) की ओर से ऐसे अचानक सरकार गठन की मंजूरी देने के लिए राज्यपाल (Governor) पर भी सवाल उठाए गए हैं.



बिना कैबिनेट की मंजूरी के हटाया गया राष्ट्रपति शासन

महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन हटाने के लिए कैबिनेट की मंजूरी नहीं ली गई. इसका निर्णय प्रधानमंत्री ने स्वयं लिया. भारत सरकार ( कार्य-संचालन) नियम (THE GOVERNMENT OF INDIA TRANSACTION OF BUSINESS RULES) के मुताबिक संविधान के अनुच्छेद 77 की तीसरी उपधारा के मुताबिक सरकार के कामकाज को बिना बाधा के चलाने के लिए राष्ट्रपति ने कुछ नियम बनाए थे.

राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद द्वारा ये नियम 4 जनवरी, 1961 को लागू किए गए थे. इन्हीं नियमों में 12वें नियम के मुताबिक प्रधानमंत्री (PM) किसी भी मामले या किसी भी वर्ग के मामले में अनुमति दे सकता है या नियमों से प्रस्थान कर सकता है. वह जिस हद तक इसे जरूरी समझता है (उस हद तक नियमों से प्रस्थान कर सकता है). इसी का प्रयोग करते हुए महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन हटाया गया.

राज्यपाल के निर्णय को नहीं दी जा सकती कोर्ट में चुनौती
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इस मामले में संविधान विशेषज्ञ (Constitution Specialist) पीडीटी आचार्य का कहना है कि किसे मुख्यमंत्री नियुक्त करना है यह राज्यपाल के विवेक पर निर्भर करता है वह अगर संतुष्ट हैं तो वह मुख्यमंत्री नियुक्त कर सकते हैं. आमतौर पर राज्यपाल विधायकों के हस्ताक्षर वाली चिट्ठी से बहुमत का फैसला करते हैं लेकिन यह कोई अनिवार्य शर्त नहीं है. राज्यपाल द्वारा अपने विवेक से लिए गए निर्णय को किसी कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती.

प्रोटेम स्पीकर भी करवा सकते हैं बहुमत परीक्षण
इन सभी विधायकों पर एंटी डिफेक्शन लॉ (Anti-Defection Law) लागू होगा लेकिन उसके बारे में फैसला विधानसभा स्पीकर को करना होता है तो यह महत्वपूर्ण होगा कि विधान सभा स्पीकर कौन होंगे. प्रोटेम स्पीकर के पास स्पीकर के सभी अधिकार होते हैं इसलिए अगर वह चाहें तो बहुमत परीक्षण भी करवा सकते हैं, जरूरी नहीं कि नए स्पीकर के चुनाव के बाद बहुमत परीक्षण हो.

सवेरे 05:47 बजे जारी किए गजट नोटिफिकेशन के जरिए हटा राष्ट्रपति शासन
बता दें कि राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी (Bhagat Singh Koshyari) ने सुबह एक समारोह में दोनों को शपथ दिलायी जहां केवल आधिकारिक मीडिया ही मौजूद रही. महाराष्ट्र में केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला के सवेरे 05:47 बजे जारी किए गजट नोटिफिकेशन के जरिए राष्ट्रपति शासन हटाया गया.

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First published: November 23, 2019, 5:39 PM IST
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