अपना शहर चुनें

States

शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री बोले- विश्व भारती के लिए गुरुदेव का विजन आत्मनिर्भर भारत का भी सार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

साल 1951 में विश्व भारती विश्वविद्यालय (Vishwa Bharati University) को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया था और उसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों में शुमार किया गया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 24, 2020, 12:37 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल (West Bengal) के शांतिनिकेतन स्थित विश्व भारती विश्वविद्यालय (Vishwa Bharati University) के शताब्दी समारोह को वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से संबोधित किया. इस कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ और केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक भी उपस्थित थे.

विश्वविद्यालय के पदेन कुलाधिपति प्रधानमंत्री ने इस मौके पर एक संबोधन में कहा कि विश्व भारती की सौ वर्ष की यात्रा बहुत विशेष है. विश्वभारती, मां भारती के लिए गुरुदेव के चिंतन, दर्शन और परिश्रम का एक साकार अवतार है. भारत के लिए गुरुदेव ने जो स्वप्न देखा था, उस स्वप्न को मूर्त रूप देने के लिए देश को निरंतर ऊर्जा देने वाला ये एक तरह से आराध्य स्थल है.

उन्होंने कहा कि विश्व भारती के 100 वर्ष होना प्रत्येक भारतीय के गौरव की बात है. मेरे लिए भी ये सौभाग्य की बात है कि आज के दिन इस तपोभूमि का पुण्य स्मरण करने का अवसर मिल रहा है.



पर्यावरण संरक्षण में विश्व का नेतृत्व कर रहा भारत- PM
पीएम ने कहा कि हमारा देश, विश्व भारती से निकले संदेश को पूरे विश्व तक पहुंचा रहा है. भारत आज अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में विश्व का नेतृत्व कर रहा है. भारत आज इकलौता बड़ा देश है जो पेरिस समझौते के पर्यावरण के लक्ष्यों को प्राप्त करने के सही मार्ग पर है.

पीएम ने कहा कि जब हम स्वतंत्रता संग्राम की बात करते हैं तो हमारे मन में सीधे 19-20वीं सदी का विचार आता है. लेकिन ये भी एक तथ्य है कि इन आंदोलनों की नींव बहुत पहले रखी गई थी. भारत की आजादी के आंदोलन को सदियों पहले से चले आ रहे अनेक आंदोलनों से ऊर्जा मिली थी.

मोदी ने कहा कि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक एकता को भक्ति आंदोलन ने मजबूत करने का काम किया था. भक्ति युग में, हिंदुस्तान के हर क्षेत्र, हर इलाके, पूर्व-पश्चिम-उत्तर-दक्षिण, हर दिशा में हमारे संतों ने, महंतों ने, आचार्यों ने देश की चेतना को जागृत रखने का प्रयास किया.

ज्ञान की सरिता का ये संगम, आजादी के आंदोलन की चेतना बन गया- PM
पीएम ने कहा कि भक्ति का ये विषय तब तक आगे नहीं बढ़ सकता जब तक महान काली भक्त श्रीरामकृष्ण परमहंस की चर्चा ना हो.  वो महान संत, जिनके कारण भारत को स्वामी विवेकानंद मिले. उन्होंने भक्ति का दायरा बढ़ाते हुए हर व्यक्ति में दिव्यता को देखना शुरु किया. उन्होंने व्यक्ति और संस्थान के निर्माण पर बल देते हुए कर्म को भी अभिव्यक्ति दी, प्रेरणा दी. भक्ति आंदोलन वो डोर थी जिसने सदियों से संघर्षरत भारत को सामूहिक चेतना और आत्मविश्वास से भर दिया. स्वामी विवेकानंद भक्ति, ज्ञान और कर्म, तीनों को अपने में समाए हुए थे.

मोदी ने कहा कि जब भक्ति और कर्म की धाराएं पुरबहार थी तो उसके साथ-साथ ज्ञान की सरिता का ये नूतन त्रिवेणी संगम, आजादी के आंदोलन की चेतना बन गया था. आजादी की ललक में भाव भक्ति की प्रेरणा भरपूर थी. समय की मांग थी कि ज्ञान के अधिष्ठान पर आजादी की जंग जीतने के लिए वैचारिक आंदोलन भी खड़ा किया जाए और साथ ही उज्ज्वल भावी भारत के निर्माण के लिए नई पीढ़ी को तैयार भी किया जाए. और इसमें बहुत बड़ी भूमिका निभाई, कई प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों ने, विश्वविद्यालयों ने. इन शिक्षण संस्थाओं ने भारत की आज़ादी के लिए चल रहे वैचारिक आंदोलन को नई ऊर्जा दी, नई दिशा दी, नई ऊंचाई दी. भक्ति आंदोलन से हम एकजुट हुए, ज्ञान आंदोलन ने बौद्धिक मज़बूती दी और कर्म आंदोलन ने हमें अपने हक के लिए लड़ाई का हौसला और साहस दिया.

भारत की समृद्धि से विश्व में समृद्धि लाने का अभियान- PM
PM ने कहा कि वेद से विवेकानंद तक भारत के चिंतन की धारा गुरुदेव के राष्ट्रवाद के चिंतन में भी मुखर थी. और ये धारा अंतर्मुखी नहीं थी. वो भारत को विश्व के अन्य देशों से अलग रखने वाली नहीं थी. उनका विजन था कि जो भारत में सर्वश्रेष्ठ है, उससे विश्व को लाभ हो और जो दुनिया में अच्छा है, भारत उससे भी सीखे. आपके विश्वविद्यालय का नाम ही देखिए: विश्व-भारती. मां भारती और विश्व के साथ समन्वय. विश्व भारती के लिए गुरुदेव का विजन आत्मनिर्भर भारत का भी सार है. आत्मनिर्भर भारत अभियान भी विश्व कल्याण के लिए भारत के कल्याण का मार्ग है. ये अभियान, भारत को सशक्त करने का अभियान है, भारत की समृद्धि से विश्व में समृद्धि लाने का अभियान है.

रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा साल 1921 में स्थापित विश्व भारती, देश का सबसे पुराना विश्वविद्यालय है. नोबेल पुरस्कार विजेता टैगोर पश्चिम बंगाल की प्रमुख हस्तियों में गिने जाते हैं. पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज