आयुर्वेद दिवस पर दो संस्थान राष्ट्र को समर्पित, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोले- यह भारत की विरासत

आयुर्वेद दिवस पर संबोधित करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
आयुर्वेद दिवस पर संबोधित करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

आयुष मंत्रालय 2016 से ही धन्वंतरि जयंती के मौके पर हर साल आयुर्वेद दिवस मनाता आ रहा है. शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो संस्थानों को राष्ट्र को समर्पित किया.

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  • Last Updated: November 13, 2020, 1:28 PM IST
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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  (Narendra Modi) ने शुक्रवार को पांचवें आयुर्वेद दिवस पर  दोआयुर्वेद संस्थानों, जामनगर के आयुर्वेद अध्यापन एवं अनुसंधान संस्थान (ITRA) और जयपुर के राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (NIA) को राष्ट्र को समर्पित किया. इस दौरान एक संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, 'आयुर्वेद, भारत की विरासत है जिसके विस्तार में पूरी मानवता की भलाई समाई हुई है. किस भारतीय को खुशी नहीं होगी कि हमारा पारंपरिक ज्ञान, अब अन्य देशों को भी समृद्ध कर रहा है. गर्व की बात है कि  WHO ने पारंपरिक चिकित्सा के लिए वैश्विक केंद्र (Global Centre for Traditional Medicine) की स्थापना के लिए भारत को चुना है.'

पीएम ने कहा, 'हमेशा से स्थापित सत्य रहा है कि भारत के पास आरोग्य से जुड़ी कितनी बड़ी विरासत है. लेकिन ये भी उतना ही सही है कि ये ज्ञान ज्यादातर किताबों में, शास्त्रों में रहा है और थोड़ा-बहुत दादी-नानी के नुस्खों में. इस ज्ञान को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुसार विकसित किया जाना आवश्यक है.' प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में अब हमारे पुरातन चिकित्सीय ज्ञान-विज्ञान को 21वीं सदी के आधुनिक विज्ञान से मिली जानकारी के साथ जोड़ा जा रहा है, नई रिसर्च की जा रही है. तीन साल पहले ही हमारे यहां अखिल भारतीय आयुर्वेदिक संस्थान की स्थापना की गई थी.

आयुर्वेद के प्रतिष्ठित संस्थान राष्ट्र को हुए समर्पित
जिन दो संस्थानों को देश को समर्पित किया गया उनके बारे में मंत्रालय ने जानकारी दी कि वे देश में आयुर्वेद के प्रतिष्ठित संस्थान हैं. जामनगर के आयुर्वेद अध्यापन एवं अनुसंधान संस्थान को संसद के कानून के माध्यम से राष्ट्रीय महत्व के संस्थान (आईएनआई) का दर्जा प्रदान किया गया है जबकि जयपुर के राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा मानद विश्वविद्यालय का दर्जा प्रदान किया गया है.
पीएम ने कहा, 'कहते हैं कि जब कद बढ़ता है तो दायित्व भी बढ़ता है. आज जब इन दो महत्वपूर्ण संस्थानों का कद बढ़ा है, तो मेरा एक आग्रह भी है- अब आप सब पर ऐसे पाठ्यक्रम तैयार करने की जिम्मेदारी है जो अंतरराष्ट्रीय आचरण के अनुकूल और वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप हो. मुझे विश्वास है कि हमारे साझा प्रयासों से आयुष ही नहीं बल्कि आरोग्य का हमारा पूरा सिस्टम एक बड़े बदलाव का साक्षी बनेगा.'



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मोदी ने कहा कि इसी साल संसद के मानसून सत्र में दो ऐतिहासिक आयोग भी बनाए गए हैं. जिसमें भारतीय चिकित्सा प्रणाली के लिए राष्ट्रीय आयोग और होम्योपैथी के लिए राष्ट्रीय आयोग शामिल है. नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारत की मेडिकल एजुकेशन में इंटीग्रेशन की एप्रोच को प्रोत्साहित किया गया है.

भारत अब टुकड़ों में नहीं, समग्रवादी तरीके से सोचता है- PM
प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी का भारत अब टुकड़ों में नहीं, समग्रवादी तरीके से सोचता है. स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों को भी अब समग्र दृष्टिकोण के साथ उसी तरीके से ही सुलझाया जा रहा है. आज देश में सस्ते और प्रभावी इलाज के साथ निवारक स्वास्थ्य देखभाल कल्याण पर ज्यादा फोकस किया जा रहा है.

कोरोना का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि कोरोना से मुकाबले के लिए जब कोई प्रभावी तरीका नहीं था तो भारत के घर-घर में हल्दी, काढ़ा, दूध जैसे अनेक इंम्यूनिटी बूस्टर जैसे उपाय बहुत काम आए. इतनी बड़ी जनसंख्या वाला हमारा देश अगर आज संभली हुई स्थिति में है तो उसमें हमारी इस परंपरा का बहुत बड़ा योगदान है. आज एक तरफ भारत जहां वैक्सीन की टेस्टिंग कर रहा है. वहीं दूसरी ओर को कोविड से लड़ने के लिए एर्नाकुलम रिसर्च पर भी अंतरराष्ट्रीय सहयोग को तेजी से बढ़ा रहा है. इस समय 100 से ज्यादा जगहों पर रिसर्च चल रही है.

पीएम ने कहा कि कोरोना काल में पूरी दुनिया में आयुर्वेदिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ी है. बीते साल की तुलना में इस साल सितंबर में आयुर्वेदिक उत्पादों का निर्यात करीब डेढ गुना बढ़ा है. मसालों के निर्यात में भी काफी बढ़ोतरी दर्ज हुई है.

जानें राष्ट्र को समर्पित हुए संस्थानों के बारे में
मंत्रालय के अनुसार संसद के कानून से हाल ही में बने जामनगर का आईटीआरएस विश्वस्तरीय स्वास्थ्य देखभाल केंद्र के रूप में उभरने वाला है. उसमें 12 विभाग, तीन क्लीनिकल प्रयोगशालाएं और तीन अनुसंधान प्रयोगशालाएं हैं. यह पारंपरिक दवा के क्षेत्र में अनुसंधान कार्य में अगुआ भी है, फिलहाल यहां 33 परियोजनाएं चल रही है. आईटीआरए को गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय परिसर के चार आयुर्वेदिक संस्थानों को मिलाकर बनाया गया है. यह आयुष के क्षेत्र में पहला संस्थान है जिसे आईएनआई दर्जा प्रदान किया गया.

उन्नत दर्जे के बाद आईटीआरए को आयुर्वेद शिक्षा के मानक को अद्यतन करने की स्वायत्तता होगी क्योंकि यह आधुनिक, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार पाठ्यक्रम चलाएगा. साथ ही यह आयुर्वेद को समसामयिक बल देने के लिए अंतर-विषयक सहयोग कायम करेगा.

बयान के अनुसार जयपुर के एनआईए को मानद विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया है. एक सौ 75 साल के धरोहर वाले एनआईए का पिछले कुछ दशकों से आयुर्वेद के संरक्षण, संवर्धन और प्रमाणन को आगे बढ़ाने में योगदान अहम रहा है. फिलहाल उसमें 14 विभिन्न विभाग हैं. संस्थान में विद्यार्थी-अध्यापक अनुपात बहुत अच्छा है,  2019-20 में यहां 955 विद्यार्थी और 75 अध्यापक हैं. यहां प्रमाणपत्र से लेकर डॉक्टरेट तक की डिग्रियां दी जाती है. अत्याधुनिक प्रयोगशाला सुविधाओं के साथ एनआईए अनुसंधान गतिविधियों में अग्रणी रहा है.

फिलहाल यहां 54 विभिन्न अनुसंधान परियोजनाएं चल रही है. मानद विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने से एनआईए तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में उच्च मानक हासिल करके नई ऊंचाइयों पर पहुंचने जा रहा है.
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